हीरे-मोती और नौकर

हीरे-मोती और नौकर

हीरे-मोती और नौकर Heere Moti aur Noker Kahani in Hindi 

 

हीरे-मोती और नौकर

एक विधवा औरत थी, जिसका इकलौता बेटा था बुरेन। वह विधवा औरत लोगों का ऊन साफ करती और अपना और अपने बेटे का पेट पालती। जब वह बड़ा हो गया तो उसकी माँ ने कहा, “बेटा अब मुझ में और काम करने की हिम्मत नहीं है, तुम काम की तलाश करो।” अच्छी बात है माँ – यह कहते  हुए उसका बेटा काम की तलाश में निकल पड़ा।

कुछ समय बाद वह एक अमीर के घर पहुंचा और बोला, “भाई क्या आपको नौकर की जरुरत है।” उस व्यक्ति ने कहा, “हाँ जरुरत है।” और उसने बुरेन को नौकर रख लिया।

एक दिन गुजर गया लेकिन उसने बुरेन को कोई काम नहीं दिया। दूसरा और तीसरा दिन भी निकल गया लेकिन उसने बुरेन की ओर ध्यान नहीं दिया। बुरेन को यह सब अजीब लगा। उसे समझ नहीं आ रहा था कि उस व्यक्ति ने उसे नौकर किस लिए रखा है।

अंत में उसने पूछा, “मालिक आप मुझे कोई काम करने के लिए देंगे न?” उस व्यक्ति ने कहा, “हाँ हाँ, कल तुम मेरे साथ चलना।”

अगले दिन उस व्यक्ति ने बुरेन को एक बैल की खाल, चार बड़े बोरे और सफर के लिए दो ऊंट तैयार करने का हुक्म दिया। बुरेन ने ऐसा ही किया।

दूसरे दिन वह चल दिए। जब वह दूरदराज एक पहाड़ पर पहुंचे तो उसने बुरेन को बोरे और बैल की खाल ऊंट से उतारने के आदेश दिए। बुरेन ने ऐसा ही किया।

अब उस व्यक्ति ने बुरेन को बैल की खाल उल्टा कर कर उस पर लेट जाने को कहा। बुरें को समझ नहीं आया कि किस्सा क्या है पर मालिक का हुक्म टालने की उसकी जरुरत न हुई। उसने ऐसा ही किया। मालिक ने बुरेन को खाल में लपेटकर बंडल सा बना दिया और उसे अच्छी तरह से कस दिय और एक चट्टान के पीछे जा कर छिप गया।

कुछ देर बाद दो बड़े विशालकाय पक्षी आए। उन्होंने उस खाल को अपने पंजो से पकड़ लिया। फिर वे उसे एक ऊँची पहाड़ी की ओर ले गए। चोटी पर पहुंचकर पक्षी उस खाल को चोंचों और पंजो से नोचने लगे तथा इधर-उधर घसीटने लगे। फलस्वरूप खाल फट गई  और उसमे से बुरे लुढ़क कर बाहर आ गया।

पक्षियों ने जब उसे देखा तो डर कर उड़ गए। बुरेन उठ कर खड़ा हुआ और अपने इर्द-गिर्द देखने लगा। मालिक ने जोर से चिल्लाकर कहा, “वहां बूत बने क्यों खड़े हो। तुम्हारे पैरों के पास जो रंगीन पत्थर पड़े है उन्हें मेरे पास फेंक दो। बुरेन ने निचे नजर दौड़ाई तो वहां बहुत से रंगीन हीरे इधर-उधर बिखरे दिखाई दिए।

हीरे बड़े-बड़े और बहुत सुंदर थे जो खूब चमक रहे थे। बुरेन ने हीरे उठा-उठा कर निचे खड़े मालिक की तरफ फेंकने लग। मालिक उन्हें उठाकर बोरो में भरने लगा। बुरेन कुछ देर तक यह काम करता रहा। अचानक उसके दिमाग में एक ख्याल आया और उसका खून सुख गया। उसने चिल्लाकर कहा, “मालिक मैं यहाँ से उतरूंगा कैसे।” व्यक्ति बोला, “कुछ और हीरे निचे फेंक दो मैं बाद में तुम्हे निचे उतरने का तरीका बताऊंगा।”

बुरेन ने उस पर विश्वास कर लिया और हीरे निचे फेंकता रहा। जब बोरे भर गए तो मालिक ने उन्हें ऊंटो पर लाद लिया और हँसते हुए बुरेन से कहा, “अब तो तुम समझ गए होंगे कि मैं अपने नौकरों से क्या काम लेता हूँ। देखो तो वहां तुम्हारे जैसे पहाड़ पर कितने और हैं। इतना कहकर मालिक ने अपने ऊंटो को हाक कर ले गया।

बुरेन पहाड़ से निचे उतरने का रास्ता खोजने लगा मगर वहां तो सिर्फ गहरी खाइयां थी। हर जगह इंसानी हड्डियां बिखरी पड़ी थी। यह उन लोगों की हड्डियां थी जो बुरेन की तरह उसके मालिक का नौकर थे। अचानक उसे अपने ऊपर पंखो की जोरदार फड़फड़ाहट सुनाई दी।

एक विशालकाय पक्षी ने  झपटा मारा। तभी उसे एक ऊपर सुझा। उसने अपने हाथों से पक्षी के पंजे पकड़ लिए। विशालकाय पक्षी बुरेन को निचे झटकने के लिए चक्कर काटने लगा। आखिर में वे पहाड़ी से निचे आकर जमीन पर आ गिरा।

बुरेन अब सही सलाहट पहाड़ी से निचे आ चूका था। वह फिरसे काम की तलाश करने लगा। काफी समय बाद उसने अचानक उस मालिक को देखा। बुरेन के दिमाग में एक योजना आई। वह उसके पास गया और पूछने लग, “क्या आपको नौकर की जरुरत है?” मालिक ले दिमाग में तो यह बात भूल कर भी नहीं आ सकती थी कि कोई उसका नौकर जिंदा भी वापस लौट सकता है इसलिए उसने बुरेन को नहीं पहचाना। और उसे अपने घर ले गया।

कुछ समय बाद उसने बुरेन को एक बैल की खाल, दो ऊंट और चार बोरे लाने का हुक्म दिया। बुरेन ने ऐसा ही किया। तत्पश्चात वे उसी पहाड़ी पर पहुंचे। उसने पहले की तरह बुरेन को खाल में लेटने को कहा।

बुरेन ने कहा, “मुझे यह कहकर दिखाइए मैं  ठीक से समझ नहीं पाया मालिक।” इसमें समझने की क्या बात है, ऐसा कहते हुए वह खाल में लेट गया।

बुरेन ने तुरंत मालिक को लपेटकर खाल का बंडल बना दिया और उसे कसकर बांध दिया। और खुद छिपकर बैठ गया। मालिक चिल्लाया, “यह तुमने मेरे साथ क्या किया?”

उसी समय दो विशालकाय पक्षी आए और बैल के खाल को अपने पंजो में उठाकर पहाड़ की चोटी पर ले गए। वहां पहुंचकर वे चोंचों और पंजो से खाल फाड़ने लगे मगर आदमी को बीच में लिपटा देखकर वे डर कर उड़ गए।

बुरेन ने निचे से जोर से चिल्लाकर कहा, “मालिक समय बर्बाद मत करो हीरे निचे फेंको जैसे मैंने किया था।” अब मालिक ने उसे पहचान लिया और गुस्से से बोला ,”तुम पहाड़ से निचे कैसे उतरे जल्दी मुझे जवाब दो।” बुरेन ने जवाब दिया ,”पहले तुम मुझे हीरे फेंको फिर मैं तुम्हे बताऊंगा कि पहाड़ से निचे कैसे उतरा जाता है।”

मालिक क्या करता उसने निचे उतरने के लिए हीरे बुरेन को निचे फेंकने शुरू कर दिए। बुरेन ने हीरो को बोरे में भरा और उंट पर लाद दिया। “मालिक अपने इर्द -गिर्द नजर डालो जिन आदमियों को तुमने मौत के मुँह में धकेला था उनकी हड्डियां सभी जगह बिखरी पड़ी है। तुम  उनसे निचे उतरने का रास्ता क्यों नहीं पूछते? जहाँ तक मेरा सवाल है मैं तो अपने घर हक्ला।” इतना कहकर बुरेन अपने घर की ओर चल दिया।

मालिक इधर-इधर चीखता -चिल्लाता रहा मगर बेकार वहां उसकी सुनने वाला कोई नहीं था।

 

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