ससुराल की नौकरानी | Sasural ki Nokrani Story in Hindi

ससुराल की नौकरानी | Sasural ki Nokrani Story in Hindi

ससुराल की नौकरानी  Sasural ki Nokrani Story in Hindi

 

ससुराल की नौकरानी

शर्मा जी की पत्नी शशि अपने छोटे बेटे के शादी को लेकर बहुत परेशान थी। कितनी सारी लड़कियों की फोटो देखी लेकिन एक भी लड़की उन्हें अपने बेटे के लिए बहु के रूप में पसंद नहीं आ रही थी। थोड़े दिन शशि अपने बहन के घर एक गोदभराई के एक छोटे से फंक्शन में गई उन्होंने वहां एक लड़की देखि।

उनको वह लड़की बहुत ही अच्छी लगी। उन्होंने घर आकर सबको बताया, सबने कहा ठीक है, बात को आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने कुछ रिश्तेदारों से पता कर लड़की के माता-पिता से बात की और लड़की की तस्वीर मांगी अपने परिवार को दिखाने को और और मिलने का भी तय किया।

लड़की के पिताजी ने लड़की की फोटो व्हाट्सएप पर भेज दी। जैसे ही शशि जी के पति विनोद और बेटा कुनाल दुकान से आए शशि जी ने उन्हें फोटो दिखाई और बोली, “मुझे यह लड़की बहुत पसंद है मैं इसको ही अपने घर की बहु बनाऊंगी। इतना सुनकर कुनाल को गुस्सा आ गया।

कुनाल ने कहा, “मम्मी आपने अपने मन से मेरी शादी कैसे तय कर दी। क्या आपने मुझसे एक बार भी पूछना जरुरी नहीं समझा और सीधे लड़की देखि और शादी फिक्स कर दी और तो और लड़की देखने के लिए हाँ कर दी। एक बार भी पूछ लिया होता मुझे लड़की पसंद है या नहीं।”

तभी कुनाल के पिताजी बोले, “बेटा इसमें तुम्हे क्या पूछना, क्या हम तुम्हारे लिए गलत लड़की का चयन करेंगे। और अगर ऐसा करना होता तो कब का कर चुके होते। तुम्हारी माँ ने पता नहीं कितनी सारी लड़कियों का फोटो देखने के बाद इस लड़की को पसंद किया है।”

कुनाल ने साफ साफ कह दिया, “मुझे शादी नहीं करनी।” यह कहकर कुनाल अपने कमरे में चला गया।

कुनाल जब अपने कमरे में चला गया तब कुनाल की बड़ी भाभी कामिनी कमरे में गई और बोली, “क्या बात है कुनाल, अच्छी तो लड़की है। तुम क्यों मना कर रहे हो शादी करने से?”

कुनाल ने भाभी से कहा, “मैं एक लड़की से प्यार करता हूँ और उसी से शादी करना चाहता हूँ।”

भाभी ने कहा, “देवर जी अगर ऐसी बात थी तो पहले बता देना चाहिए था ना, माँ जी कब से परेशान थी आपके शादी के लिए, कहाँ-कहाँ नहीं लड़की देखि।”

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कुनाल ने कहा, “अगर कोईं मुझसे पूछे तब तो बताऊंगा ना, क्या मैं अपने आप से कहूं कि मैं शादी करने जा रहा हूँ।”

कुनाल की भाभी कामिनी ने जाकर अपनी सास से कहा कुनाल किसी लड़की से प्यार करता है और वह उसी से शादी करना चाहता है। शशि जी यह सुनकर बहुत गुस्सा हुई और बोली, “जब उसने लड़की पहले से ही पंसद कर ली थी तो मुझे बता देता। लेकिन मैं जब तक लड़की  नहीं देखूंगी मैं शादी नहीं होने दूंगी।”

तो कुनाल ने अपनी गर्लफ्रेंड कृतिका को अपने घरवालों से मिलवाया। कुनाल के घरवालों को कृतिका पसंद आ गई। मिलने के बाद शशि ने कुनाल से कहा, “देखो तुमने लड़की  तो पसंद कर ली, हम शादी भी देने के लिए तैयार है लेकिन बिना दहेच के नहीं करेंगे। इसमें तुम कुछ भी नहीं बोलोगे।” कुनाल चुपचाप था वह सोच रहा था की कुछ भी करके शादी हो जाए।

अगले दिन कृतिका के पिताजी कुनाल के घर में शादी के बात करने के लिए गए। जब दहेच की बात आई तो कृतिका के पिताजी ने दहेच देने से इंकार कर दिया। लेकिन कुनाल के जिद की बजह से कुनाल के घरवालों को यह शादी माननी पड़ी। तीन महीने में ही कुनाल और कृतिका की शादी हो गई।

घर में जब तक मेहमान थे तब तक तो कृतिका से कोई कुछ भी नहीं कहता था। जैसे सारे मेहमान चले गए, उसके अगले ही दिन कृतिका की सास शशि जी कृतिका के कमरे में गई और जाकर बोली ,”बहु सूरज कब का निकल चूका है अब तक सोई रहोगी क्या? सुबह-सुबह सबको चाय पिने की आदत है। आज तो देर से उठ गई लेकिन कल से 6 बजह के पहले ही सबको चाय बनाकर दे देना और हाँ बड़ी बहु कामिनी भी 8 बजे तक अपने ऑफिस चली जाती है। उसका भी नास्ता 8 बजे तक बन जाना चाहिए।”

अभी तो कृतिका के ठीक से महेंदी के रंग भी ठीक से नहीं छूटे थे। कृतिका जो सुबह 6 बजह सो कर उठती थी और रात के 12 बज जाते थे फिर भी उसके काम खत्म नहीं होते थे।

कृतिका टेंशन में होती थी कल सुबह जल्दी उठना है नहीं तो नींद भी नहीं खुलेगा। कृतिका तो यह भी भूल गई थीं कि उसकी नई-नई शादी हुई है, कितने सपने सजोए थे शादी होने के बाद हनीमून के लिए हिमाचल जाएगी। लेकिन यहाँ तो जब से शादी हुई है इस घर में एक दिन भी बाहर नहीं निकली, हिमाचल जाने की तो दूर की बात थी। कभी-कभी तो वह सोचति थी कि इस घर में बहु के रूप में आई है या एक नौकरानी के रूप में। क्या लड़की की शादी इस लिए होती है कि वह मायके से ससुराल जाकर एक नौकरानी बन जाए। क्या-क्या सपने सजाए थे कृतिका ने, कृतिका भी टीचर बनना चाहती थी लेकिन अब उसे लग नहीं रहा था कि यहाँ रहकर वह पढाई कर पाएगी क्यों की घरवालों के रंग ढंग देखकर तो यही लगता था।

एक दिन रात में कृतिका  ने अपने पति कुनाल से कह दिया, “कुनाल ऐसा नहीं हो सकता की हम लोग किसी दूसरी जगह रेंट पर घर लेकर रहें इसी शहर में, यहाँ तो मैं सुबह से शाम तक सिर्फ काम ही काम करती हूँ।”

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कुनाल ने कहा, “तो फिर तुम क्या करना चाहती हो? क्या तुम यह कहना चाहती हो कि मैं अपने माँ-बाप से और भाई से अलग होकर कहीं और रहूं? इस दुनिया की सारे औरते तो यही सब करती है। ससुराल में एक लड़की क्या करती है घर की देखभाल और फिर कामिनी भाभी भी तो सुबह से शाम तक नौकरी  करने जाती है और शाम तक आने के बाद घर के काम में हाथ बटाती है।”

कृतिका समझ  गई थी कि अपने पति से कुछ भी कहना बेकार है। वह अपनी जिंदगी को अपनी नियति समझकर जीने लगी थी। आज सावन का पहला सोमवार था। कृतिका ने व्रत रखा हुआ था उसने सोचा कि सुबह -सुबह सबको नास्ता कराकर थोड़ी देर आराम कर लेती हूँ फिर लंच बनाऊंगी। अभी कृतिका बिस्तर पर लेटी ही थी तभी कृतिका की सास की आवाज आई, “बहु जरा दो कप चाय लेकर आना और हाँ वह बेकरी वाला बिस्कुट भी लेकर आना।”

कृतिका ने सुबह से कुछ नहीं खाया था। पुरे शरीर में थकान हो गई थी और सर में भी दर्द से उसका हाल और भी बुरा हो गया था। लेकिन इस घर में कृतिका का दुःख दर्द कोई भी समझने वाला नहीं था। कृतिका जैसे ही चाय लेकर अपने सास के कमरे में पहुंची कृतिका की सास किसी मंदिर की घंटे की तरह जोर-जोर से बजने लगी, “तुम्हारे मायके वाले ने कौनसा मेरा घर भर दिया है जो रानी की तरह अपने रूम में आराम फरमा रही हो। बड़ी बहु को देख एक तो इतना ज्यादा दहेच लेकर आई और ऊपर से नौकरी भी करने जाती है। महीने के आखिर में आधे तनखाह का पैसा मुझे दे जाती है। बहु और तो बड़ी बहु जैसी। शादी से पहले तुमने कहा था मास्टर डिग्री लिया है तुम्हारे मास्टर डिग्री का क्या फायदा जब एक भी रूपए कमा ही नहीं रहे हो तो।” इतना सुनकर कृतिका के आँखों से आंसू टपक-टपक कर जमीन पर गिरने लगे।

कृतिका ने रुंधे हुए गले से बस  इतना ही कहा, “माँ जी आज सावन  का पहला सोमवार था इसलिए मैंने व्रत रखा हुआ  था। सिर में दर्द हो रहा था इसलिए थोड़ा आराम करने चली गई थी।”

कृतिका का के कमरे से बाहर जाते ही शशि जी की सहेली ने कहा, “आज कल की बहुओ का यही हाल है बहाने बाजी करती रहती है जिससे कोई काम काम ना करना पड़े। एक हमारा जमाना था सास को एक बार भी टोकने का मौका नहीं देते थे और आज कल की बहुए झट से जवाब दे देती है।”

आज कृतिका के आत्मसम्मान को ठेस पहुंची थी उसने मन में सोच लिया कि बस अब बहुत हो गया अब वह भी जॉब करेगी, आखिर उसने भी तो इतनी पढाई की थी। आज मेरी जेठानी जॉब करने जाती है तो उनको सब घर में इज्जत से बात करते हैं। शाम होते ही  जैसे ही कृतिका की जेठानी काम से घर आती थी तो कृतिका तुरंत पानी और चाय बनाकर देती थी। आज कृतिका की जेठानी घर पर आई लेकिन कृतिका न ही पानी और न ही चाय देने आई। कृतिका की जेठानी को जब उसकी देवरानी कहीं नहीं दिखाई दी तो वह उसके कमरे के अंदर चली गई। अंदर जाकर देखा तो कृतिका अपने बेड पर सोई हुई थी और रो रही है।

कृतिका की जेठानी ने कृतिका को अपनी गोद में लेकर कहा, “क्या हो गया बहन, क्यों रो रही है?”

कृतिका ने दो पहर की सारी बातें अपने जेठानी को बता दी, “आप तो जानती है मैं पुरे दिन घर का काम करती हूँ फिर भी सासु माँ ताने मारती रहती है।”

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कृतिका की जेठानी ने कहा, “अरे पगली तू सासु माँ की बातों का बुरा मत मानना वह तो ऐसी ही है। मैं भी जब नई-नई शादी करके आई थी तो मेरे साथ भी ऐसाही  हो रहा था लेकिन उसके बाद मेरी नौकरी लग गई और फिर घर में मुझे टाइम ही कहाँ रहता है कि मैं रहूं। मैं तो कहती हूँ कि तुम भी नौकरी करो मेरे ऑफिस में ही एक एम्प्लॉय का पद खाली है तनखाह तो ज्यादा नहीं दे पाएंगे लेकिन तुम कहो तो बात करूँ।”

कृतिका ने एक पल में ही हाँ कह दिया क्यों की अब वह आत्मसम्मान से जीना चाहती थी। कृतिका की जेठानी ने उसी समय ऑफिस के हेड को फ़ोन लगाकर बताया कि मेरी देवरानी है आप कहो तो कल इंटरव्यू के लिए साथ ही लेकर आऊं। ऑफिस के हेड ने हाँ में जवाब दिया।

अगले दिन कृतिका इंटरव्यू देने गई और ऑफिस में उसका सेलक्शन हो गया। फिर क्या था वह भी अपने जेठानी के साथ ऑफिस जाने लगी कृतिका की जेठानी और कृतिका जल्दी-जल्दी घरवालों के लिए नास्ता बनाते और फिर एक साथ ही ऑफिस चले जाते। अब दोनों देवरानी और जेठानी मिलकर साथ रहने लगे। कृतिका को भी जितनी तनखाह मिलती थी उसमे से आधे पैसे अपने सास को दे देती थी।  अब उसकी सास भी कृतिका से सही से बात करती थी।

 

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