माँ पर हिंदी कविता | Poem on Mother in Hindi | Maa Par Kavita

 Poem on Mother in Hindi: दोस्तों आज के इस लेख में मैं आपको माँ पर लिखी गयी कुछ कविताओं का संग्रह आपके साथ शेयर करने जा रही हूँ। मैं उम्मीद करती हूँ की Maa Par Hindi Kavita का यह संग्रह आपको बहुत ज्यादा पसंद आएगी।

वैसे तो माँ पर जितनी भी कविताएं लिखी क्यों न जाए वह बहुत ही ज्यादा कम है क्यों की माँ एक ऐसा आसान और अनमोल और अनमोल शब्द है जिसे किसी परिभाषा की जरुरत नहीं, क्यों कि यह कोई शब्द नहीं, एहसास है। माँ प्रेम, त्याग और सेवा की मूर्ति है। माँ ईश्वर का पतिरूप है।

तो चलिए दोस्तों अब मैं आपको माँ पर संग्रह किये गए कुछ लोकप्रिय कविता (Poem on Mother in Hindi) बताता हूँ। अगर आपको यह कविताएं अच्छी लगती है आप सोशल मीडिया जैसे कि facebook, whatsapp या twitter पर सबके साथ शेयर भी कर सकते हैं।

 

 Poem on Mother in Hindi | Maa Par Kavita | Poem About Mother in Hindi

 

 Poem on Mother in Hindi Poem on Mother in Hindi
Poem on Mother in Hindi

 

(1) माँ और भगवान | Best Poem on Mother in Hindi

मैं अपने छोटे मुख कैसे करूँ तेरा गुणवान

माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

माता कौशल्या के घर में जन्म राम ने पाया

ठुमक-ठुमक आंगन में चलकर सबका ह्रदय जुडाया

पुत्र प्रेम में थे निमग्न कौशल्या माँ के प्राण

माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

दे मातृत्व देवकी को यसुदा की गोद सुदाई

ले लकुटी वन-वन भटके गोचारण कियो कन्हाई

सारे ब्रजमंडल में गुंजी थी बंशी की तान

माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

 

तेरी समता में तू ही है मिले न उपमा कोई

तू न कभी निज सूत इ रूठी मृदुता अमित समोई

लाड़-प्यार से सदा सिखाया तूने सच्चा ज्ञान

माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

कभी न विचलित हुई रही सेवा में भूखी प्यासी

समझ पुत्र को रुग्ण मनौती मानी रही उपासी

प्रेमामृत नित पीला पिलाकर किया सतत कल्याण

माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

‘विकल’ न होने दिया पुत्र को कभी न हिम्मत हारी

सदय अदालत है सूत हित में सुख-दुःख में महतारी

काँटों पर चलकर भी तूने दिया अभय का दान

माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

 – जगदीश प्रसाद सारस्वत ‘विकल’ 

 

(2) Maa Par Kavita in Hindi

चूल्हे की

जलती रोटी से

तेज आंच में जलती माँ !

भीतर- भीतर

बल्के फिर भी

बाहर नहीं उबलती माँ!

धागे-धागे

यादें बुनती,

खुद को,

नई रुई से धुनती

दिन-भर

तनी ताँत सी बजती

घर-आंगन में चलती माँ !

सिर पर

रखे हुए पूरा घर

अपनी –

भूख-प्यास से ऊपर,

घर को

नया जन्म देने में

धीरे-धीरे गलती माँ !

फटी-पुरानी

मेळी धोती

साँस – साँस में

खुशबू बोती,

धुप-छाँव में

बनी एक दी

चेहरा नहीं बदलता माँ !

– कौशलेन्द्र 

(3) Emotional Poem in Hindi of Mother

मेरी आंखों का तारा ही, मुझे आंखें दिखाता है

जिसे हर एक ख़ुशी दे दी, वह हर गम से मिलाता है

जुबा से कुछ कहूं कैसे कहूं किससे कहूं माँ हूँ

सिखाया  बोलना जिसको,  वो चुप रहना सिखाता है

सुला कर सोती थी जिसको वह अब सभर जगाता है

सुनाई लोरिया जिसको, वो अब ताने सुनाता है

सिखाने में क्या कमी रही मैं यह सोचूं

जिसे गिनती सिखाई गलतियां मेरी गिनाता है

 – दिनेश रघुवंशी 

 

(4) हजारों दुखड़े सहती | Very Emotional Poem on Mother in Hindi

हजारों दुखड़े सहती है माँ

फिर भी कुछ न कहती है माँ

हमारा बेटा फलो ओ फुले

यही तो मंतर पड़ती है माँ

हमारे कपडे कलम ओ कॉपी

बड़े जतन से रखती है माँ

बना रहे घर बंटे न आंगन

इसी से सबकी सहती है माँ

रहे सलामत चिराग घर का

यही दुआ बस करती है माँ

बड़े उदासी मन में जब जब

बहुत याद में रहती है माँ

नज़र का कांटा कहते है

जिगर का टुकड़ा कहती है माँ

मनोज मेरे ह्रदय में हरदम

ईश्वर जैसी रहती है माँ

 

 – मनोज भावुक 

 

(5) माँ पर हिंदी कविता | Maa Par Kavita in Hindi

अंधियारी रातों में मुझको

थपकी देकर कभी सुलाती

कभी प्यार से मुझे चूमती

कभी डांटकर पास बुलाती

कभी आंख के आंसू मेरे

आँचल से पोछा करती वो

सपनों के झूलों में अक्सर

धीरे-धीरे मुझे झुलाती

सब दुनिया से रूठ रपटकर

जब मैं बेमन से सो जाता

हौले से वो चादर खींचे

अपने सीने मुझे लगाती

 -अमित कुलश्रेष्ठ 

(6) ममता की मूरत | Short Poem on Mother

क्या सीरत क्या सूरत थी

माँ ममता की मूरत थी

पाँव छुए और काम बने

अम्मा एक महूरत थी

बस्ती भर के दुख सुख में

एक अहम जरुरत थी

सच कहते हैं माँ हमको

तेरी बहुत जररत थी

   –  मंगल नसीम 

 

(7) Meri Pyari Maa Par Kavita in Hindi

 माँ तुम्हारा स्नेहपूर्ण स्पर्श

अब भी सहलाता है मेरे माथे

तुम्हारी करुणा से भरी आँखें

अब भी झुकती है मेरे चेहरे पर

जीवन की खूंटी पर

उदासी का थैला टांगते

अब भी कानों में पड़ता है

तुम्हारा स्वर

कितना थक गई हो बेटी

और तुम्हारे निर्बल हाथों को मैं

महसूस करती हूँ अपनी पीठ पर

माँ

क्या तुम अब सचमुच नहीं हो

नहीं,

मेरी आस्था, मेरा विश्वास, मेरी आशा

सब यह कहते हैं कि माँ तुम हो

मेरी आँखो के दिपते उजास में

मेरे कंठ के माधुर्य में

चूल्हे की गुनगुनी भोर में

दरवाजे की सांकल में

मीरा और सुर के पदों में

मानस के चौपाई में

माँ

मेरे चारों ओर घूमती यह धरती

तुम्हारा ही तो विस्तार है।

    – शिला मिश्रा 

(8) बहुत याद आती है माँ | Sad Poem on Mother in Hindi

बहुत याद आती है माँ,

मैं हूँ कौन बताया था माँ ने.

मुझे पहला कलमा पढ़ाया था माँ ने,

वो यह चाहती थी कि मैं सिख जाऊँ.

वो हाथों से खिलाती थी मुझ को,

कभी लोरिया भी सुनाती थी मुझ को.

वह नन्हें से पैर चलाती थी मुझको,

कभी दूर जाकर बुलाती थी मुझको.

मेरा लड़खड़ाकर पहलु में गिरना,

उठाकर गले से लगाती थी मुझको.

कि चलना सिखाती है माँ,

बहुत याद आती है माँ.

 

Maa Par Kavita
image source: trueshayari.in

 

(9) माँ का आँचल | Mother Poem in Hindi

माँ की ममता करुणा न्यारी,

जैसे दया की चादर.

शक्ति देती नित हम सबको,

बन अमृत की गागर.

साया बनकर साथ निभाती,

चोट न लगने देती .

पीड़ा अपने ऊपर ले लेती,

सदा सदा सुख देती.

माँ का आँचल सब खुशियों की रंगारंग फुलवारी,

इसके चरणों में जन्नत है आनंद की किरकारी.

अद्भुत माँ का रूप सलोना बिलकुल रब के जैसा,

प्रेम की सागर से लहराता इसका अपनापन ऐसा.

 

(10) माँ का त्याग हिंदी कविता | Maa Ka Tyag Hindi Kavita

तुम एक गहरी छाँव है अगर तो ज़िन्दगी धुप है माँ

धरा पर कब कहाँ तुझसा कोई स्वरुप है माँ

अगर ईश्वर कहीं पर है उसे देखा कहां किसने

धरा पर तो तू ही ईश्वर का रूप है माँ, ईश्वर का कोई रूप है माँ

नई ऊंचाई सच्ची है नए आधार सच्चा है

कोई चीज न है सच्ची न यह संसार सच्चा है

जरा सी देर होने पर सब से पूछती माँ,

पलक झपके बिना घर का दरवाजा ताकती माँ

हर एक आहट पर उसका चौक पड़ना, फिर दुआ देना

मेरे घर लौट आने तक, बराबर जागती है माँ

 

(11) Maa Par Kavita Hindi Me

उदास होता हूँ तो हंसा देती है माँ

नींद नहीं आती है तो सुला देती है माँ

मकान को घर बना देती है माँ

खुद भूखी रहकर भी मेरा पेट भर देती है माँ

जमीं से सिखर तक साथ देती है माँ

जन्म से आखरी साँस तक साथ देती है माँ

जिंदगी में मुश्किलें चाहे जितनी भी हो

हंस के गुजार लेती है माँ

परिवार छोटा हो या बड़ा संभाल लेती है माँ

मेरी आँखों में छुपी हर एक ख्वाइस को पहचान लेती है माँ

मेरे हर दर्द की दवा करती है माँ

मेरी हर खता को माफ़ कर देती है माँ

रिश्तों को जोड़ती है माँ

बिना किसी स्वार्थ के प्यार देती है माँ

परिवार खुश होता है तब खुश होती है माँ

तू चाहे संतान न हो उसकी फिर भी दुलार देती है माँ

   – नरेंद्र वर्मा 

 

(12) माँ के हाथ | Mothers Day Poem in Hindi

पाया है प्यार जिससे, वही है माँ तेरे हाथ

ली थी  जब साँस पहली,

माँ के हाथों ने ही मुझे थामा

कदम उठाया पहला,

तब माँ के हाथों ने ही चलना सिखाया

जब कभी भी गिरेंगे आंसू मेरे आँखों से

तेरे हाथ ही मुझे पकड़ लेंगे

जब लगेगी कोई चोट मुझे

तेरे हाथों से ही होगा ठीक मुझे

पाया है प्यार जिससे, वही है माँ तेरे हाथ

 

(13) Short Poem on Mother in Hindi

घुटनों से रेंगते -रेंगते,

कब पैरों पर खड़ा हुआ

तेरी ममता की छाँव में

जाने कब बड़ा हुआ

काला टिका दूध मलाई

आज भी सब कुछ वैसा है

मैं ही मैं हूँ हर जगह

प्यार यह तेरा कैसा है

सीधा साधा भोला भाला

मैं सबसे अच्छा हूँ

कितना भी हो जाऊं बड़ा

माँ मैं आज भी तेरा बच्चा हूँ

  – अज्ञात 

दोस्तों आपको माँ पर यह कविताएं “Poem on Mother in Hindi” कैसी लगी आप हमें कमेंट के माध्यम से जरूर बताएं और अगर Maa Par Kavitayen आपको अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों और परिवारजनों के साथ भी जरूर शेयर करे।

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