राजकुमारी और जादुई मेंढक | Princess and Magical Frog Story in Hindi

राजकुमारी और जादुई मेंढक | Princess and Magical Frog Story in Hindi

राजकुमारी और जादुई मेंढक  Princess and Magical Frog Story in Hindi

 

राजकुमारी और जादुई मेंढक

रामराय नाम का एक राजा था। उस राजा का राज्य धन और संपत्ति से सम्पन्न था। किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं थी। उस राजा की एक पत्नी थी जिसका नाम था उर्वशी। वह बहुत ही खूबसूरत और दयालु थी। उनकी एक प्यारी सी बेटी थी नूपुर। वह भी अपनी माँ की तरह बहुत खूबसूरत थी। उसके घने घुंगराले बाल, सुंदर नैन नक्ष हर किसी को उसकी ओर आकर्षित करता था।

वह बड़ी होकर और भी खूबसूरत दिखने लगी। राजकुमारी सबकी बड़ी लाडली थी। राजा-रानी ने नूपुर की जन्मदिन पर उसे एक सुंदर उपहार दिया, एक सुनहरी गेंद। उसे वह गेंद बहुत पसंद आई। सारे उपहारों में से उसे वह गेंद बहुत ही पसंद थी। खाली समय मिलते ही राजकुमारी और उसकी सहेली महल के बाहर सुंदर से बगीचे में गेंद से खेलकर अपना मन बहलाया करती।

एक दिन राजकुमारी गेंद को जोर-जोर से उछालकर खेल रही थी। सूरज की किरणों में गेंद चमक रही थी। उसकी रौशनी चारों ओर फ़ैल रही  थी। गेंद के साथ खेलते-खेलते उस रौशनी को देखने में राजकुमारी को बहुत मजा आ रहा था। तभी वह गेंद अचानक से उछल पड़ी और  बगीचे के पास तालाब में जा गिरी।

ऐसा होने पर राजकुमारी दुखी होकर रोने लगी। गेंद पानी के बीचों-बीच जाकर फंस गई। उसे निकालना बहुत ही मुश्किल था। एक मेंढक ने राजकुमारी को रोते हुए देख लिया।

मेंढक – राजकुमारी जी आप क्यों रो रही है मुझे बताइए?

राजकुमारी – क्या तुम बात कर सकते हो?

मेंढक – हाँ मुझमे आप की तरह बात करने की और समझने की कला है। यह बात जरुरी नहीं है आप अपनी रोने की बजह बताइए।

राजकुमारी – मेरी गेंद पानी में फंस गई है वो गेंद मुझे बहुत पसंद है। और आज मेरे साथ मेरी सहेली भी नहीं है जिसके साथ मिलकर मैं कोई तरकीब निकालू। वह मेरे माँ बाबा का दिया हुआ एक प्यारा सा तोहफा है। मुझे वह वापस चाहिए।

मेंढक – मैं आपकी मदद कर सकता हूँ राजकुमारी।

राजकुमारी – तुम पर कैसे?

मेंढक – मेरे लिए यह काम मुश्किल नहीं है लेकिन उसके बदले आपको मेरी एक शर्त माननी होगी।

राजकुमारी – कैसी शर्त?

मेंढक – आपको मुझे आपके महल में अपने साथ चार दिनों तक रखना होगा।

राजकुमारी – यह कैसी शर्त है? तुम भला वहां कैसे रहोगे?

मेंढक – मैं वहां रह लूंगा बस चार दिनों की तो ही बात है।

न चाहते हुए भी राजकुमारी ने मेंढक क शर्त के लिए हाँ कह दिया। उसने मन में सोचा एक बार गेंद हाथ में आ जाए फिर देख लेंगे। मेंढक तालाब के बीचों-बीच फंसी वह सुनहरी गेंद ले आया। उस सुनहरी गेंद को वापस पा कर राजकुमारी बहुत खुश हुई। मेंढक ने सोचा अब राजकुमारी उसे लेकर महल चलेगी। लेकिन राजकुमारी तो अपनी सुनहरी गेंद लेकर महल की ओर चली गई।

गेंद पाकर राजकुमारी का मन भर गया था। उसे जो चाहिए था वह उसे मिल गया था। अब उसे उस बदसूरत मेंढक की क्या जरुरत थी। मेंढक ने राजकुमारी की बहुत राह देखि लेकिन वह तालाब के पास मुड़कर आई ही नहीं।

दूसरे दिन जब राजकुमारी राजा-रानी के साथ नास्ता कर रही थी तभी सभी ने किसी की आवाज सुनी। राजा ने पलट कर देखा तो टेबल क पास एक मेंढक खड़ा था। जैसे ही राजकुमारी ने उस मेंढक को देखा तो वह बहुत ज्यादा गुस्सा हो गई।

राजकुमारी – तुम यहाँ क्यों आई हो?

मेंढक – राजकुमारी आप अपना वादा भूल रही है बस उसे याद दिलाने के लिए ही मुझे यहाँ आना पड़ा।

मेंढक को बात करते देख राजा-रानी चौंक पड़े।

राजा – यह कोई सामान्य मेंढक नहीं हो सकता। इसमें जरूर कोई खास बात है तभी यह हमारी तरह बात कर सकता है और हमारी बातें भी समझ सकता है।

रानी – हाँ आपने सही कहा। लेकिन कैसा वादा?

राजा – राजकुमारी क्या बात है? क्या तुमने इसे कभी किसी बात के लिए वादा किया था?

राजकुमारी ने रोते हुए राजा को सारी बातें बताई और वह राजा बहुत अच्छा और सच्चा था।

राजा – वादा तो वादा है चाहे किसी के साथ भी किसी भी परिस्तिथि में किया जाए। तुमको अपना किया हुआ वादा निभाना ही होगा। तुम्हे इस मेंढक को अपने साथ रखना ही होगा।

अब राजकुमारी भी मजबूर थी उस बदसूरत से मेंढक को अपने साथ रखने के लिए। आखिर वह करती भी क्या उसने वादा जो किया था। राजकुमारी सुबह शाम उस मेंढक को खाना खिलाती थी, उसके साथ खेलती थी, रात को उसे अपने ही साथ सुलाती थी। राजकुमारी के दिल में मेंढक के प्रति पहली जैसी घृना नहीं थी और न ही उसे उस पर गुस्सा आता था। वह उसका अच्छे से ख्याल रख रही थी।

तीन दिन बीत गए थे और कल का दिन आखरी  दिन था। चार दिन पुरे होने पर मेंढक अपने घर वापस जाने वाला था। राजकुमारी ने मेंढक को सुला दीया। वह सोते हुए बड़ा ही मासूम लग रहा था। राजकुमारी ने उसके सर पर अपना हाथ घुमाया और उसके माथे को चुम लिया। और वह सो गई।

जैसे ही वह सुबह नींद से उठी उसके सामने एक प्यारा सा राजकुमार खड़ा था।

राजकुमारी – कौन हो तुम? और इस तरह मेरे कमरे में क्या कर रहे हो? तुम कहाँ हो मेंढक?

राजकुमार – मैं ही वह मेंढक हूँ राजकुमारी।

राजकुमार ने राजकुमारी को उसके श्राप के बारे में सब कुछ बताया कि कैसे वह एक मेंढक बन गया था।

राजकुमार – मुझे एक जादूगर ने श्राप दे दिया था और अपने जादू से उसने मुझे मेंढक बना दिया था। आपने प्यार से चार दिनों तक मेरी सेवा की और कल मेरे माथे को चुम लिया और मैं श्राप से मुक्त हो गया। मैंने आपको देखा था तभी से आपको प्यार करने लगा था। अब मैं अपने असली रूप में  आ चूका हूँ राजकुमारी। क्या आप मुझसे शादी करना चाहेंगी।”

राजकुमारी को भी राजकुमार बहुत पसंद आया था। राजा-रानी ने भी उनके विवाह के लिए हाँ कर दी। दोनों  ही ख़ुशी-ख़ुशी रहने लगे।

राजकुमारी और जादुई मेंढक  Princess and Magical Frog Story in Hindi इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है ?

इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि किसी से भी किया हुआ वादा निभाना अपना कर्तव्य है।

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