क्यों मिडिल क्लास लोग अमीर नहीं बन पाते

क्यों मिडिल क्लास लोग अमीर नहीं बन पाते

क्यों मिडिल क्लास लोग अमीर नहीं बन पाते Kyu Middle Class Log Amir Nahi Ban Pate

दोस्तों मिडिल क्लास हमारी सोसाइटी का वह सेक्शन है जो अप्पर क्लास और लोअर क्लास के बीच में आता है। मिडिल क्लास सुनते ही हमारे दिमाग में कुछ कीवर्ड्स घूमने लग जाते हैं जैसे कि स्ट्रगल करने वाला, कोम्प्रोमाईज़ करने वाला, हार्ड वर्क करने वाला और प्रोब्लेम्स को झेल जाने वाला इंसान क्यों कि यह सभी चीजें एक मिडिल क्लास इंसान के लिए बिलकुल आम बात है।

अगर आप पिछले 50 साल की जीडीपी नंबर्स उठाकर देखे तो आपको यह साफ़ क्लियर हो जाएगा 65% से 72% कंट्रीब्यूशन सिर्फ मिडिल क्लास का ही होता है। क्यों? क्यों कि टोटल टैक्स कलेक्शन का 79% मिडिल क्लास के  लोग ही पे करते हैं फिर चाहे वह वेस्टर्न कन्ट्रीज में हो या फिर अपने एशिया में ही। हाँ यह बात तो माननी वाली है कि हर 3 से 5 साल के अंदर दुनिया की चाहे कोई भी कंट्री हो किसी न न किसी प्रॉब्लम से होकर गुजरती ही है। भले ही वह एनवायरनमेंट का मुद्दा हो, इकॉनमी का मुद्दा हो या फिर कोई सोशल मुद्दा हो लेकिन इन प्रोब्लेम्स में सबसे ज्यादा और सबसे जल्दी कौन पिशते हैं मिडिल क्लास और लोअर क्लास के लोग। पर हमेशा ही ऐसा नहीं था।

90 दशक में जब इंडिया के अंदर मल्टी नेशनल कंपनीज आई तो उनका बेसिक सेल्लिंग मोटिव मिडिल क्लास के लोगों का फ्यूचर ब्राइट करने के था और वह कुछ सालों तक मिडिल क्लास के लोगों के लिए चला भी। उस टाइम मिडिल क्लास के लोग इसको हेल्थ, फाइनेंस और फ्यूचर  सिक्योरिटीज दी गई जिससे उनकी लाइफस्टाइल पहले की तरह और कई ज्यादा बेटर होती चली गई। लेकिन हर बड़े कॉर्पोरेट की तरह एक बार मार्किट कैप्चर कर लेने के बाद मल्टी नेशनल कंपनीज ने भी मोनोपोली का सहारा ले लिया और फिर से मिडिल क्लास लोगों के लिए नेगेटिव डायरेक्शन शुरू हो गई।

अब ऐसा नहीं है कि एक मिडिल क्लास फॅमिली की और आगे ना बढ़ने का ब्लेम हम सिर्फ कंपनीज और गवर्नमेंट की पॉलिसीस पर डाल दे। पिछले 20 सालों की रिसर्च को अगर डीपली समझा जाए तो 4 ऐसे इम्पोर्टेन्ट रीज़न निकलकर आते हैं जो यह प्रूफ करते हैं कि क्यों मिडिल क्लास के लोग चाहकर भी अपने लाइफ में आगे नहीं बढ़ पाते। तो अगर आप भी एक मिडिल क्लास फॅमिली से बिलोंग करते हैं तो यह लेख आपके लिए बहुत ही ज्यादा इम्पोर्टेन्ट होने वाली है इसलिए इस लेख को पढ़ते समय हर एक बातें ध्यान से समझिएगा क्यों कि यहाँ से आपको कुछ नया सिखने और जानने को मिलेगा।

क्यों मिडिल क्लास लोग अमीर नहीं बन पाते 4 बातें 

 

1 . मिडिल क्लास फॅमिली का एजुकेशन प्रोसेस 

हर मिडिल क्लास फॅमिली का यही सपना होता है कि उनके बच्चे अच्छे से अच्छे स्कूल में एजुकेशन ले जिससे उन्हें आगे चलकर हाई इनकम वाली जॉब मिल सके और वह अपनी लाइफ को ख़ुशी से गुजारे। बट ऑलमोस्ट 93% मिडिल क्लास के बच्चे मिडिल क्लास में पढ़ते हैं। इनमे से कुछ एक परसेंटेज थोड़े रिच फॅमिली से भी होते हैं। प्राइवेट स्कूल में वह इसलिए एडमिट नहीं हो पाते हैं क्यों कि प्राइवेट स्कूल की फीस अफोर्ट कर पाना उनको बहुत भारी पड़ जाता है। और अगर प्राइवेट स्कूल में ही पढ़ाना उनके लिए एक मज़बूरी बन जाती है तो फिर उनके पास सिर्फ एक ही ऑप्शन बचता है कि बैंक से एजुकेशन लोन लेकर फिक्स डिपाजिट करना। और इस रास्ते पर चलकर कुछ लोग लोन ले भी लेते हैं।

अब इंडिया में देखा जाए तो 4 लाख प्राइवेट स्कूल है जिनमें से लगभग 63% वह है जो हर साल अपनी फीस को इनक्रीस कर देते है डेवलपमेंट, इन्फ्लेशन महंगाई के नाम पर। और अगर इसमें सोसाइटी का प्रेसर भी एड कर दिया जाए तो एक मिडल क्लास की कंडीशन और भी बत से बत्तर हो जाती है। फिर जैसे तैसे स्कूल से पास आउट हो जाने के बाद एक दूसरा बड़ा खर्च आता है कॉलेज का जिसमें एक मिनिमम 3 साल के बैचलर डिग्री के लिए अच्छे प्राइवेट कॉलेज की अच्छे एनुअल फीस 80 हजार से 3 लाख तक होती है। और अगर मान लेते हैं कि वह बच्चा एक ब्राइट स्टूडेंट है और उसको बड़े गवर्नमेंट स्कूल में एडमिट होना है तो इसके लिए उसको एंट्रेंस एग्जाम क्रैक करना होता है जिसके लिए ओवियस्ली उसको तैयारी भी करनी पड़ती है। और इसी से कोचिंग इंस्टिट्यूट वाले उनसे हजारों से लाखों रूपए चार्ज कर लेते हैं।

2 . एक्सपेंसेस इन हेल्थ केयर 

कहते हैं कि हिस्ट्री ओफेन रिपीट्स इटसेल्फ। लेकिन हम ह्यूमन की एक साइकोलोजी रही है कि हम हिस्ट्री से ज्यादा कुछ सीखना पंसद ही नहीं करते। साल 2020 में Covid – 19 अपने साथ सिर्फ वायरस ही नहीं लाया बल्कि हमारे हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को भी पूरी तरह एक्सपोज़ करके गया है। अलग अलग रीसर्चेस ने यह पहले ही अंदाजा लगा लिया था कि इसमें सबसे ज्यादा सफर मिडिल क्लास के लोगों को ही करना होगा जो की आगे चलकर हुआ भी क्यों कि कंट्री की 71% पापुलेशन ग्रामीण एरियाज में रहते हैं और गाँव में इतने बड़े स्केल पर डॉक्टरी सुविधा कैसे मैनेज होती है यह आप अच्छी तरह से जानते हैं। पर गाँव में होने के बजाई भी टोटल पर्सेंटेज में सिर्फ 34% डॉक्टर और नर्सेज वहां पर अवेलेबल है।

अब हेल्थ केयर में इतने बड़े अनबैलेंस और जॉब खो देने की बजह से मिडिल क्लास फैमिलीज़ को अपनी सारी सेविंग्स अपनी फॅमिली की हेल्थ पर इन्वेस्ट करनी पड़ेगी और कुछ लोगों को तो अभी भी करनी पड़ रही है। आईसीएमआर (ICMR) ने साल 2018 के रीसर्च में यह बताया कि हर 5 में से 3 मिडिल क्लास फैमिलीज़ सेल्फ ट्रिटमेंट पर ही निर्भर रहती है क्यों कि उनको प्योर हेल्थ केयर सिस्टम पर ट्रस्ट ही नहीं होता कि यह हम लोगों से कब और कितना चार्ज ले लें। और सिर्फ इतना ही नहीं एनएसएसओ (NSSO) जो कि कुछ बड़ी रीसर्च आर्गेनाईजेशनस में से एक है, उनकी 9 साल चली एक रीसर्च  कंक्लूड करती है कि एक मिडिल क्लास फॅमिली हर साल एनुअल एवरेज अपनी इनकम का 35% सिर्फ और सिर्फ अपनी फॅमिली का हेल्थ केयर पर खर्च कर देते हैं।

3 . नॉट इंट्रेस्टेड इन इन्वेस्टमेंट 

आज के इस इनफार्मेशन ऐज में किसी भी चीज को सीख पाना बहुत आसान हो गया है। बशर्ते वह सोर्स जहाँ से हम वह चीज सीख  रहे हैं पूरा रिलाएबल हो मतलब उस पपर पूरा भरोसा किया जा सकता हो कि हाँ यहाँ से हमारे साथ कोई स्कैम नहीं होगा। ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ कि मानो या  ना मानो रिलाएबल सोर्स कम है और स्कैम करने वाले ज्यादा है। और इसी स्कैम में अपने पैसे खो देने की बजह से मिडिल क्लास के लोग इन्वेस्टमेंट से दूर रहना ही पसंद करते हैं और इसी चीज को वह अपना एक सिक्योर फ्यूचर समझ बैठते हैं। ऐसा क्यों? क्यों कि मिडिल क्लास फॅमिली में ज्यादातर लोगों की मंथली इनकम फिक्स होती है जिसको वह घर के खर्च चलाकर और बाकि पसंद की चीजें खरीदकर महीनेभर का गुजारा कर ही लेते हैं। और जब बात पैसे कहीं पर इन्वेस्टमेंट करने की आती है तो उनके पास इन्वेस्टिंग के लिए कुछ बचता ही नहीं।

अभी कुछ टाइम पहले हुए रिसर्च से पता चला कि ऑलमोस्ट 28% मिडिल क्लास लोग बिलकुल 0% इन्वेस्टमेंट करते हैं, 53% F.D में और बाकि पर्सेंटेज जो रिस्क लेने लायक पैसा अपने पास रखते हैं और शेयर मार्किट और म्यूच्यूअल फण्ड को अपनाते है। फाइनेंसियल एक्सपर्ट्स का यह मानना है कि एक मिडिल क्लास फॅमिली को अपनी प्रेजेंट कंडीशन को ध्यान में रखकर सेविंग्स का मिनिमम 10% से 20% कहीं पर इन्वेस्ट करना चाहिए। और इसके लिए उनका यह बहाना नहीं होना चाहिए कि वो सेविंग्स और इंवेस्टिंग्स अफोर्ट नहीं कर सकते। क्यों कि अगर आप गौर करे तो हर महीने में कोई न कोई ऐसी चीज हम जरूर खरीदते हैं जो कि हमारे लिए इतनी इम्पोर्टेन्ट नहीं होती और हम खरीदते हैं क्यों की उसे खरीदने का हमारे अंदर डिजायर पैदा होता है।

4 . इम्बैलेंस बिटवीन नीड एंड डिजायर 

यह बात हम अच्छी तरह से जानते हैं कि जितनी हमारी सैलरी होती है उसी हिसाब से हमारे खर्चे बंधे हुए होते हैं। पर जब हमारे जरूरतों से बड़ी हमारी डिजायर हो जाते हैं तो यहाँ पर प्रॉब्लम डेब्ट होने लगती है क्यों कि इस बजह से हम अपनी डेली लाइफ में जाने अनजाने में कुछ ऐसे छोटे-छोटे गलत डिसीजन ले लेते हैं जिसकी बजह से हमें यह पता भी नहीं चलता कि हमारी सैलरी का एक बड़ा हिस्सा किस डायरेक्शन में जा रहा है और यह वह चीजें होती है जिसको भले  ही हम अभी के टाइम पर अफोर्ट न कर सके पर बावजूद इसके हम शो ऑफ़ करने के लिए  क़िस्त या फिर इएमआइ का सहारा ले लेते हैं। खर्च के इस छिपे हुए हिस्से को फाइनेंसियल एक्सपर्ट्स मिसलेनियस एक्सपेंडिचर कहते हैं। और इसको लगभग 75% मिडिल क्लास के लोग अपने खर्च में इंक्लूड करते ही है फिर भले ही उनको क़िस्त या इएमआइ सालों तक क्यों न भरना पड़े।

तो यह थे वह 4 बातें जिनकी बजह से मिडिल क्लास लोग कभी भी अमीर नहीं बन पाते हैं और अपनी लाइफ में आगे नहीं बढ़ पाते हैं। उम्मीद करते हैं कि आपको यह लेख “क्यों मिडिल क्लास लोग अमीर नहीं बन पाते” जरूर पसंद आया होगा और अगर आपको यह लेख थोड़ा भी पंसद आता ही तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी जरूर शेयर कीजिए।

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