IPO का फुल फॉर्म होता है ‘Initial Public Offering’  मतलब कि जब भी कोई प्राइवेट कंपनी पहली बार शेयर मार्किट में लिस्ट होती है और पहली बार अपनी शेयर बचने के लिए जाती है तो इसे IPO कहा जाता है।

IPO रिलीज़ करने के बाद वह प्राइवेट कंपनी प्राइवेट नहीं रहती बल्कि पब्लिक कंपनी बन जाती है क्यों कि अब उसमे पब्लिक का भी पैसा लग जाता है।

जब आप IPO के लिए अप्लाई कर लेते हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको IPO मिलेगा ही मिलेगा। आपको मिल भी सकता है और नहीं भी मिल सकता है।

हो सकता है आप जिस कंपनी के IPO के लिए अप्लाई कर रहे हैं, वह कंपनी जितने शेयर बच रही है उससे ज्यादा एप्लीकेशन आ गयी हो, तो सभी को नहीं मिल सकता।

– दूसरी इम्पोर्टेन्ट चीज है Lot Size, यहाँ पर आप अपनी मर्जी से 2, 4, 5, 10 शेयर्स नहीं खरीद सकते बल्कि यहाँ पर जो Lot Size होती है मतलब कि मिनिमम क्वांटिटी होती है, आप उससे कम नहीं खरीद सकते।

तीसरी इम्पोर्टेन्ट चीज है Maximum Limit  यानि कि आप अपने डीमेट अकाउंट से एक मैक्सिमम लिमिट तक ही एक शेयर के लिए अप्लाई कर सकते हो। इससे ज्यादा आप Lot नहीं खरीद सकते हो।

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