गरीब का दिल | Gareeb Ka Dil Hindi Kahani

गरीब का दिल | Gareeb Ka Dil Hindi Kahani

गरीब का दिल  Gareeb Ka Dil Hindi Kahani

गरीब का दिल – Gareeb Ka Dil Hindi Kahani

एक शहर का रास्ता था। रास्ते में एक भिखारी बैठा था। उसका कहना था कि वह काफी दिन से भूखा है। उसने रास्ते पर चलने वाली हर इंसान से मदद मांगी कि मैं काफी दिनों से भूखा हूँ मुझे कुछ खाने को दे दो, मेरी कुछ मदद कर दो। उस रास्ते से अमीर से अमीर आदमी गुजरा लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की। वह बेचारा भूख से रोने लगा।

उसी रास्ते पर एक गरीब मजदुर जा रहा था। वह मजदुर सुबह से मेहनत करके रात को अपने घर कुछ पैसे लेकर आता था। वह इस्ते पैसे नहीं कमा पाता था जिससे उसके सारे खर्चे पुरे हो सके। लेकिन उसका दिल बहुत बड़ा था। उसने भूखे भिखारी को रोते हुए देखा तो उससे पूछने लगा, “क्या हुआ क्यों रो रहे हो?”

उसके इतना कहने पर वह भिखारी और रोने लगा और कहने लगा मैं काफी दिनों से भूखा हूँ। मैंने इस रास्ते पर जाने वाले हर इंसान से मदद मांगी किसी ने मेरी कोई बात नहीं सुनी और किसी ने मेरी तरफ देखा भी नहीं, सिर्फ तुम ही पहले ऐसे इंसान हो जो मेरे पास आया और मुझसे मेरा हाल पूछने लगा। तुम्हारा बहुत बहुत शुक्रिया।

मजदुर ने भिखारी को चुप कराया और फिर अपने थैले में से अपना खाना निकाला। उसके पास सिर्फ दो रोटी और चार हरी मिर्च थी जिसमे से उसने एक रोटी और दो हरी मिर्च भिखारी को दे दी और एक रोटी और दो हरी मिर्च अपने पास रख लिए और अपने जेब से निकालकर उस भिखारी को कुछ पैसे दिए और वहां से चला गया।

जब वह मजदुर अपने घर पहुंचा तो उसके बीवी ने उससे कहा कि अपनी आज की सारी कमाई मुझे दे दो। उस मजदुर ने अपनी बीवी को पैसे दे दिए। उसकी बीवी ने पैसे गिने और कहा, “यह पैसे कम क्यों हैं? और पैसे कहाँ है?” मजदुर खामोश हो गया और अपने नजरे निचे करते हुए बोला, “कि मुझे रास्ते में एक भिखारी मिला जो काफी दिनों से भूखा था। मैंने कुछ पैसे उसे दे दिए।”

उसकी बीवी यह सुनकर गुस्से में बोली, “हमारी खुस की जरूरते पुरे नहीं हो रहे और तुमने की और को पैसे दे दिए जाओ आज तुम्हें रात  का खाना नहीं मिलेगा।” वह मजदुर चुपचाप जकर सो गया।

लगभग 5 साल बाद एक बड़ा आदमी उसके घर का पता पूछते-पूछते उसके घर तक पहुंच गया। उस आदमी ने दरबाजा खटखटाया तो मजदुर ने घर का दरवाजा खोला और सामने खड़ा आदमी उसको देखकर मुस्कुराने लगा। मजदुर ने उससे पूछा, “आपको किससे मिलना है?” सामने खड़े आदमी ने कहा, “मुझे आप से ही मिलना है।’ मजदुर ने हैरान होते हुए कहा, “शायद आपको कोई गलतफैमी हुई है।” उस आदमी ने कहा, “नहीं नहीं मुझे आप से ही मिलना है आपका एहसान चुकाना है।” मजदुर ने कहा, ‘कौन सा एहसान?” उस आदमी ने कहा, “करीब 5 साल पहले मैं इस रास्ते पर भूखा बैठा था और तुमने मेरी मदद की थी।”

मजदुर हैरान हो गया और बोला, “तो तुम इतने बड़े आदमी कैसे बन गए।” उस आदमी ने कहा, “आपने मुझे जो पैसे दिए उन पैसों से मैंने एक छोटी सी किराए की दुकान खोली जिस पर मैं खाना बेचा करता था मुझे उससे हलके-हलके थोड़ा मुनाफा होने लगा और आज मेरी वह किराए की दुकान एक बहुत बड़े रेस्टोरेंट में बदल गई है।”

उस आदमी ने मजदुर को चेक देते हुए कहा, “आपका बहुत बहुत शुक्रिया और आपको कभी मदद चाहिए हो तो आप मुझे याद कीजिएगा और मेरे घर के पते पर आ जाइएगा।”

 

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