सरदार बल्लभ भाई पटेल को "लौह पुरुष" की उपाधि किसने दी

सरदार बल्लभ भाई पटेल को “लौह पुरुष” की उपाधि किसने दी

सरदार बल्लभ भाई पटेल को लौह पुरुष की उपाधि किसने दी, सरदार बल्लभ भाई पटेल की कहानी, Sardar Vallabhbhai Patel in Hindi:

सरदार बल्लभ भाई पटेल के “लौह पुरुष” बनने की कहानी 

भारत की इतिहास की जब जब चर्चा होगी तो उसमें पटेल का नाम बेहद आदर के साथ लिया जाएगा। देश की आजादी की संघर्ष में सरदार ने जितना योगदान दिया उससे ज्यादा योगदान उन्होंने स्वतंत्र भारत को एक करने में दिया। जो आज आप नक्शा भारत का देख रहें हैं वह नक्शा भारत के निर्माता और राष्ट्रीय एकता के बेजोड़ शिप्ली सरदार बल्लभ भाई पटेल की ही देन है।

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को वैचारिक रूप में एक नई दिशा देने वाले सरदार पटेल ने राजनैतिक इतिहास में एक गौरवपूर्ण स्थान प्राप्त किया। उनके कठोर व्यक्तित्व में संगठन कुशलता, राजनीती, सत्ता और  राष्ट्रीय एकता के प्रति अटूट निष्ठा थी।

जिस अदम में उत्साह असिन शक्ति से उन्होंने नवजात गणराज्यों की प्रारंभिक कठिनाइयों का समाधान किया उसके कारण विश्व के राजनैतिक मानचित्र में उन्होंने अमिट स्थान बना लिया।

सरदार पटेल को भारत का लौह पुरुष कहा जाता है। भारत का प्रथम गृह मंत्री बनने के बाद भारतीय रियासतों की विलय की जिम्मेदारी उनको ही सौंपी गई। पटेल अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए 600 छोटी बड़ी रियासतों का भारत में मिलाने में कामियाब रहे। देशी रियासतों का विलय स्वतंत्र भारत की पहली उपलब्धि थी और निर्विवाद रूप से पटेल का इसमें विशेष योगदान था।

नीतिगत दृढ़ता के साथ राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने उन्हें लौह पुरुष की उपाधि दी थी वल्लभभाई पटेल में आजाद भारत को एक विशाल राष्ट्र बनाने में उल्लेखनीय योगदान दिया। स्वतंत्र भारत के पहले 3 साल तक सरदार पटेल देश के प्रथम उपप्रधानमंत्री, गृह मंत्री, सुचना प्रसारण मंत्री भी रहे। इन सबसे भी बढ़कर उनकी ख्याति भारत के रजवाड़ों को शांतिपूर्ण तरीके से भारतीय संग में शामिल करने भारत के राजनैतिक एकीकरण के कारण है।

पटेल ने भारतीय संग में पूर्ण रियासतों का विलय किया संप्रभु थी। उनका अलग झंडा और अलग शासन था। सरदार पटेल ने आजादी के पूर्व ही बी.पी. मेनोन के साथ मिलकर कई देशी राज्यों को भारत में मिलाने का काम शुरू कर दिया। पटेल और मेनोन ने देशी राजाओं को बहुत समझाया कि उन्हें स्वायत्तता देना संभव नहीं होगा। इसके परिणाम स्वरुप तीन रियासतें हैदरावाद, कश्मीर और जूनागढ़ को  सभी राजवाड़ों ने स्वेछा से भारत में विलय का प्रस्ताव स्वीकार किया। फिर जब हैदराबाद के निजाम ने भारत में विलय का प्रस्ताव नहीं माना तो सरदार पटेल ने वहां सेना भेजकर निजाम को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर कर दिया।

सरदार पटेल ने लगभग 562 रियासतों को भारत में मिलाया। यह एकीकरण विश्व इतिहास का रिकॉर्ड है। महात्मा गाँधी ने सरदार पटेल को इन रियासतों के बारे में लिखा था कि रियासतों की समस्या इतनी जटिल थी जिसे केवल तुम ही हल कर सकते थे।

सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में एक लेवा पटेल जाती के एक जमींदार परिवार में हुआ था। वह अपने पिता झवेरभाई पटेल और माता लाडबा देवी की चौथी संतान थी। सरदार पटेल ने स्वाध्याय के माध्यम से शिक्षा प्राप्त की। 16 साल की उम्र में उनका विवाह हो गया लेकिन ये शादी ज्यादा दिनों तक नहीं चली और 1908 में पटेल की पत्नी की मौत हो गई। उस समय उनका एक पुत्र और एक पुत्री थी।

इसके बाद वह जब तक जिए  दूसरी शादी नहीं की। वकालत की पेशे में तरक्की करने के लिए पटेल ने अध्ययन के लिए अगस्त 1910 में लंदन की यात्रा की। वहां उन्होंने काफी मेहनत से अध्ययन किया और अंतिम परीक्षा में उच्च प्रतिष्ठा के साथ उत्तीर्ण हुए। भारतीय राष्ट्र कांग्रेस के 1929 के लाहौर अधिबेशन में सरदार पटेल महात्मा गाँधी के बाद अध्यक्ष पद के दूसरे उमीदवार थे।

गांधीजी ने स्वाधीनता के प्रताव को स्वीकृत होने के रोकने के प्रयास में अध्यक्ष पद की दावेदारी छोड़ दी और पटेल पर भी नाम वापस लेने के लिए दवाब डाला। अंतत जवाहरलाल नेहरू अध्यक्ष बने और 1930 में नमक सत्याग्रह के दौरान पटेल को 3 महीने की जेल हुई। मार्च 1931 में उन्होंने भारतीय राष्ट्र कांग्रेस के कराची अधिवेशन अध्यक्षना की। जनुअरी 1932 में उन्हें फिर गिरफ्तार किया गया। जुलाई 1934 में वह रिहा हुए और 1937 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी के संगठन को संगठित किया। 1937-38 में वह कांग्रेस के अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदार थे। एक बार फिर गाँधी जी के दवाब में पटेल को अपना नाम वापस लेना पड़ा और जवाहरलाल नेहरू निर्वाचित हुए।

अक्टूबर 1940 में कांग्रेस के अन्य नेताओ के साथ पटेल भी गिरफ्तार हुए और अगस्त 1941 में रिहा हुए। 1945-46 में भारतीय राष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए सरदार पटेल प्रमुख उमीदवार थे। लेकिन महात्मा गाँधी ने एक बार फिर हस्तक्षेप करके जवाहरलाल नेहरू को अध्यक्ष बनने दिया।

सरदार वल्लभभाई पटेल का निधन 15 दिसंबर 1950 को मुंबई में हुआ था। उनके मौत के 41 साल बाद 1991 में उन्हें भारतरत्न प्राप्त हुआ जो उन्हें बहुत पहले मिलना चाहिए था। साल 2014 में केंद्रीय के मोदी सरकार ने सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाना शुरू किया।

उम्मीद करते हैं सरदार वल्लभभाई के जीवन से जुडी यह कहानी “सरदार बल्लभ भाई पटेल को “लौह पुरुष” की उपाधि किसने दी” आपको पसंद आई होगी अगर पसंद आए तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी जरूर शेयर करे।

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