भरा हुआ प्याला | Bhara Huya Pyala Story in Hindi

भरा हुआ प्याला | Bhara Huya Pyala Story in Hindi

भरा हुआ प्याला Bhara Huya Pyala Story in Hindi

 

भरा हुआ प्याला

जापान के एक प्रसिद्ध मठ में एक नया भिक्षु आया। उसने एक बड़े संसथान में कानून की पढ़ाई की थी इसलिए उसे लगता था कि वह दूसरे भिक्षुओं से कहीं अधिक ज्ञानी है, बाकि कुछ भी नहीं जानते। जब भी उसे कोई सिखाने की कोशिश करता। जब भी उसे कोई सिखाने की कोशिश करता तो वह उन सभी पुस्तकों से पढ़े बातें सुनाने लगता जिन्हे उसने पढ़ा हुआ था। इस तरह वह सामने वाले को जाता देता कि उसे तो पहले से ही सब कुछ आता है उसे कुछ और सिखने की आवश्यकता नहीं है।

 

सभी भिक्षुओं को दिन में एक बार भिक्षा लेने जाना होता था। उन्हें अपने कटोरों में जो भी भिक्षा मिलती वह केवल उसे ही खा सकते थे। ऐसा इसलिए किया जाता था ताकि उनके स्वभाव कजी विनम्रता बनी रहे। उन सभी को कुछ नियमो का पालन भी करना होता था। वह घमंडी भिक्षु भी भिक्षा मांगने जाता। मठ के सरे नियमों का पालन करने के बावजूद उसका घमंड नहीं जा रहा था।  इस तरह उसने पहले दिन से लेकर अब तक कोई तरक्की नहीं की थी।

 

एक दिन एक बूढ़े लामा को पता चला कि यह नया भिक्षु हमेशा अपने ज्ञान का प्रदर्शन करता रहता है। वह सोचने लगे कि वह अपने इस भिक्षु  को विनय का सबक कैसे सिखाए। एक दिन उसने सभी नए भिखुओं को एक कमरे में बुलाया। सबसे मिलने के बाद बूढ़े लामा ने तीन भिक्षुओं को कमरे में रुकने को कहा, इनमे वह घमंडी शिष्य भी था। वह तीनो लामा को प्रणाम  कर बैठ गए।

 

इसके बाद बूढ़े लामा ने उनसे उनके पिछले जीवन और मठ के जीवन के बारे में कई सवाल पूछे। उन्होंने उनसे यह  भी पूछा कि वह मठ के जीवन के बारे में क्या सोचते हैं। इसके बाद सबके लिए वहां चाय मंगवाई गई। एक भिक्षु बड़ी सी केतली में गरम चाय और चार प्याले ले आया। बूढ़ा लामा सबके प्याले में चाय डालने लगा। पहले उसने शिष्यों के लिए चाय डाली। वह उस प्याले में तब तक चाय डालता रहा जब तक वह प्याला छलकने न लगा।

 

शिष्य ने लामा को इशारा करके बताया, “प्याला भर गया है  उस में से चाय छलक रही है।” गुरु ने केतली निचे रख दी। फिर उन्होंने अपने हाथ जोड़कर शिष्यों के तरफ देखा। वह बोले, “आप सबने देखा कि चाय प्याले से बाहर आ रही थी, आपने यह देखकर क्या सीखा?” पहले शिष्य ने देखा, “गुरूजी हम जो भी काम कर रहें हो उसे हमें सावधानी से करना चाहिए।” दूसरे शिष्य ने उत्तर दिया, “मुझे लगता है कि हमें अपने क्षमता के अनुसार ही सब कुछ सीखना चाहिए।” और तीसरा भिक्षु जो की घमंडी था उसने उत्तर दिया, “मैंने सीखा इससे पहले कि आप प्याले में और चाय डाले, प्याले को खाली होना चाहिए।”

 

तीसरे शिष्य ने फिर कहा, “गुरूजी मैं समझ गया कि आप क्या कहना चाहते हैं। मुझे आप क्षमा कर दीजिए, आज के बाद मैं आपको शिकायत का मौका नहीं दूंगा और पिछले ज्ञान पर अभिमान करना भी छोड़ दूंगा।” बूढ़े लामा मुस्कुराकर बोले, “तुम सबने अपने-अपने तरीको से सही उत्तर दिया पर ध्यान रहे यदि तुम भिक्षा मांगने निकलो तो तुम्हारा कटोरा खाली होना चाहिए, इसी तरह अगर तुम ज्ञान और विवेक पाना चाहते हो तो तुम्हे अपने ज्ञान का अहंकार किए बिना सब कुछ सीखना होगा।”

 

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धन्यवाद !

 

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