अकबर बीरबल की कहानी: बेगम और बीरबल | Akbar Birbal Stories in Hindi

अकबर बीरबल की कहानी: बेगम और बीरबल | Akbar Birbal Stories in Hindi

अकबर बीरबल की कहानी: बेगम और बीरबल  Akbar Birbal Stories in Hindi

 

बेगम और बीरबल (अकबर बीरबल की कहानी)

सभी को ज्ञात है कि बीरबल अकबर के प्रिय थे। इसी कारण कई दरबारी उनसे इर्षा करते थे। वे हमेशा बीरबल की खिलाफ अकबर का दिमाग भरते रहते। एक बार दरबारियों ने सोचा वे बीरबल को मंत्री पद से हटाकर बादशाह के शाले हुसैन खान को मंत्री बना देंगे। वे हुसैन खान के घर गए और उससे पूछने लगे, “क्या तुम मंत्री बनोगे।” हुसैन खान बोला, “किन्तु जब तक बीरबल है बादशाह कभी भी मुझे मंत्री नहीं बनाएंगे।”

एक दरबारी बोला, “तुम अपनी बहन से सिफारिस क्यों नहीं कराते।” हुसैन खान बोला ,”हाँ यह अच्छा उपाय है, कल मैं अपनी बहन के पास जाऊँगा।”

अगले दिन वह अपनी बहन जो बादशाह की बेगम थी, उससे मिला और उसे बादशाह अकबर से अपने मंत्री बनाने वाली बात मनवाने को कहा। जब महाराज आए तो बेगम ने कहा, “मैं अपने भाई हुसैन खान को बीरबल की जगह मंत्री मनवाना चाहती हूँ।”

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महाराज को बेगम की इस अजीब मांग पर बड़ा आश्चर्य हुआ। उन्होंने कहा, “मैं ऐसा कैसे कर सकता हूँ? इतना बड़ा राज्य चलाने के लिए मुझे किसी चतुर और कुशल व्यक्ति की आवश्यकता होती है और बीरबल से अधिक होनहार कोई नहीं। और फिर बिना किसी ठोस कारण के मैं बीरबल को कैसे हटा सकता हूँ।”

बेगम ने सुझाया, “आप उसे कुछ ऐसा कठिन काम करने को दीजिए जो वह नहीं कर सके और इस बहाने आप उसे हटा दीजिए।” अकबर बोले, “ठीक है, तब तुम ही ऐसा कोई काम बताओ।” बेगम बोली, “जब आप साही बगीचे में शैर कर रहें हो तब आप बीरबल को मुझे बगीचे लाने का आदेश दीजिये। मुझे विश्वास  इसमें सफल नहीं होगा।”

बादशाह राजी हो गए और अगले दिन बगीचे में घूमते वक्त उन्होंने बीरबल को महारानी को बगीचे में लाने का आदेश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि वह बेगम को नहीं ला पाए तो उन्हें मंत्री पद से हटाकर हुसैन खान को मंत्री बना दिया जाएगा।

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बीरबल समझ गए कि उनके दुश्मनों ने उनसे छुटकारा पाने की कोई चाल चली है। उन्होंने एक तरकीब सोची। उन्होंने अपने दूत को बुलाया व पूरी योजना समझाई। फिर वह बेगम की महल में गए और बादशाह का सन्देश दिया। उन्होंने कहा, “जहाँपना बगीचे में टहल रहें हैं। वह आपसे वहां मिलने चाहते हैं। ”

उसी समय वह दूत वहां आया और बीरबल से बोला, “हुजूर मुझे आपसे अकेले में कुछ कहना है।” बीरबल बेगम से माफ़ी मांगते हुए एक और जाकर दूत की बात सुनने लगे।

बेगम को भी बड़ी उत्सुकता हुई। वह उनकी बात सुनने की कोशिश करने लगी पर उनके कान में जो वाक्य पड़ा वह था “वह बहुत खूबसूरत है।” बीरबल तुरंत बेगम के पास पहुंचकर बोले, “सारी परिस्तिथि बदल गई है व अब आपको आने की कोई आवश्यकता नहीं बेगम साहेबा।” यह कहकर बीरबल चले गए।

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किन्तु बेगम को शक हो गया। उन्होंने सोचा निश्चय ही कोई सुंदर स्त्री बादशाह से मिलने आई है और बीरबल नहीं चाहते कि मैं बादशाह और उस स्त्री को अकेले में देख लूँ।

बेगम दौड़ती हुई बगीचे में पहुंची पर आश्चर्य, वहां तो अकेले थे। अकबर बोले ,”तो बेगम आप आ ही गई। आपने तो वादा किया था कि नहीं आएंगी।”

बेगम ने वे सब बताया जो बीरबल ने बताया था। अकबर बोले, “बीरबल के इतना  सा कहने से कि परिस्तिथि बदल गई है तुम यहाँ दौड़ी चली आई।”

बेगम ने मन में सोचा, “मैं आपको कैसे बताऊँ मुझे दूसरी सुंदर स्त्री का भय यहाँ खिंच लाया।”

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