कहानी एक फकीर की | Story of a Fakir in Hindi

कहानी एक फकीर की | Story of a Fakir in Hindi

कहानी एक फकीर की – Story of a Fakir in Hindi

एक फकीर की कहानी 

एक फकीर था, हसन। उसका एक बहुत ही सुंदर पुत्र था। एक बहुत ही बुद्धिमान और प्रतिभाशाली लड़का। उसकी हंसी, प्यारी प्यारी बातों, नटखट हरकतों और बुद्धिमानी भरे कामो से पूरा गाँव प्रभावित था।

पूरा गाँव उस लड़के से बहुत प्यार करता था। हसन भी अपने बच्चे को बहुत चाहता था। लेकिन एक दिन अकस्मात् किसी बीमारी के कारण उसकी मौत हो गई।

बहुत छोटी उम्र थी उस बालक की यही कोई 8-10 साल का रहा होगा। उस बालक की अकाल मौत की खबर से पूरा गाँव भौंचक्का रहा गया। पुरे गाँव में सन्नाटा छा गया मानो पुरे गाँव ने काम करना ही बंद कर दिया हो।

पूरा गाँव उस बालक को अंतिम विदा देने इकट्ठा हुआ। सारा गाँव बहुत उदास था। हसन ने अपने पुत्र के शव को देखा। वे बहुत देर तक देखता रहा। लेकिन उसके आँखों में एक आंसू भी नहीं आए। बल्कि वह हंसने लगा।

लोगों को विश्वास नहीं हो रहा था। उन्होंने पूछा, “क्या तुम पागल हो गए हो? लगता है तुम्हे बहुत गहरा सदमा लगा है।”

इस माँ और बेटे की कहानी सुनकर आप रो पड़ोगे

उसने कहा, “यह कोई सदमा नहीं है, मैं बहुत दुखी हूँ मेरी पीड़ा की कोई सीमा नहीं है। यह मेरा एक लौता बेटा था मैं इससे बहुत प्यार करता था। मैं बहुत दुखी हूँ अब। लेकिन फिर मुझे याद आया जब यह बच्चा नहीं था तब मैं पूरी तरह से खुश था, मैं एकेला था, यह बालक मेरे साथ नहीं था और इसका कोई मोह भी नहीं था। जब यह सालो पहले मेरे पास नहीं था तब मैंने इसे कभी याद भी नहीं किया। अब वह फिर से चला गया वह फिर से मेरे पास नहीं है। मैं फिर से पहले वाले स्तिथि में आ चूका हूँ मानो जैसे किसी ने मेरा एक सपना पूरा कर दिया हो पिता बनने का जिससे मुझे दिया उसने वापस ले लिया। मैं कौन होता हूँ कहने वाला कि उसने अच्छा नहीं किया।”

लोगों ने पूछा, “लेकिन तुम हंस क्यों रहे ही?”

फकीर ने कहा, “मैं आभार प्रकट कर रहा हूँ, मैं आभार प्रकट कर रहा हूँ उसका जिसने मुझे वह दिया, मैं आभार प्रकट कर रहा हूँ उस बालक का  जो मेरे साथ इतने वर्षो तक रहा मुझे इतना हसाया मुझे इतनी ख़ुशी दी। हम दोनों ने वर्षो तक एक दूसरे की उपस्तिथि का आनंद लिया। उसने जितने भी वर्षो का समय मेरे साथ बिताया, जितने भी मुझे ख़ुशी दी, मुझे पिता बनने का सौभाग्य दिया इन सब चीजों के लिए मैं उसका आभारी हूँ और इसके लिए मैं उसका आभार व्यक्त कर रहा हूँ। जब हम दोनों साथ थे तब हम बहुत खुश थे अब जब वह जा रहा है तो मैं उसे दुखी मन से विदाय क्यों दूँ बस इसलिए मैं हंस रहा हूँ।”

जहाँ से भी आपको ख़ुशी का कोई स्रोत मिले, ख़ुशी के कुछ पल मिले उसके लिए आभार महसूस करे। लेकिन यह उम्मीद न करे कि कल वह ख़ुशी का पल उपलब्ध होगा या उपलब्ध होना चाहिए अन्यथा आप संघर्ष में पड़ जायेंगे। बस बर्तमान में जो भी ख़ुशी का पल है उन्हें पूर्णता के साथ जिए क्या पता कल वह रहे न रहे।

सद्गुरु ओशो भी कहते हैं सबके प्रति कृतज्ञ रहिए। अपने मन में सबका आभार प्रकट करे फिर चाहे वह आपका मित्र हो, आपके दुश्मन, अच्छे दिन या बुरे दिन क्यों कि यदि आपके दोस्तों और आपके अच्छे दिनों ने आपको सहायता और ख़ुशी दी है तो आपके दुश्मनो और बुरे दिनों ने आपको मजबूत बनाया है। इस दुनिया में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसका हम आभार प्रकट न कर सके क्यों कि हर एक घटना जो कि हमारे आसपास हो रही है उसने हमें और हमारे व्यक्तित्व को बनाने में एक महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

चालाक दर्जी और राजा की मजेदार कहानी

आज कल हम देख रहें हैं कि लोगों के पास जो है वह उसके लिए शुक्रगुजार नहीं है बल्कि वह उसके पीछे अंधे होकर भाग रहे हैं जो उनके पास नहीं है जब की लोगों को चाहिए कि जो उनके पास है पहले उसके लिए भगवान का धधन्यवाद करे फिर जो नहीं है उसके लिए शांत चित्त और सकारात्मक सोच के साथ प्रयास करे। आप एक बार जो भी आपके पास है रोज उसके लिए भगवान का आभार प्रकट करना शुरू कर दीजिये आप देखेंगे कि आपके जीवन में चमत्कार होने शुरु हो चुके हैं और यह एकदम सत्य है।

 

उम्मीद है दोस्तों कि आपको यह कहानी “कहानी एक फकीर की  Story of a Fakir in Hindi” जरूर पसंद आई होगी और अगर पसंद आए तो इसे अपने दोस्तों और परिवारजनों के साथ भी शेयर जरूर कीजिए।

 

यह भी पढ़े –

 

Follow Me on Social Media

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *