बघेला और तूफान की कहानी | Baghela aur Tufan ki Kahani

बघेला और तूफान की कहानी | Baghela aur Tufan ki Kahani

बघेला और तूफान की कहानी  Baghela aur Tufan ki Kahani

 

बघेला और तूफान की कहानी

किसी गाँव में एक बुढ़िया रहती थी। उसका एक ही बेटा था। एक दिन उसका बेटा  भेड़-बकरियां चराने जंगल में पहूंचा कि आसमान पर काली घटाएं उमड़ आई। जोर से हवा चलने लगी  और धीरे-धीरे तूफान बन आया। बुढ़िया ने देखा तो बेटे को चिल्लाकर आवाज देते हुए बोली, “भारी तूफान चला आ रहा है, भेड़-बकरियों को लेकर घर लौट आ।”

 

झाड़ी में भेड़-बकरियों की ताक में बैठा हुआ बघेला बुढ़िया की आवाज सुनकर सहम गया। सोचने लगा यह तूफान क्या बला है। जंगल में एक से एकखूंखार और बलशाली जानवर तो हैं पर तूफान का नाम कभी नहीं सुना। अब यह कौन सी चीज जंगल में आ गई है। निश्चित ही यह कोई खतरनाक चीज होगी। सोचकर बघेला मन ही मन डर गया और तूफान की मार से बचने के लिए चुपचाप झाड़ी से निकल भेड़-बकरियों में आ शामिल हुआ।

 

थोड़ी देर में लड़का भेड़-बकरियों को लेकर घर लौटा और उन्हें ओबरे में ले जाकर बंद कर दिया। उसके घर लौटते ही बरसात शुरू हो गई। आंधी-पानी और तूफान का जोर हो आया। तभी एक चोर को चोरी की बात सूझी। यही मौका है सोचकर वह आधी रात के समय बुढ़िया के ओबरे में घुस आया और भेड़-बकरियों को टटोलने लगा। वह बुढ़िया के ओबरे से एक हष्ट-पुष्ट बकरे को चुराना चाहता था।

 

अचानक हाथ में बघेले किक गर्दन आ गई। चोर ने समझ लिया कि यही सबसे तगड़ा माल है चुपके से उसके गर्दन में रस्सी डाल दी और बाहर खिंच लाया। बघेले को लगा कि अब उसकी खैर नहीं। तूफान ने यहाँ भी पीछा नहीं छोड़ा। वह भय से कांपता हुआ चुपचाप उसके पीछे चलने लगा। रातों रात वह बघेले को निकालकर दूर ले आया।

 

सुबह की उजाले में जब चोर ने देखा कि बकरे की जगह वह बघेले को बांध ले आया है तो मारे डर के उसकी हालत बिगड़ गई। बघेले को वहीं छोड़कर चोर सिर पर पांव रखकर भागा और वहीं पास में एक पेड़ के खोखल में जा छुपा। उसके हाथ से छूटकर बघेला भी जंगल की ओर भागा और भागता ही चला गया।

 

जंगल में उसे बेतहाशा भागते हुए देख भालू ने रोककर पूछा, “बघेले सर्दार! आज इतनी तेजी से खान दांव लगाने निकले हो?” भालू को देखकर बघेले के जान में जान आई। हाँपते हुए बोला, “क्या बताऊँ कलुवा राजा!  अब इस जंगल में हमारी दाल न गलेगी। अब यहाँ एक भयानक जंतु आ पहुंचा है। उसका नाम तूफान है। मुझे लगता है वह इस जगंल में किसी को रहने न देगा। उसके चंगुल से किसी तरह जान बचाकर निकल आया हूँ। देखो! मेरे गले में उसकी हाथ की बंधी हुई रस्सी लटक रही है। वह इतना खतरनाक है कि गले से पकड़कर ही सबको काबू में करता है।”

 

बघेले की बात सुनकर भालू अपने दोनों पंजे उठाकर खड़ा हो गया। “क्या कहा?…हमसे अधिक बलवान इस जंगल में शेर को छोड़कर और कौन हो सकता है। अभी साथ चलकर मुझे दिखा उस दुष्ट को अपने एक ही पंजे से उसकी सूरत न बिगाड़ दी तो कहना।” भालू को साथ लेकर बघेला उस  ओर चला जहाँ टुफान के चंगुल से छूटकर वह भाग निकला था। तूफान की बहुत तलाश की लेकिन उन्हें कहीं कुछ न दिखाई  दिया। आखिर भालू थककर उसी पेड़ के जड़ में  आ बैठा, जिसकी खोखल में चोर छिपा हुआ था।

 

दोनों आमने सामने बैठकर तूफान का इंतजार करने लगे। वह आसपास  कहीं नजर आ जाएं तो उसकी हालत बिगाड़ देंगे। क्रोध में आकर भालू अपने हाथ-पैर पटकने लगा, “कहाँ है वह पाजी? धीरे-धीरे उसकी पूंछ खोखल के अंदर चली गई। जब चोर ने यह देखा कि भालू की पूंछ उसके मुँह के पास आ पहुंची हैं तो उसने दोनों हाथों से पूंछ को मजबूती से पकड़ लिया और अपनी पूरी ताकत के साथ खींचना शुरू किया।

 

यकायक भालू समझ न सका कि यह क्या हो रहा है। लेकिन तूफान क्या ख्याल आते ही वह चिल्ला उठा। उसने भी अपनी पूंछ को छुड़ाने में पूरी शक्ति लगा दी। नतीजा यह हुआ कि भालू की पूंछ निकलकर चोर के हाथों में चली गई। बिना पूंछ, उसके हाथों से छूटकर भालू वहां से भाग खड़ा हुआ। दोनों भागते-भागते दूर पहुंचे और एक घनी झाड़ी में जाकर दाम लिया। गजब हो गया, यह कैसा जंतु है जो पूंछ की तरफ से भी अचानक हमला बोल देता है।

 

वे तूफान के बारे में बातें कर ही रहे थे कि एक शेर की नजर उन पर जा पड़ी। अत्यन्त भयभीत हुआ जानकर शेर ने उनका हालचाल पूछ लिया। “हाल क्या पूछते हो जंगल के राजा। अब तो इस जंगल में तुम्हारा रहना कठिन है। तुमसे भी अधिक शक्तिशाली तूफान नाम  का जानवर इस जंगल में आ पहुंचा है।” भालू ने बताया कि एक ही झटके में उसने कैसे पूंछ उड़ा दी। बघेले ने भी आगे बढ़कर अपनी गर्दन में बंधी हुई रस्सी शेर को दिखाई। दोनों ने शेर से कहा कि अब इस जंगल को छोड़कर कहीं और चल देना चाहिए।

 

शेर को उनकी बात पर ताव आ गया। बोला, “तुम सब कायर हो। भला किसी की मौत आई हो जो मेरे रहते हुए इस जंगल में कदम रखने की हिम्मत करें? अभी चलकर मुझे दिखाओ कि कैसा है वह तूफान। एक ही झपट्टे में चित्र-फाड़कर उसका काम तमाम न किया तो मेरा नाम भी शेर नहीं। तीनों मिलकर उस ओर चले जहाँ तूफान ने भालू की पूंछ उखाड़ी थी। उन्होंने घनी झाड़ियों और अँधेरे झुरमुटों में तूफान की तलाश की, लेकिन वहां कुछ भी नजर ना आया।

 

इस बीच अपनी जान बचाने के लिए चोर उस पेड़ के खोखल से निकलकर पेड़ की सबसे ऊँची शाख पर जा बैठा, जहाँ पत्तों के बीच कुछ भी दिखने में न आता था। बहुत खोजबीन करने पर जब तूफान कहीं नजर न आया तो शेर ने क्रोध में आकर गरजना शुरू किया। उसकी गरज सुनकर पेड़-पौधे कांप उठे। मारे डर के चोर का सारा शरीर कांप उठा। उसके हाथों से टहनियां छूट गई और वह अपने पुरे भार के साथ शेर की पीठ पर आ गिरा। शेर को लगा कि जैसे कोई पहाड़ उसकी कमर पर आ गिरा हो।

 

यकायक  अपने ऊपर तूफान का हमला हुआ समझ वह उछलकर भागा। चोर को भी एक ही रास्ता दिखाई दिया। उसने शेर की कमर  अपनी बाहों से इस कदर कस ली कि उसकी सांसे घुटने लगी। अब तो जान के लाले पड़ गए। फिर अपनी जान बचाने के खातिर वह लंबी छलान लगाता हुआ दूर निकल गया। इतना लंबा सफर तय करने के कारण चोर बहुत थक गया। धीरे-धीरे उसकी बाहें ढीली पड़ गई, हाथ शेर की कमर से छूट गए और वह जमीन पर आ गिरा। किन्तु शेर को पीछे देखने की फुर्सत कहाँ थी। वह पागल हुआ भागता ही रहा। जान बची तो लाखों पाये।

 

कहीं दूर निकलने के बाद तीनों फिर मिल गए। अब तो शेर के हौसले भी पस्त हो चुके थे। बोला, ‘सचमुच वह तूफान तो बहुत ही खतरनाक है लेकिन तुम लोगों ने उसे ठीक से पहचाना नहीं वह न तो गले से काबू करता है, न पूंछ की तरफ से हमला बोलता है। लगता है उसे सवारी करने का बहुत शौक है। यदि मुझे मालूम होता कई वह इतनी तगड़ी सवारी भी करता है तो हरगिज उसकी तलाश न करता। इसलिए अब हमें इस जंगल को छोड़कर कहीं चल देना चाहिए।” कहकर तीनों ने उस जंगल से विदा ले ली।

 

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