64 Best Moral Stories in Hindi 2022 | 64 बेस्ट नैतिक कहानियों का संग्रह हिंदी में

इस पोस्ट में हम आपके लिए लेकर आए हैं 64 बेस्ट नैतिक कहानियों का संग्रह हिंदी में ( Best Moral Stories in Hindi), उम्मीद करते हैं यह सारी Best Moral Stories in Hindi आपको जरूर पसंद आएगी।

64 Best Moral Stories in Hindi 2022

 

1. प्यासा कौवा की कहानी – Moral Stories in Hindi

 Best Moral Stories in Hindi

एक बार एक जंगल में एक कौवा रहता था। एक दिन वह कौवा यात्रा कर रहा था। उसे बहुत प्यास लगी तो वह एक स्थान पर रुक गया। और आसपास पानी की तलाश करने लगा। मगर उसे पानी नहीं मिला। प्यास के कारन वह बहुत कमजोर हो गया था। पर उसने हिम्मत नहीं हारी। और जंगल के आसपास पानी ढूंढने लगा।

उड़ते हुए उसे एक घर दिखा, यह सोचते हुए कि उसे वहां पानी मिल सकता है। वह उस घर की ओर गया और घर के ऊपर बैठ गया। उसने घर के अंदर एक घड़ा देखा। जल्दी से वह उस घड़े के पास उड़कर गया। उसने देखा कि उसमें बहुत ही थोड़ा पानी है।

पानी को देखते ही उसे बहुत ख़ुशी हुई। मगर क्यों कि पानी बहुत निचे था, उसका मुँह पानी तक पहुंच नहीं पा रहा था। उसने थोड़ा सोचा। फिर उसे एक उपाय सुझा, “अगर मैं इसमें कुछ कंकर डाल दूँ तो पानी शायद ऊपर आ जायेगा। और फिर मैं पानी पी सकता हूँ।”

जल्द ही वह कुछ कंकर के तलाश में लग गया। उसे कुछ कंकर मिल गए। उनके पास जाकर उसने एक एक करके कंकर उठाने शुरू किये। फिर घड़े के पास जाकर उसमे डालने लगा। पानी थोड़ा ऊपर आया पर अभी भी वह पहुंच नहीं पा रहा था। उसने फिर भी हार नहीं मानी और एक एक करके कंकर उठाकर डालने लगा।

काफी समय के बाद पानी और ऊपर आया। कौवा बहुत खुश हुआ और भरके अपनी प्यास बुझाई। उसने अपने और दोस्तों को भी बुलाया। बहुत से पंछी पानी पिने आए। उन्होंने कौए को शुक्रिया कहा और फिर वहां से उड़ गए।

 

2. मुझे सब पता है – Moral Stories in Hindi

Best Moral Stories in Hindi

एक बच्चा पढ़ने में  बहुत  होशियार था। वह हमेशा कक्ष में अवल आता था। लेकिन धीरे-धीरे उसको यह घमंड हो गया कि उसे सब कुछ आता  है। वह अपने दोस्तों से बात-बात पर कहता, “मुझे पता है, बताने की जरुरत नहीं है।”

घर पर  भी जब उसके माता -पिता उसे कुछ समझानें की कोशिश करते तो ही उसका यही जवाब होता “मुझे पता है कुछ बताने की जरुरत नहीं है।”

धीरे-धीरे उसके इस अहंकार से उसकी पढाई प्रभावित होने लगी। वह किताबें खोलता तो उसके अंदर से उसका अहंकार उसे पढ़ने न देता। उसे लगता कि उसे तो यह विषय आता ही है, वह पढ़कर क्या करेगा।”

धीरे-धीरे उसके शिक्षकों को भी उसका यह व्यबहार खटकने लगा। वे जब भी उसे कुछ समझाने की कोशिश करते वह हमेशा बीच में टोक देता और बोलता, “मुझे पता है, मुझे आता है।”

एक दिन उसके शिक्षक ने उसे समझाने के लिए एक नया तरीका निकाला। शिक्षक ने उसे अपने घर चाय पर बुलाया। जब वह शिक्षक के घर पहुंचा तो शिक्षक ने  कहा ,  “तुम थक गए होंगे बैठ  जाओ। थोड़ी चाय पिलो फिर बात करेंगे।”

शिक्षक अंदर से चाय ले आई। उन्होंने चाय का कप मेज पर रखा और केतली से धीरे-धीरे चाय डालने लगा। कप भर गया लेकिन वह चाय को डालता ही गया। चाय ऊपर से गिरने लगी।

बच्चे  ने कहा, “सर ठहरिए, क्या आप भूल गए कप भर गया है। इसमें जगह नहीं बचीहै फिर भी आप चाय डालते ही जा रहे हैं।” शिक्षक ने कहा ,”बेटा तुम्हे इस कप के संवंध में जितना होश है उतना अपने मन के संवंध में नहीं। तुम कप को भरते हुए देखकर तो जागे हुए हो और चिंतित हो कि अब कप में जगह नहीं बची, इसमें चाय कैसे आएगी? इसी तरह तुमने अपने मन को भी भर लिया है अब कोई तुम्हारे मन में अगर कुछ डालने की कोशिश करता है तो वह दिखेगा नहीं। तुमने अपने मन को घमंड से भर लिया है। अगर तुम्हे बढ़ा आदमी बनना है,समझदार बनना है, तुम कुछ सीखना चाहते हो तो अपने मन में सिखने की जगह बनाकर रखो। बार-बार मुझे पता है, मैं सब जानता हूँ का यह घमंड तुम्हे कभी कुछ सिखने नहीं देगा।”

बच्चा होनहार था। उसे शिक्षक का घर बुलाने का मकसत तुरंत समझ आ गया। इस घटना के बाद उसने अपनी आदत ही बदल ली।

शिक्षा – इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि अहंकार हमें सिखने से रोकता है, हमें अहंकार नहीं करना चाहिए। 

 

3. भाग्य और बुद्धि का मुकाबला – Moral Stories in Hindi For Kids

 Best Moral Stories in Hindi

एक दिन एक स्थान पर भाग्य और बुद्धि की मुलाकात हो गई। दोनों बैठकर बातें करने लगे। बातें करते-करते उनमे बहस छिड़ गई। भाग्य ने कहा, “मैं बढ़ा हूँ। अगर मैं साथ न दू तो आदमी कुछ नहीं कर सकता। मैं जिसका साथ देता हूँ उसकी जिंदगी बदल जाती है चाहे उसके पास बुद्धि हो या न हो।” बुद्धि ने कहा, “बुद्धि के बिना किसी का भी काम नहीं चल सकता। बुद्धि न हो तो केवल भाग्य से कुछ नहीं बनता।”

आखिर दोनों ने फैसला किया कि खाली बहस करने की बजाई अपनी अपनी शक्ति का प्रयोग करके देखते हैं पता चल जाएगा कि कौन बड़ा है। वे दोनों एक किसान के पास गए। किसान बहुत ही गरीब था। वह अपनी कुटिया के बाहर बैठा अपनी किसमत पर रो  रहा  था।भाग्य ने कहा, “देखो इस इंसान के पास बुद्धि नहीं है मैं इसका भाग्य बदलता हूँ। यह खुशाल और सुखी हो जाएगा। तुम्हारी जरुरत ही नहीं पड़ेगी।

किसान के कुटिया के साथ ही उसका एक मात्र खेत था। उसने उसमें ज्वार बो रखी थी। बालियां आ ही रही थी। इस बार उसने बालियों को निकट से देखा। बालियों में ज्वार के स्थान पर भाग्य के प्रताप से मोती लगे थे। बुद्धिहीन किसान ने अपना माथा पीटा और कहा, “अरे इस बार तो सत्यानास हो गया। ज्वार के स्थान पर यह पत्थर-कंकर से भला क्या उग आए हैं!”

किसान रो ही रहा था कि उधर से उस राज्य का राजा और उसका मंत्री गुजरे। उन्होंने दूर से ही ज्वार की वह खेती देखि। मोतियों की चमक देखते ही वह पहचान गए। दोनों घोडा गाड़ी से उतरे और निकट से देखा। वे तो सचमुच के मोती थे! दोनों बोले कि यह कितना धनी किसान है जिसके खेत में मोती ही मोती उगते हैं।

मंत्री ने किसान से कहा से कहा, “भाई हम एक बाली तोड़कर ले जाए?” किसान बोला, “एक क्या सो पचास उखाड़ लो। पत्थर ही पत्थर तो लगे है इनमे। राजा ने मंत्री के कान में  कहा, “देखो कितना विनम्र है यह अपने मोतियों को पत्थर कह रहा है।” मंत्री ने कहा, “और दिल भी बड़ा है। हमने एक माँगा और यह सो पचास ले जाने को कह रहा है महाराज।”

वे दो बालियां तोड़कर ले गए। घोडा गाड़ी में बैठकर राजा ने मोतियों को हाथ में तौलते हुए कहा, “मंत्री हम राजकुमारी के लिए योग्य वर ढूंढ रहे थे न तो दूर क्यों जाए? यह किसान जवान है, धनि है और कितना बड़ा दिल है इसका इसलिए तो मोतियों को पत्थर कहता है। क्या ख्याल है?” मंत्री बोला, “महाराज! आपने मेरी मुँह की बात छीन ली।”

मंत्री घोडा गाड़ी से उतरकर किसान के पास गया और किसान के हाथ पर एक एक सोने की मुद्रा रखकर कहा, “युवक! हम तुम्हारा विवाह राजकुमारी से तय कर रहे है।” किसान घबराया और बोला, “नहीं मालिक! मैं एक निर्धन किसान हूँ।” मंत्री समझा कि विनम्रता के कारण ही वह ऐसा कह रहा है। उन्होंने उसे उसके पीठ पर थपाकर उसे चुप करा दिया।

राजा के जाने के बाद किसान ने लोगों को बताया कि उसकी शादी राजकुमारी से तय हो गई है। सब हँसे। एक ने कहा, “अरे बेवकूफ! यह शायद तुझे मरवाने की चाल है हम तो तेरे साथ नहीं चलेंगे कहीं हम भी न मारे जाए। अकेले अपनी बारात में जाइयो।” किसान को अकेले ही जाना पड़ा। राजा ने इसका बुरा नहीं माना।

मंत्री ने उसे अपने घर ठहराया। वही से उसकी बारात गई और धूमधाम से राजकुमारी से उसकी शादी हो गई। शादी हो जाने के बाद राजा ने दामाद को महल का ही एक भाग दे दिया। राजा का कोई पुत्र नहीं था तथा वह दामाद को अपने पास ही रखना चाहता था ताकि राजसिंहासन भी बाद में उसे सौंप सके।

राजपरिवार की परम्परा के अनुसार राजकुमारी वधु के वेश में सजधजकर खाना लेकर रात को अपने पति के कक्ष में गई। किसान ने इतनी सुंदरता से सजी और आभुषणो से लदी कन्या सपने में भी नहीं देखि थी। वह डर गया। उसके मुर्ख दिमाग में अपनी दादी की बताई कहानी याद आ गई जिसमे एक राक्षसी सुंदरी का वेश बनाकर गहनों से सजीधजी एक पुरुष को खा जाती है।

उसने सोचा कि यह भी कोई राक्षसी है जो उसे खाने के लिए आई है। वह उठा और राजकुमारी को धक्का देकर गिराता हुआ चिल्लाता बाहर की और भगा। भागता-भागता वह सीधे नदी किनारे पहुँचा और पानी में कूद गया। उसने सोचा कि राक्षसी का पति होने से अच्छा मर जाना होगा।राजकुमारी के अपमान की बात सुनकर राजा आगबबूला हो गया। राजा की सिपाहियों ने किसान को डूबने से पहले ही बचा लिया। उधर राजा ने आदेश जारी कर दिया कि दूसरे दिन उसे मृत्यु दंड दिया जाएगा।”

बुद्धि ने भाग्य से कहा, “देखा तेरा भाग्यवान बुद्धि के बिना मारा जाने वाला है। अब देख मैं इसे कैसे बचाती हूँ।”  इतना कहे बुद्धि ने किसान में प्रवेश किया। किसान को राजा के सामने पेश किया गया तो किसान बोला, “महाराज! आप किस अपराध में मुझे मृत्यु दंड देने चले हैं? मेरे कुल में मान्यता है कि विवाह के पश्चात् पहली रात को यदि वर-वधु की जानकारी में कोई व्यक्ति नदी में डूब मरे तो वधु विधवा हो जाती है या संतानहीन रह जाती है। जब मेरी पत्नी मेरे कक्ष में आई तो नदी की ओर से मुझे बचाओ बचाओ की पुकार सुनाई दी। मैं तुरंत उठकर डूबने वाले को बचाने के लिए भागा। आप मुझे कोई भी दंड दे मैं अपनी पत्नी के लिए कुछ भी करूँगा।”

उसकी बात सुनते ही राजा ने उठकर किसान को गले लगा लिया। पिता-पुत्री ने लज्जित होकर अपने असंगत व्यवहार के लिए माफ़ी मांगी और फिर तीनो ख़ुशी-ख़ुशी महल के अंदर चले गए। बुद्धि ने मुस्कुराते हुए भाग्य की ओर देखा।

शिक्षा – जीवन में सफलता के लिए भाग्य और बुद्धि दोनों का मेल जरुरी है। 

 

4. कुसंगति का परिणाम – Moral Stories Hindi For Kids

कुसंगति का परिणाम - Best Moral Stories in Hindi

किसी किसान के पास एक ऊंट था। वह दिन भर ऊंट से काम लेता परंतु चारा-पानी न देता। रात के समय वह ऊंट को खोल देता। ऊंट गाँव के बाहर इधर-उधर भटककर पेड़ो की पत्तिया खा कर अपना पेट भरता। दूसरे दिन किसान शीघ्र ही उसे पकड़कर ले आता। ऊंट दिन भर किसान के खेत में काम करता, उसकी गाड़ी खींचता लेकिन किसान तो उसकी तनिक भी परवा नहीं करता था।

यु ही दिन बीत रहे थे ऊंट की मुलाकात एक सियार से हुई। सियार ने उससे मित्रता कर ली। वास्तव में सियार जानता था कि ऊंट भविष्य में उसके काम आ सकता है। इस कारण उसने ऊंट से मित्रता कर ली। ऊंट को धूर्त सियार के वास्तविकता का कुछ भी पता नहीं चला।

सियार और ऊंट रात को मिलने लगे। सियार ऊंट के प्रति सहानुभूति प्रकट करता और ऊंट उससे अपने प्रति होने वाले अत्याचार वर्णन करती। एक रात सियार ने ऊंट से लाभ उठाने के बारे में सोच ही लिया। रात के वक्त जब उसकी मुलाकात ऊंट से हुई तो वह बोला, “भाई ऊंट तुम यह पत्तिया खाकर कब तक अपने आपको सताती रहोगी। क्या तुम्हे स्वादिष्ट वस्तुए खाने का सोख नहीं हैं?”

ऊंट बोला, “भाई सियार मेरे भाग्य में कहाँ है यह सब वस्तुए। मुझे तो पत्तिया मिल जाये यही बहुत हैं।”

वास्तव में सियार को खबर मिली थी कि नदी पार खेत में बहुत तरबूज और खरबूजे है। वह उन्हें खाना चाहता था परंतु नदी पार करना उसके बस में न था। ऊंट पर सवारी करके नदी सरलता से पार कर जा सकती थी।

सियार बोला, “नहीं नहीं मैं तुम्हे इस प्रकार दुखी होते हुए नहीं देख सकता। आज मैं तुम्हे दावत दूंगा। नदी पार मेरे मित्र का खेत है। मुझे अपने पीठ पर बैठाकर नदी के पार चलो, वहाँ उसने स्वादिष्ट तरबूज और खरबूजे उगाये हैं।”

ऊंट उसकी बातों में आ  गया और उसे अपनी पीठ पर बैठाकर चल दिया। नदी पार जाकर ऊंट ने सियार को अपनी पीठ से उतार दिया। सियार ने उससे कहा कि इन खेतो में वह निर्भय होकर तरबूज और खरबूजे खा सकता है। यह कहकर सियार एक ओर जाकर खाने लगा। वह जल्दी-जल्दी खा रहा था कि कही खेत के रखवाले उसे देख न ले। उसने शीघ्र ही अपना पेट भर लिया। परंतु ऊंट अभी भी तरबूज खा रहा था। बड़ा आकर होने की बजह से उसे पेट भरने में देर लगती है।

जब काफी देर हो गई तो सियार ने सोचा कि यह तो सारी रात खाता ही रहेगा, क्यों न जोर से स्वर निकलकर रखवालो को जगा दूँ। वे इसे मारकर खेत से निकाल देंगे और यह वापस चलने को मजबूर हो जाएगा। उसने ऐसा ही किया।

सियार का ऊँचा स्वर सुनकर रखवाले जाग गए। उन्होंने देखा कि ऊंट सारे फसल चट किए जा रहा है। उन्होंने लाठियों से ऊंट को बहुत मारा सियार छुपकर सारा तमाशा देखता रहा। इस प्रकार कुसंगति के कारण ऊंट को न केवल चोरी करनी पड़ी अभी तो चोरो वाली मार भी खानी पड़ी। वह समझ गया कि यह सब सियार की सररत है परंतु बोला कुछ नहीं। लंगड़ाता हुआ ऊंट खेत से बाहर भागा और सियार को वही छोड़ आया।

 

5. बाघ और लालची व्यक्ति – Kids Moral Stories in Hindi

बाघ और लालची व्यक्ति - Best Moral Stories in Hindi

एक समय की बात है, एक जंगल में एक बूढ़ा बाघ रहता था। बूढ़ा होने की बजह से वह शिकार भी नहीं कर पाता था इसलिए बहुत दुबला  और कमजोर हो गया।

“ऐसे बिना खाए चलता रहे तो मैं ज्यादा दिन नहीं जी पाऊँगा। जीने के लिए खाना जरुरी है मुझे कुछ सोचना पड़ेगा।”  यह बोलकर बाघ खाने की तलाश में निकल पड़ा।

कुछ दूर जाने के बाद बाघ को जंगल के रास्ते में चमकता हुआ एक चीज दिखा। बाघ बोला, “अरे यह चमकता हुआ चीज क्या है? यह तो सोने का कंगन है लेकिन यह  जंगल में कैसे आया? मैं इसे अपने पास रख लेता लेकिन यह मेरे किस काम आएगा। सुना हैं इंसान बहुत ही लालची होते हैं। किसी इंसान को लालच दे सकूंगा। लालच में आकर वह मेरे पास आएगा और तब मैं उसे मारकर खा जाऊँगा।” यह बोलकर बाघ आगे चलने लगा।

चलते-चलते वह एक कीचड़ भरे तालाब के किनारे पहुँचा। बाघ तालाब किनारे किसी इंसान के आने का इंतजार करने लगा। कुछ समय बाद एक आदमी तालाब किनारे आ गया। उसे देखकर बाघ बोला, “अरे ओ भाई, सुन रहे हो” बाघ को देखकर आदमी काँपने लगा। तभी बाघ बोला, “अरे घबराओ नहीं मैं तुम्हे कुछ नहीं करूँगा। मुझे तुमको कुछ बताना हैं इसलिए बुलाया है।

बाघ ने वह सोने का कंगन आदमी को दिखाया और कहा, ‘यह तो मेरे कोई काम का नहीं। यह तुम ले लो तुम्हारे काम आ जाएगा। तुम इधर औ और इसे ले जाओ।”

,आदमी बोला, “मैं तुम्हारे पास जाऊँ! मैं क्या तुम्हे मुर्ख दीखता हूँ। तुम्हारा कोई विश्वास नहीं। अगर मैं तुम्हारे पास जाऊँगा तो तुम मुझे खा जाओगे इसलिए नहीं चाहिए मुझे तुम्हारा कंगन। तुम्हारा कंगन तुम्हारे पास रखो।”

घ बोला, ‘”अरे अरे तुम मुझे गलत समझ रहे हो। मैं शाखाहारी बन गया हूँ और मांस खाना मैंने बंद कर दिया है। अगर मैं यह कंगन किसी को दें दूँ तो मुझे शांति मिलेगी नहीं तो मरने के बाद भी मुझे शांति नहीं मिलेगी।”

आदमी ने मन ही मन सोचा, “क्या पता यह सच बोल रहा हो। कंगन तो बहुत सुंदर हैं। यह इतना बोल ही रहा है तो जाकर ले ही लेता हूँ।” यह बोलकर आदमी कंगन लेने के लिए तालाब में उतरा और कीचड़ में फँस गया।

तभी बाघ बोला, “लालची इंसान अब तो तू मेरे पेट में जाएगा।” यह कहकर बाघ तालाब में उतरा और उस आदमी को मार डाला।”

शिक्षा – इस कहानी से हमें यह सीख मिलती हैं की लालच बुरी बला है।

 

6. गिलहरी और पत्थर का अखरोट – Best Moral Stories in Hindi

गिलहरी और पत्थर का अखरोट - Best Moral Stories in Hindi

एक बार एक जंगल में एक बहुत ही बड़ा पेड़ था जिस पर बहुत सारी गिलहरी रहती थी। वह सभी बहुत खुश थे। बस वहाँ एक परेशानी थी। उस परेशानी का नाम था बीगपेरी। बीगपेरी पुरे इलाके में सबसे बड़ी गिलहरी थी, जिसे दुसरो को परेशान करना बहुत अच्छा लगता था।

उसी पेड़ में एक छोटी सी गिलहरी भी रहती थी जिसे बीगपेरी से डर नहीं लगता था। बीगपेरी हमेशा स्ट्रीकी के परेशान करता रहता और उसके अखरोट चुरा लेता। स्ट्रीकी बहुत गुस्से में था पर वह कुछ नहीं कर सकता था।

फल खाते-खाते उसके हाथ वह पत्थर का अखरोट आया। उसने जैसे ही अखरोट मुँह में लिया वह बहुत जोर से चिल्ला उठा। पत्थर के अखरोट से बीगपेरी के दांत टूट गए और वह दर्द से इधर-उधर दौड़ने लगा।

शिक्षा – इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें कभी भी दुसरो को परेशान नहीं करना चाहिए। 

 

7. भूखा चूहा – Moral Story in Hindi

भूखा चूहा - Best Moral Stories in Hindi

एक बार था एक चूहा जिमी नाम का। जिमी अपना समय अक्सर इधर-उधर अकेला घुमा करता था खाने की खोज में और खुदको बना रखने में। एक दिन जिमी बहुत ही भूखा था और उसको खाने के लिए कुछ न मिला। उसने हर जगह बहुत ढूंढा परंतु उसे भोजन के लिए कुछ भी प्राप्त न हो पाया। कई दिनों तक यही हाल रहा। जिमी की सारी मेहनत बेकार हो गई क्यूंकि कहीं पर भी खाना नहीं था तथा जिमी बहुत दुबला-पतला सा और दुर्वल बन गया।

एक दिन जिमी कुछ बोरियों के पास चल रहा था। वह अपनी भूख को लेकर तड़प रहा था। उसी वक्त उसे मकाई का एक बोरी मिला। जिमी मकाई को देखकर हैरान और खुश हो गया। टोकरी में एक छोटा सा छेद था। अंदर घुसने के लिए जिमी के लिए वह छेद काफी था और प्रतीक्षा किए बिना जिमी मकाई पर टूट पड़ा।

जिमी आसानी से टोकरी के अंदर चला गया और मकाई को जल्दी-जल्दी खाने लगा। क्यूंकि जिमी भूखा था वह बेहद बहुत सारी मकाई को निगलने लगा। वह ललचा गया और एक-एक करके  ही गया।

जिमी रुका ही नहीं और धीरे-धीरे उसका पेट बढ़ता ही गया। सारी मकाई खाने के बाद जिमी बहुत ही मोटा हो गया और बहुत देर हो चुकी थी जिमी को यह अहसास होने के लिए कि उसने जररत से दयादा खा लिया पर जिमी बहुत संतुष्ट था की उसने सारी मकाई खा ली। अब जिमी टोकरी से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था परंतु हो ही नहीं पाया क्यूंकि टोकरी का छेद बहुत छोटा था और जिमी का मोटा सा पेट उसमे गया ही नहीं।

उसी समय जिमी को अपनी गलती का अहसास हुआ। वह चिल्लाने लगा, “हे भगवान मैं इस टोकरी से अब कैसे निकलू मेरी मदद करो भगवान।” जिमी बहुत डर गया अगर किसी ने उसे देख लिया तो उसकी जान ही चली जाएगी। वह चिल्लाता रहा मदद के लिए। उसी समय एक बिल्ली उसकी चिंक को सुनकर वहाँ आई। बिल्ली ने पूछा कि क्या हुआ? जिमी ने बिल्ली को सारी घटनाएं सुनाई और बिल्ली को मदद के लिए कहा।

बिल्ली बोली, “तुम्हे पतला होने तक का इंतज़ार करना पड़ेगा तभी टोकरी के बाहर निकल पाओगे। अब जिमी टोकरी के अंदर ही बेहाल बैठा रहा पतले होने के इंतज़ार में। अब वह अपने पहले परिस्तिथि में ही वापस पहुँच गया क्यूंकि अब उसे खुदको फिरसे भूखा रखना पड़ेगा फर्क इतना ही था कि इस बार वह टोकरी में फँसा पड़ा था। अब टोकरी में डर-डर के रहने के अलावा जिमी और कुछ नहीं कर सका।

शिक्षा –  इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि कुछ भी अधिक अच्छा नहीं हैं।

 

8. घमंडी बतख रानी की कहानी – Best Moral Stories Kids

घमंडी बतख रानी की कहानी - Best Moral Stories in Hindi

एक बार की बात है, एक झील में एक बतख रानी अपने दोस्तों के साथ रहा करती थी। बतख स्वभाव में बहुत ही ईर्षालु और घमंडी थी। वह हर वक्त कहती, “मैं इस झील की सबसे खूबसूरत बतख हूँ। मेरा रंग सबसे ज़्यादा सफ़ेद है।”

उसके दोस्त हमेशा उससे कहते कि अपने रूप पर घमंड न करो हम सबका रंग सफ़ेद ही तो है। लेकिन बतख रानी तो किसी की भी नहीं सुनती थी। वह अपने आपको बहुत ही खूबसूरत मानती थी।

उस झील के किनारे एक बहुत ही खूबसूरत मोर आकर रहने लगा था। मोर के पंख बहुत ही बड़े और खूबसूरत थे और बारिश आते ही वह नाचने लगता था। झील के सभी बतखें उसका नाच देखकर सम्मोहित हो जाती है।

जहाँ सभी बतखें मोर को पसंद करने लगी वहीं बतख रानी मन ही मन मोर से इर्षा करने लगी।  उसने सोचा की उसे कुछ करना चाहिए नहीं तो सारे बतख मोर को पसंद करने लगेंगे।

एक दिन बतख रानी अपने एक चित्रकार मित्रा चूहे के रंगो के दुकान में जाती है। जब चूहा बतख रानी के लिए चाय बनाने अंदर जाता है तो रानी फटाफट दो-तीन रंग उसके दुकान से चुरा लेती है और अपने बैग में रख लेती है।

थोड़ी देर चूहे से बातचीत करके वह घर लौट आती है। रानी रात होने की प्रतीक्षा करने लगती है। रात होते ही वह सब रंगो का घोल बनाने लगती है और अपने पंखो पर लगाने लगती है। अँधेरा होने की बजह से वह रंगो को पहचान नहीं पाती।

रंग लगाने के बाद उसने कहा, “अब मुझे सबसे सुंदर पक्षी बनने से कोई नहीं रोक सकता। मेरे पंख सबसे सुंदर होंगे। रानी सब रंगो को अपने पंखो पर लगाकर सो जाती है।

सुबह जब वह उठती है। सुबह जब वह उठती है तो सभी बतखें उस पर हँस रही होती है। झील की सारि बतखें उसका मजाक उड़ाने लगी। तभी मोर भी वहाँ आ जाती है और वह भी बतख रानी को देखकर हँसने लगता है।

रानी को कुछ समझ नहीं आता और वह अपनी परछाई पानी में देखती है। खुदको देखते ही उसने कहा, “अरे नहीं मैं काली कैसे हो गई? यह क्या हो गया मेरे पंखो को।” बतख रानी जोर-जोर से रोने लगी। इस तरह रानी को अपने कर्मो का फल भी भुकतना पड़ता है।

अपनी इर्षा और जलन की बजह से उसने अपने सुंदर सफ़ेद पंख भी खो दिए।

शिक्षा – हमें दुसरो से कभी भी इर्षा और जलन नहीं करनी चाहिए। भगवान ने सब को कुछ न कुछ गुण दिए हैं हमें उसकी प्रशंसा करनी चाहिए और दुसरो से कभी भी इर्षा और तुलना नहीं करना चाहिए।

 

9. कौआ बना कोयल की कहानी – Moral Stories in Hindi 

कौआ बना कोयल की कहानी - Best Moral Stories in Hindi

एक बार की बात है, अजीब किस्म के दो दोस्त एक साथ रहते थे जिसमे एक थी कोयल और दूसरा था कौआ। दोनों ही एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त थे और इन दोनों के खाना लाने का तरीका भी बहुत कमाल का था।

वह दोनों एक साथ उड़कर लोगों के घरो में जाते। दोनों रसोई के खिड़की में बैठते और फिर कोयल अपना गाना शुरू कर देती। लोगों का कोयल का गाना बहुत पसंद आता था। लोग कोयल का गाना सुनते और बदले में कोयल को कुछ खाने को देते। कौआ हमेशा उसके साथ रहता था इसलिए लोग कोयल के साथ-साथ उसे भी खाना देते। इस तरीके से दोनों को खाने को मिल जाता था।

ऐसा ही वह दूसरे घरो में भी जाकर करते थे। उन दोनों की ज़िंदगी बड़े मजे से चल रही थी और फिर एक दिन एक परेशानी सामने आ ही गई और वह परेशानी कौए के कारन आई।

कौए को कोयल से इर्षा होने लगी। उसने मन ही मन खुद से कहा, “यह तो ठीक नहीं है, सारी तारीफ तो कोयल बटोर लेती है मेरी भी तो तारीफ हो सकती है मैं भी तो एक अच्छा गायक हूँ। सिर्फ कोयल ही हर रोज क्यों गाए? कल में कोयल को गाने ही नहीं दूंगा। इससे पहले की वह अपना मुँह खोले मैं खुद ही अपना गाना शुरू कर दूंगा।”

अगले दिन सुबह, कौए ने कोयल से कहा, ‘चलो भी कोयल आज तुम्हे खाना लाने नहीं जाना है क्या?” कोयल ने मुस्कुराकर कहा, “हाँ हाँ आ रही हूँ। आज तो तुम बहुत खुश लग रहे हो कौए।”

कौए ने कहा, “हाँ बिलकुल। आज का दिन बहुत सुहाना है इसलिए मैं बहुत खुश हूँ।” इसके बाद कौआ और कोयल खाना लाने चले गए।

वह दोनों पहुँचे एक औरत के घर। वहाँ पहुँचकर जैसे ही कोयल ने गाना गाना शुरू किया उसी वक्त कौए ने अपना गाना शुरू कर दिया। वह का-का करके गाने लगा। उस औरत को कौए का गाना अच्छा नहीं लगा। कौआ को लगा सायद उस औरत को ठीक से सुनाई नहीं दिया इसलिए वह और जोर-जोर से का-का करने लगा। अब उस औरत को बहुत गुस्सा आया और उसने दोनों को वहाँ से भगा दिया।

उस दिन वह जिस भी खिड़की पर गए कौए ने सबसे पहले गाना शुरू कर दिया यह सोचकर कि कोई एक औरत तो उसके गाने को पसंद करेगी। लेकिन एक भी औरत को उस कौए का गाना पसंद नहीं आया और उस दिन उन्हें भूखे ही घर वापस जाना पड़ा।

घर वापस आकर कोयल ने कौए से कहा, “आज तुम्हे हुआ क्या है? आज  तुमने मेरे साथ बहुत बुरा व्यबहार किया है। मुझे माफ़ करना लेकिन अब से हमारे बीच की दोस्ती ख़त्म।” यह कहकर कोयल वहाँ से चली गई और तब से कौआ बचे-कूचे खाने पर ही ज़िंदा रहने लगा।

शिक्षा- हमें किसी की भी नक़ल नहीं करनी चाहिए। 

 

10. मोर और कौवा – Valuable Moral Stories in Hindi

मोर और कौवा - Best Moral Stories in Hindi

एक बार की बात है, एक जंगल में एक कौवा रहता था। उसे अपने रूप से बहुत शर्मिंदिगी महसूस होता था। वह हमेशा सोचता रहता था, “भगवान ने मुझे ही इतना क्यों काला बनाया है? मुझे बिलकुल पसंद नहीं हैं यह काला रंग। कितना अच्छा होता अगर मेरे पंख भी रंगविरंग होते।”

ऐसे एक दिन वह अपने दोस्तों के साथ बातें कर रहा था। उसने अपने दोस्तों से कहा, “भाई लोग कभी सोचा है हम लोग कितने बदसूरत दीखते हैं और दूसरे पंछियो को देखो कितने सुंदर हैं।”

कौए के दोस्त ने कहा, “तुम ऐसा क्यों सोचते हो? भगवान ने जिसे जैसा रंग-रूप दिया है उसी में उसे संतुष्ट रहना चाहिए। तुम्हे भी अपने काला होने पर शर्म नहीं गर्भ होना चाहिए।”

कौवा बोला, “छी, काला होने पर कैसा गर्भ कभी मौर को देखा है। भगवान ने दुनिया भर का रंग उसके पंख पर डाल दिया है। कितना सुंदर है वह! काश मेरे भी मोर जैसे पंख होते।”

उसके दोस्त ने कहा, ‘दुसरो को देखकर इर्षा मत करो यह बुरी बात है। मोर तो मोर है और तुम कभी भी मोर जैसा नहीं बन सकते।”

यह सुनकर कौवा वहाँ से चला गया। जमीन पर उसे कुछ मोर के पंख दिखाई दिया। वह बहुत खुश हो गया। कौवा ने जल्दी से मोर के सारे पंखो को अपने पंखो के ऊपर लगा लिया और खुदको मोर समझकर मोर के झुंड में शामिल होने के लिए चला गया।

कौवा मोर के पास जाकर बोला, “हेलो दोस्तों, मैं तुम सबसे दोस्ती करना चाहता हूँ। क्या तुम लोग मेरे दोस्त बनोगे?” मोर ने कहा ,’तुम कौन हो? तुमको तो यहाँ पहले कभी नहीं देखा।”

कौवा बोला, “मैं इस जंगल में नया हूँ।” मोर ने कहा, “ठीक है, आज से तुम भी हमारे दोस्त हो।”

मोर के झुंड में शामिल होकर कौवा मन ही मन बहुत खुश हुआ। ऐसे में हल्का बारिश शुरू हुआ। सारे मोर ख़ुशी से गाने लगे। कौवा भी अपने सुर में गाने लगा। पर कौए का सुर तो कौए की ही तरह होगा न। कौवा जोर-जोर से का-का करने लगा।

कौए के आवाज से सारे मोर को पता चल गया कि वह मोर के पंख पहना हुआ एक कौवा है। सारे मोर गुस्सा होकर कौए के शरीर से सारे पंख निकाल लिए और उसे वहाँ से भगा दिया।

कौवा फिर दुखी होकर अपने दोस्तों के पास रहने के लिए आ गया। उसके दोस्तों ने भी उसका बहुत मजाक उड़ाया। कौवा दुखी होकर वहाँ से चला गया। सुंदर और मोर बनने की चाहत में कौए को बिलकुल अकेला कर दिया।

शिक्षा – हम जैसे भी हैं उसी में हमें खुश रहने चाहिए। 

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