छठ में किसकी पूजा होती है? | Chhath Puja in Hindi

छठ में किसकी पूजा होती है? | Chhath Puja in Hindi

छठ में किसकी पूजा होती है? Chhath Puja in Hindi

छठ में किसकी पूजा होती है और क्या है इसकी कहानी जानिए 

महापर्व छठ कब और कैसे  शुरू हुई इस बात की कोई भी ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है। कई कहानियां प्रचलित है। एक मान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरुवात महाभारत काल में हुई थी। सबसे पहले  सूर्यपुत्र कर्ण ने सूर्यदेव की पूजा की। दरहसल कर्ण सूर्य की आराधना करते थे ना की छठ। एक कहानी पुराण से ली जाती है, राजा प्रियंवद की कहानी। आप किसी भी कहानी को सुनेंगे तो मन में कई प्रश्न खड़े होंगे कि छठी मैया क्यों कहते हैं? क्या यह सूर्यदेव की पूजा है? यदि है तो छठ में माँ का बोध क्यों होता है, छठी मइया क्यों कहते हैं।

दरहसल छठ में देवों के देव महदेव के बड़े बेटे कार्तिक की पूजा की जाती है। कहते हैं कि भगवन कार्तिक को पालने वाली छह माँ थी जो कि उनका देख रेख करती थी। छठ में पूजा भगवान कार्तिक को पालने वाली उन्हीं छह माँ ओ का होता है। छठी मैया का पूजा करने का मतलब है भगवान कार्तिक की पूजा करना।

जहाँ तक सूर्य की बात है तो असलमे सूर्य की पूजा नहीं होती। दरहसल सूर्य को साक्षी मानकर छठी मैया की पूजा  होती है वैसे ही जैसे हवनकुंड  का प्रयोग अग्नि को साक्षी मानकर पूजा करने के लिए होती है। अग्नि को साक्षी मानकर हम पूजा आरम्भ करते हैं। वैसे ही छठ में उगते सूर्य और डूबता सूर्य को साक्षी मानकर पूजा की जाती है।

सूर्य का महत्व हिन्दू धर्म के हर पूजा में है। पूजा सूर्यदय पर शुरू करते हैं और शाम की पूजा सूर्यास्त यानि सूर्य डूबने से पहले अंत कर लेते हैं। भगवान कार्तिक को भगवान मुरगन भी कहते हैं। अगर छठ की बात करे तो यह दुनिया का सबसे कठिन पूजा है।

छठ पूजा चार दिवसीय व्रत है। इस दौरान व्रत करने वाले को लगातार 36 घंटे तक व्रत रखना पड़ता है। इस दौरान वे अन्य तो क्या पानी भी  नहीं पी सकते। भोजन के साथ साथ बिस्तर का भी त्याग करना होता है। एक अलग कमरे पर फर्स पर कंबल या चादर बिछाकर सोना पड़ता है। सिले हुए कपड़े नहीं पहन सकते। इसलिए व्रती बिना सिलाई किए हुए कपड़े पहनती है। यहाँ तक की चप्पल भी नहीं पहन सकते। किसी भी प्रकार का सुख सुविधा नहीं ले सकते।

छठ पूजा के दौरान महिलाएं साड़ी और पुरुष धोती पहनकर पूजा करते हैं। इसमें शुद्धता का बहुत ज्यादा ख्याल रखना पड़ता है जरा सा  भी अशुद्ध हुए तो नहाना पड़ता है। इस प्रव में पूजा करने वाली व्रती खाली नहीं बैठती उपवास के साथ साथ पूजा से सम्बंधित अन्य कामों को भी करना होता है। जैसे प्रसाद व्रती खुद ही बनाती है जिसमें गेहूं धोने से लेकर गेहूं सुखाने तक शामिल है। और गेहूं सुखाते टाइम वहीं  बैठना पड़ता है क्यों कि यदि किसी चीड़िया ने गेहूं चुग लिया या बैठ भी गई तो  वह अशुद्ध हो जाएगा और फिर से धो कर सुखाना पड़ेगा जो इस पूजा को और कठिन बना देता है।

इस समय श्रद्धा और आस्था का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई लोग घर से लेकर घाट तक दंडवत नमस्कार करते हुए जाते हैं। यह बहुत ही ज्यादा अनुशासन वाला व्रत है। छठ सिर्फ हिन्दू ही नहीं कई मुसलिम भी करते हैं।

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