गैलिलियो की अधूरी कहानी | The Story of Galileo in Hindi

गैलिलियो की अधूरी कहानी  The Story of Galileo in Hindi

अगर हम किसी चीज को सात मंजिला ईमारत से निचे की तरफ फेंके तो क्या होगा? वह चीज सीधा निचे की तरफ आ गिरेगी। क्या आपको पता है इसका इन्वेंशन किसने किया था? इस महान साइंटिस्ट का नाम था एरिस्टोटल। उन्होंने बोला था कि अगर हम दो अलग चीजों को ऊपर से निचे की तरफ फेकेंगे तो जिसका वजन ज्यादा होगा वह पहले निचे की तरफ आ गिरेगा। इसके अलावा भी उनको फिलोसोफी, जूलॉजी, फिजिक्स और पॉलिटिक्स में भी बहुत ज्ञान था। लेकिन इस महान साइंटिस्ट के बात को एक साइंटिस्ट ने गलत साबित कर दिया था। तो आज हम इस लेख में उसी साइंटिस्ट के बारे में बात करने वाले हैं जिसने एरिस्टोटल को गलत साबित कर दिया था।

 

गैलिलियो की अधूरी कहानी – The Story of Galileo in Hindi

एरिस्टोटल का जन्म 384 BC में हुआ था, जिन्होंने कहा था कि अगर हम दो अलग चीजों को ऊपर से निचे की तरफ फेकेंगे तो जिसका वजन ज्यादा होगा वह पहले निचे आ गिरेगा। इस बात को 2000 सालों तक पूरी दुनिया सही मानती थी। इसके बाद जन्म हुआ एक महान फिजिसिस्ट गैलिलियो गैलिली का, जिनका जन्म हुआ था 15 फेब्रुअरी 1564 में इटली के पिसा शहर में।

 

गैलिलियो एक फिजिसिस्ट, फिलोसोफर, अस्ट्रोनॉमर और माथेमेटिशन भी थे। 1581, इस साल जब उनकी उम्र 17 साल की थी तब एक दिन जब गैलिलियो चर्च में प्रेयर के बाद बैठे हुए थे तब उन्होंने देखा कि चर्च के ऊपर एक झूमर जो की हिल रहा था। थोड़ी देर के बाद जब हवा और जोर से चलने लगी तब झूमर और भी जोरो से हिलने लगा। इसके बाद उन्होंने अपनी नर्वस की पल्स के साथ उस झूमर की दोलन की टाइम को चेक किया। बाद में जब हवा कम होने लगी और दोलन कम होता गया तब फिरसे गैलिलियो ने अपनी पल्स को चेक किया और वह हैरान रह गए। क्यों की दोलन छोटा होने के साथ साथ टाइम भी कम होना चाहिए था लेकिन टाइम तो कम नहीं हुआ, टाइम तो एक ही था।

 

इसके बाद गैलिलियो घर लौटे और खुद से यह टेस्ट करने की ठान ली। इसलिए उन्होंने बहुत सारे लोहे और सीसे के बॉल लिए और रस्सी के साथ बांधकर बहुत सारे पेंडुलम तैयार किये  और अपने दोस्तों के साथ मिलकर टेस्ट करने लगे। जिसके बाद उन्होंने देखा कि सारे पेंडुलम का समय एक ही आ रहा था। पेंडुलम चाहे किसी भी चीज से बना हो उसका समय एक ही आ रहा था। बाद में उन्होंने रस्सी के लंबाई और बढ़ा दिया जिसके बाद गैलिलियो ने देखा कि लंबाई को बढ़ाने से दोलन के समय में चेंज आ रहा था। इसका मतलब समय लंबाई के साथ आनुपातिक है। इसके चलते गैलिलियो को यह बात समझमे आ चुकी थी कि जिस तरह पेंडुलम के बॉल का वेट उसके दोलन के समय उसके स्पीड के ऊपर प्रभाव नहीं डालता ठीक उसी तरह ऊपर से किसी चीज को निचे की तरफ फेंके तो उस पर उस ऑब्जेक्ट की भार का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

 

गैलिलियो ने यह बात जब प्रोफेसर को बताई तब वह गैलिलियो के ऊपर भड़क गए और उन्होंने कहा कि एरिस्टोटल ने इस बात को बहुत पहले ही बताया है कि किसी चीज का गिरना उसके वेट यानि भार के ऊपर निर्भर करता है।

 

इसके बाद गैलिलियो ने बहुत सारे टेस्ट किये और इस नतीजे पर पहुंचे कि अगर हम दो अलग- अलग चीजों को ऐसी जगह पर एक साथ छोड़ेंगे जहाँ हवा न हो तो दोनों ही चीजे एक ही समय पर निचे आ गिरेगी चाहे उस चीज का वेट जो भी हो। इस बात को साबित करने के लिए गैलिलियो ने पिसा के मीनार के ऊपर से दो अलग चीजों को रस्सी के सहारे बांधकर निचे फेंका और दोनों ही एक साथ निचे गिरे।

 

कुछ हिस्टोरियन का मानना है कि इस टेस्ट को करने के बारे में गैलिलियो ने सिर्फ सोचा ही था कभी किया नहीं और कुछ राइटर ने इसके बारे में अपनी बुक्स में भी लिखा था जो उस समय गैलिलियो के बारे में लिखी गई थी।

 

घड़ी आविष्कार की कोशिश 

गैलिलियो ने झूमर के दोलन के टाइम को मापने के लिए अपने नर्वस का इस्तेमाल किया था क्यों की उस समय घड़ी नहीं थी। बाद में जब गैलिलियो पेंडुलम बनाकर उसको टेस्ट कर रहे थे तब समय को मापने के लिए उन्हें घड़ी बनाने के बारे में आईडिया आया ताकि बाद में टेस्ट के समय दोलन को मापने के लिए नर्वस का इस्तेमाल ना करना पड़े। इसके चलते गैलिलियो ने घड़ी बनाने की बहुत कोशिश की लेकिन वह बना नहीं पाए। बाद में क्रिस्टिआन हुय्गेंस ने इस पेंडुलम के आधार पर पहला पेंडुलम घड़ी का आविष्कार किया जो लगभग 250 साल को समय बताने वाला सबसे अच्छा घड़ी हुआ करता था।

 

खुद का टेलिस्कोप आविष्कार 

गैलिलियो गैलिली को 1609 में टेलिस्कोप के बारे में पता चला और तब उन्होंने खुद का टेलिस्कोप बनाया। बाद में गैलिलियो ने उस पर बहुत ज्यादा सुधार भी किया। गैलिलियो ने टेलिस्कोप का आविष्कार तो नहीं किया लेकिन वह पहले इंसान थे जिसने ऑप्टिकल इंस्ट्रूमेंट का इस्तेमाल करके यूनिवर्स को स्टडी किया था।

 

 सोलर सिस्टम के ऊपर गैलिलियो की थ्योरी और उम्रकैद की सजा 

गैलिलियो ने बोला था कि हमारे सोलर सिस्टम के मिडल में सूरज है और सारे ग्रह सूरज का चक्कर लगाते हैं। यह बात पहले निकोलस कोपरनिकस ने भी कही थी लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं मानी। इसी बात को जब गैलिलियो ने बताया तब उस समय के एस्ट्रोनॉमर्स इस बात को गलत बताया जिसके चलते 1615 में इस बात को रोमन कैथोलिक चर्च न जाँच की और गैलिलियो की इस थ्योरी को गलत बताया गया क्यों की यह थ्योरी  बाइबिल की बताई गई कुछ बातों का खंडन करते थे जिसके चलते गैलिलियो को दोषी माना गया और उनको मजबूर किया गया कि वह सबको यह बताये कि उनकी यह थ्योरी गलत है इसलिए उनको उम्रकैद के सजा भी दी गई। इसके चलते 1638 में गैलिलियो की आँखों की रौशनी पूरी तरह से चली गई। 4 साल बाद, 8 जनुअरी 1642 में इस महान फिजिसिस्ट का देहांत हो गया।

 

गैलिलियो  गैलिली उस समय एक महान फिजिसिस्ट थे। इस समय से पहले विज्ञानं एक आदिम समय में था जिन्होंने दुनिया को गणित के सूत्रों से जोड़के आधुनिक विज्ञान की निवृ की थी इसलिए उनको फादर ऑफ़ मॉडर्न फिजिक्स भी कहा जाता है जिन्होंने इस दुनिया को मॉडर्न साइंस के ऊपर बहुत सारे बुक्स भी दिए लेकिन इन बुक्स को कभी पब्लिश नहीं कर पाए।

 

गैलिलियो के मरने के बाद भी 350 सालों तक उनके ऊपर बैंड रहा। बाद में साल 1992 में कैथोलिक चर्च के पॉप जॉन पोल ने माना कि गैलिलियो  गैलिली की बात सही थी और चर्च ने उस समय गलती की थी।

 

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