सांवली लड़की की कहानी | Sawli Ladki Ki Kahani in Hindi

सांवली लड़की की कहानी | Sawli Ladki Ki Kahani in Hindi

सांवली लड़की की कहानी  Sawli Ladki Ki Kahani in Hindi

 

सांवली लड़की की कहानी

अंगूठी पहनाई जा चुकी थी। अब सभी लोग खाने की प्लेट ले कर अपना-अपना कोना पकड़ चुके थे। नेहा अब अपनी सहेली और होने वाली जेठानी और ननद के साथ सिमटीं-सिकुड़ी बैठी हुई थी। इधर-उधर की बातें चल रही थी, इतने में सासू माँ कमरे में आई और नेहा के पास बैठते हुए बोली, “देखो नेहा अब शादी में कुछ ही दिन बचे है, तो तुम धुप में कम निकलना। बेसन, दही और हल्दी का लेप रोज रात को लगाया करना। उससे रंग साफ हो जाएगा।”

 

नेहा ने हाँ में सिर हिला दिया। अब जेठानी चहकते हुए बताने लगी, “हाँ नींबू और टमाटर का रस लगाओ तो रंग साफ हो जाएगा। देवर जी को गोरी-चिटटी लड़कियां पसंद है, मेरे जैसी।” और खिलखिलाकर हंस पड़ी। फिर माहौल हल्का हो गया।

 

खैर, धीरे-धीरे शादी के दिन नजदीक आने लगे। जब तब ससुराल से फ़ोन आता तो कहते – घर में रहने, ऑफिस से जल्दी आने और धुप में कम निकलने की हिदायत मिलने लगी। आकाश भी जब फ़ोन करता तो अधिकतर, उसके सांवलेपन को ले कर छेड़ दिया करता था, तो कभी सीरियस होकर कहता, “नेहा मुझे तुम्हारे सांवलेपन से कोई शिकायत नहीं है, मगर मम्मी की अरमान है कि उनकी बहुएं मिल्की वाइट (Milky White) हो। अब भावी तो है, तुम थोड़ी सांवली हो, तो वो जो टिप्स देती है मान लो न। आखिर खूबसूरत तो तुम ही दिखोगी।”

नेहा जवाब देना तो चाहती मगर मम्मी की हिदायत की बजह से चुप रह जाती। अपनी चिढ़ मम्मी पर निकालती, तो मम्मी कहती, “अरे इतने बड़े घर से रिश्ता हो रहा है, सिर्फ इसलिए कि तू बैंक में नौकरी करने लगी है, वरना एक साधारण मास्टर की बेटी की शादी कभी हो पाती क्या वहाँ। तू देख, वो रईस लोग हैं। बड़े लोगों के बीच उनका उठना-बैठना है। सोसाइटी मेंटेन करते हैं वो। तू किस्मत वाली है कि तेरे ऐसे रंग रूप के बाद भी उन्होंने तुम्हे चुना है।”

 

फिर नेहा चुप हो जाती। उसे भी लगता कि मम्मी ठीक ही कह रही है। सोचती कि बदलते वक्त के साथ सब कुछ ठीक हो जाएगा। लेकिन जैसे-जैसे दिन नजदीक आने लगे सासु माँ और आकाश का यह प्रेसर बढ़ने लगा। नेहा यह सब इग्नोर करना तो चाहती मगर कर नहीं पाती। फिर खुद में अंदर ही अंदर वह चिढ़ने लगी। जो रंग खिलना चाहिए था लगाने के बाद वो और मुरझाने लगा।

 

शादी के एक सप्ताह पहले आकाश का जन्मदिन था। आकाश ने पार्टी में नेहा को भी बुलाया था। सासु माँ ने पहले ही फ़ोन पर समझा दिया था कि पार्लर होते हुए पार्टी में आए। माँ ने भी भाई के साथ पार्लर भेज दिया। नेहा जब पार्टी में भाई के साथ पहुंची तो उसे देखते ही, सासु माँ लाल-पिली होने लगी। बड़ी बहु को बुलाकर कहा, “ले जाओ इसे बाथरूम में और अपने मेकअप से तैयार कर दो।” मगर नेहा नहीं गई। वहीं खड़ी रही।

सासु माँ के तलवे का गुस्सा सिर पर चढ़ गया और लगभग धक्का देते हुए नेहा को बोली, “न रंग है न रूप, फिर तुम्हे किस बात का घमंड है। हम ने अपने से निचे घर  में रिश्ता जोड़कर गलती कर दी।” इतने में आकाश भी वहां आ गया। हल्ला सुनकर और नेहा का हाथ पकड़कर बाथरूम की तरफ भावी के साथ बढ़ने लगा।

 

नेहा ने धीरे से उसके हाथ से अपने हाथ को आज़ाद करवाते हुए वापिस सासु माँ के तरफ बढ़ने लगी और उनके करीब जाकर बोली, “हाँ मैं साधारण घर से हूँ, मेरा रंग सांवला है। मुझे घमंड तो नहीं मगर गर्व है अपने आप पर। मैं अपनी कड़ी मेहनत से आज एक छोटे से मुकाम पर हूँ, और हाँ मेरे घरवाले आपके जैसे रईस तो नहीं है मगर उनमे इतना संस्कार तो है कि इंसान को इंसान समझे, उन्हें रंग रूप के आधार पर तौलते नहीं। और आकाश तुम…खैर तुमसे कोई शिकायत नहीं है, क्यों की तुमने बचपन से यही देखा है कि औरते सजावटी समान है, तो उनका वेल डेकोरेटेड (Well Decorated) होना लाजमी है।” कहते हुए उसने अपनी अंगूठी निकालकर अपने होने वाले सास के हाथ थमा दी और भाई का हाथ पकड़कर हॉल बाहर निकल गई, एक आजाद हवा की झोंके की तरह।

 

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