यह कहानी सुन आपको भी रोना आ जाएगा | Heart Touching Hindi Story With Moral

यह कहानी सुन आपको भी रोना आ जाएगा | Heart Touching Hindi Story With Moral

फ्रेंड्स, आज मैं आप सबके लिए एक ऐसी Heart Touching Hindi Story लेकर आई हूँ जिसे सुनकर आपके आंख आंसू से भर आएंगे तो दोस्तों उम्मीद करते हैं आपको यह कहानी जरूर पसंद आएगी।

 

यह कहानी सुन आपको भी रोना आ जाएगा  Heart Touching Hindi Story With Moral

जीवन के बिश साल हवा की तरह उड़ गए। फिर शुरू हुई नौकरी की खोज। नौकरी की तलाश करते-करते एक नौकरी हाथ लगी। थोड़ी चिंता की शुरुवात हुई। फिर हाथ आई पहली तनखाह का चेक। वह बैंक में जमा हुआ और शुरू हुआ अकाउंट में जमा हुआ शून्यों का अंतहीन खेल।

दो-तीन वर्ष और निकल गये। बैंक में थोड़े और शून्य बढ़ गए। उम्र 25 हो गई और फिर विवाह हो गया। जीवन की रामकानी शुरू हो गई। शुरू के एक-दो साल नरम गुलाबी रसीले सपनीले गुजरे। हाथों में हाथ डालकर घूमना-फिरना, रंगबिरंगे सपने, पर यह दिन जल्दी ही उड़ गए। फिर बच्चों की आने की आहट हुई।

अब सारा ध्यान बच्चों पर केंद्रित हो गया। उठना-बैठना, खाना-पीना, लाड-दुलार पल भर में कैसे फटाफट निकल गया पता ही नहीं चला। इस बीच कब मेरा हाथ उसके हाथ से निकल गया, बातें करना, घूमना-फिरना कब बंद कब बंद हो गया दोनों को पता ही नहीं चला। बच्चा बढ़ा होता गया। वह बच्चे में व्यस्त हो गयी और मैं अपने काम में। घर और गाड़ी की क़िस्त, बच्चे की जिम्मेदारी, शिक्षा और भविष्य की सुविधा और साथ में बैंक में शून्य बढ़ाने की चिंता। उसने भी अपने आपको काम में पूरी तरह झोक लिया।

इतने में मैं 35 का हो गया। घर, गाड़ी, बैंक में शून्य, परिवार सब है फिर भी कुछ कमी है, पर वह है क्या समझ नहीं आया। उसकी चिढ़चिढ़ बढ़ती गयी, उदासीन होने लगा।  बीच दिन बीतते गए और समय गुजरता गया। बच्चा बढ़ा होता गया। उसका खुद का संसार तैयार होता गया। कब 10 वी आई और चली गयी पता ही नहीं चला। तब तक दोनों ही 40, 42 के।  बैंक में शून्य बढ़ता ही गया।

एक नितांत एकांत क्षण में मुझे वह गुजरे दिन याद आए और मौका देखकर उससे कहा, “अरे जरा तहँ आओ, पास बैठो। चलो हाथ में हाथ डालकर कहीं घूमकर आते हैं।” उसने अजीब नजरों से मुझे देखा और कहा, “कि तुम्हें कुछ भी सूझता है, यहाँ ढेर सारा काम पड़ा है और तुम्हें बातों की सूझ रही है।” कमर में पल्लू खोस वह निकल गयी।

फिर आया 45 वा साल, आँखों पर चश्मा लग गया, बाल काला रंग छोड़ने लगे, दिमाग में कुछ उलझने शुरू हो गयी। बेटा उधर कॉलेज में था, उधर बैंक में शून्य बढ़ रहे थे। देखते ही देखते उसका कॉलेज ख़त्म। वह अपने पैरों पर खड़ा हो गया। उसके पंख फूटे और उड़ गया परदेश। उसके बालों का काला रंग भी उड़ने लगा, कभी -कभी दिमाग साथ छोड़ने लगा, उसे चश्मा भी लग गया, मैं खुद बूढ़ा हो गया, वह भी उमरगराज लगने लगी।

दोनों 55 से 60 की ओर बढ़ने लगे। बैंक की शून्यों की कोई खबर नहीं। बाहर आने-जाने की कार्यकर्म बंद होने लगे। अब तो गोली-दवाइयों के दिन समय निश्चिंत होने लगे। बच्चे बढ़े होंगे तब हम साथ रहेंगे, ऐसा सोचकर लिया गया घर अब बोझ लगने लगा। बच्चे कब वापस आएंगे यही सोचते-सोचते बाकि के दिन गुजरने लगे।

एक दिन यु ही सोफे पर बैठे ठंडी हवा का आनंद ले रहा था। तभी फ़ोन की घंटी बजी। लपक्के फ़ोन उठाया। दूसरी तरफ बेटा था जिसने कहा कि उसने शादी कर ली है और अब पपरदेश में ही रहेगा। उसने यह भी कहा कि पिताजी आपके बैंक के शून्यों को किसी वृद्धाश्रम में दे दीजिए और आप भी वहीं रह लेना। कुछ और औपचारिक बातें कहकर बेटे ने फ़ोन काट दिया।

मैं फिरसे सोफे पर आकर बैठ गया। मैंने उसे आवाज दी,  “कि चलो आज फिर हाथों में हाथ लेकर बात करते हैं। वह तुरंत बोली, “अभी आई।” मुझे विश्वास नहीं हुआ। चेहरा ख़ुशी से चमक उठा, आँखें भर आई, आँखों से आंसू गिरने लगे और गाल भीग गए। अचानक आँखों की चमक फींकी पड़ गयी और मैं निस्तेज हो गया।

उसने शेष पूजा की और मेरे पास आकर।  बोली, “बोलो क्या बोल रहे थे।” लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा। उसने मेरे शरीर को छू कर देखा। शरीर बिलकुल ठंडा पड़ गया था। मैं उसकी ओर एक तक देख रहा था। पल भर वह शून्य हो गयी। क्या करूँ उसे कुछ समझमें नहीं आया। लेकिन एक-दो मिनट में वह चितंन हो गयी। धीरे से उठी, पूजा घर में गयी, दिया जलाया, ईश्वर को प्रणाम किया और फिर से आकर सोफे पर बैठ गयी।

मेरा ठंडा हाथ हाथों में लिया और बोली, “चलो कहाँ घूमने चलना है तुम्हें, क्या बातें करनी है तुम्हें बोलो।” ऐसा कहते हुए उसकी भी आँखें भर आई। वह एक  देखती रही। आँखों से अशुभ धरा बहती रही। मेरा सर उसके कंधों पर गिर गया। ठंडी हवा का झोंका अब भी चल रहा था।

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