चतुर सास और चतुर दामाद की मजेदार कहानी | Hindi Story of Sas and Damad

चतुर सास और चतुर दामाद की कहानी Chatur Sas Aur Chatur Damad Hindi Story

चतुर सास और चतुर दामाद की कहानी 

एक गाँव में एक किसान रहता था। एक दिन उसने सोचा की खेत की बुआई और जुताई का काम तो पूरा हो गया है, चलो ससुराल घूमकर आया जाये। किसान जब ससुराल पहुंचा तो सास-ससुर, साले-साली सभी बड़े खुश हुए। सास ने भी दामाद की अच्छी खातिरदारी की और दाल सब्जी में भी खूब सारा घी डालकर दिया।

 

भोजन करके दामाद को खूब आनंद आया। उसने फिर सोचा चलो फसल तो बो ही दी है फिर क्यों न ससुराल में और दिन ऐसे ही रहकर बढ़िया-बढ़िया भोजन किया जाये। फिर जान दो तीन दिन बीत गए और दामाद घर से जाने का नाम ही नहीं ले रहा था तो सास ने सोचा, ऐसे तो दामाद जी सारा घी चट कर जायेंगे और बाकि बच्चों के लिए तो कुछ बचेगा ही नहीं।

 

इन दिनों तेज सर्दी के कारण घी हंडिया में जम रहा था। इसलिए उसे बिल्ली  से बचाने के लिये वह उसे रस्सी से बांधकर छत पर लटका कर रखती थी। अब उसे एक युक्ति सूझी। जब भी दामाद खाने पर बैठता, सास उस हंडिया को उसके थाली के ऊपर उल्टा कर देती और हटा लेती। इससे दामाद की थाली में एक भी बूंद घी की न गिरती।

 

अब दामाद बहुत परेशान पर वह भी बहुत चतुर था और वह सास सारी चालाकियाँ समझ रहा था। अगले दिन जब उसकी सास खेत में जानवरों के लिए चारा लेने गई, दामाद ने उस घी की हंडिया को चूले पर रखकर गरम कर दिया और चुपचाप उस हंडिया को वैसे ही ऊपर रस्सी से बांधकर टांग दिया। अब सास इस बात से तो अनजान थी कि सारा घी अब हांडी में पिघला हुआ है।

 

जब खाने का समय आया तो सास ने घर में खिचड़ी बनाई फिर दामाद को खिचड़ी थाली में परोस कर दी और बोली, “आइये! दामाद जी खिचड़ी खा लीजिये।” दामाद जी आकर बैठ गए और सास ने उन्हें थाली में खिचड़ी परोसी फिर रोज की तरह उसने हंडिया ऊपर से उतारी और दामाद जी के थाली के ऊपर हंडिया उलटी कर दी। फिर क्या  था, सारा का सारा घी दामाद जी के थाली पर ही आ गिरा।

 

दामाद की थाली में सारा का सारा घी गिरने सेक्स सास तो अब हड़बड़ा गई और इसी हड़बड़ी में आनन फानन अपने बच्चों को आवाज लगाने लगी, “अरे! चंगु, मंगू, झुमरू, झुमकी जल्दी आओ आज तुम्हारे जीजा जी के साथ एक थाली में ही खाना खाते हैं।” फिर सब उस थाली में ही खाने के लिए बैठ गए और सास में चालाकी से अपने और अपने बच्चों की तरफ करने के लिए थाली में ही ज्यादा से ज्यादा घी अपनी और समेटते हुए बोलने लगी, “देखो! दामाद जी मैंने अपनी बेटी को इतना कपडा दिया,  इतने गहने दिए, इतने बर्तन दिए मेरी बेटी को दुःख पहुंचाया तो अच्छा न होगा।”

 

दामाद भी चालाक था कि घी की ढेरी बना-बना के समझाने के बहाने सास, सारा घी अपनी और अपने बच्चों की ओरसमेट रही है। फिर दामाद ने तुरंत चालाकी की और सारे घी को अपनी तरफ कर के खिचड़ी में घुमा-घुमा के बोलने लगा, “अरे! थारी लड़की को जो कुछ कहे उसे यूँ घुमा-घुमा के चारों खाने चित कर दूँ और खिचड़ी की तरह मुँह में डाल-डाल के खा जाऊं। इस तरह सारी घी लगी खिचड़ी दामाद अकेला ही चट कर गया और सास और बच्चें देखते के देखते रह गए।

 

दोस्तों उम्मीद करते हैं कि आपको यह कहानी जरूर पसंद आई होगी अगर पसंद आए तो शेयर जरूर कीजिये और अगर आपको इस ब्लॉग  की कहानियां पढ़ना अच्छी लगती है तो कमेंट करके हमें जरूर बताए इससे मुझे भी अच्छा लगेगा और मैं असेही इस ब्लॉग पर तरह-तरह की कहानिया आप सबके लिए पोस्ट करता रहूँगा।

 

यह भी पढ़े:-

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.