एक सच्ची भूतिया घटना | Real Horror Story in Hindi

एक सच्ची भूतिया घटना | Real Horror Story in Hindi

 

एक सच्ची भूतिया घटना 

यमुनागर में स्तिथ एक गाँव है। वहां पर एक पिता और उसकी छोटी बेटी उसके बुआजी से मिलने गए थे। बुआजी ने उन्हें बहुत रोका, “अरे रुक जा भाई। छोटी बच्ची साथ में है। देखो कितनी साँझ हो गई है अब न मिलेगी कोई बस। यही रुक जा रात को।” पिता ने बुआजी से कहा, “नहीं दीदी हमें जाना ही होगा, सुबह मेरा काम बहुत जरुरी है। ऑफिस का काम बहुत बढ़ जाएगा।” छोटी बेटी बोली, “पापा मुझे बुआजी के पास ही रुकना है। प्लीज रुक जाइए न।” बुआजी ने कहा, “देख बच्ची भी जिद कर रही है और तुझे नहीं मालूम यहाँ इतना जंगल है कोई बस नहीं मिलेगी। माना कर कहना बड़ो का।” पिता बोला, “नहीं दीदी आप इन्ही बातों में हमारा समय ख़राब कर रहें हैं। मैं जल्दी से जाऊँगा टांगे वाला वहां छोड़ देगा  जहाँ बस रूकती है।” बुआजी ने कहा ,”जैसी तेरी मर्जी, ध्यान रखना अपना।”

 

फिर छोटी बच्ची ने अपने पिता की ऊँगली पकड़ी और उनके साथ चल पड़ी। अभी वह लोग गाँव से बाहर ही आए कि थोड़ा मौसम ख़राब होने लगा। बच्ची बोली, “पापा ऐसा लग रहा है जैसे की बारिश होने वाली है।” पिता ने कहा, “हाँ लग तो रहा है। अब गाँव के बाहर आ गए है तो वापस तो नहीं लौट सकते। कुछ न कुछ इंतजाम हो ही जाएगा, तुम डरना मत।

 

दोनों गाँव के बाहर गए और देखा कि वहां टांगा रिक्शा कुछ भी नहीं था। पिता ने कहा , “अरे यहाँ तो कुछ भी नहीं है, लेकिन हमें बस अड्डे तक तो पहुंचना ही होगा। तुम घबराओगी तो नहीं, पैदल चलना होगा।” बच्ची बोली, “नहीं पापा मैं तो बहुत तेज चलती हूँ। दौड़-दौड़के चलेंगे और देखो मौसमभी काफी साफ होने लगा है।

 

दोनों चल पड़े। लेकिन रास्ता तो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था। बच्ची बोली, “पापा चाँद तो छुप गया और काफी अँधेरा भी हो गया है। हमारे पास तो टॉर्च भी नहीं है।” पिता बोला, “सही कह रही हो, कोई टॉर्च नहीं है हमारे पास। समझमे नहीं आ रहा है कि हम जा कहाँ रहे है पर सड़क तो सीधी है। दोनों साइड तो गन्ने के खेत है। चलो शुक्र है कोई गड्ढे वगैरा नहीं है। अच्छा ऐसा करो तुम कुछ गाना गुनगुनाओ या कोई कहानी।” बच्ची बोली ,”भुत वाली कहानी?” पिता बोला ,”अरे नहीं, डराओगी क्या? अभी हम दोनों एकेले है सड़क पर तुम ही डर जाओगी।”

एक सच्ची भूतिया घटना | Real Horror Story in Hindi

अचानक फिरसे मौसम ख़राब हो गया और दोनों हाथ पकड़कर सड़क पर चल ही रहे थे। चलते-चलते उन्हें अचानक ऐसा लगा कि खेतो के बीच में से कोई व्यक्ति साइकिल पर घंटी बजाता हुआ सड़क पर आया है। फिर उन्हें एक आदमी देखा और कहा, “अरे भैया रुको।” आदमी ने कहा, “कौन है भाई?” पिता ने कहा, “अरे भैया हमें बस स्टॉप तक जाना है, यह रास्ता सही लिया है न हमने?” आदमी बोला, “हाँ हाँ बिलकुल सही लिया है। लेकिन भैया छोटी बच्ची साथ में आपको डर नहीं लग रहा है?” पिता ने कहा, “नहीं नहीं डरने वाली क्या बात है मैं तो कई बार आ जा चूका हूँ।” आदमी बोला, “देखो भैया दिन की बात कुछ और होती है और रात की बात कुछ। मेरा कहा मानो तो तुम अब आगे सफर न करो। आगे मुझे लगता है कि काफी खुदा हुआ है गड्ढा।” पिता बोला, “गहरा गड्ढा! लेकिन जब हम आए थे तब तो हमें कुछ ऐसा महसूस नहीं हुआ।” आदमी बोला, “तो तुम पैदल आए थे? अरे बस से ही तो आए होंगे। पिता ने जवाब दिया, “हाँ हाँ बस से ही आए थे।” आदमी बोला, “तो भैया बस इस रास्ते से नहीं गई कुछ पता भी है तुम्हे? बहुत दिन पहले यहाँ पर एक भारी एक्सीडेंट हुआ था, बहुत लोगों की जान चली गई थी। और यहाँ पर कीचड़ ही कीचड़ था। पर जब भी इस सड़क को बनाने चलते हैं वहां कुछ न कुछ हो जाता है, एक न एक की मृत्यु हो जाती है। लोगों का कहना तो यहाँ तक है कि जो भी उस सड़क से निकलता है उसकी मृत्यु तो निश्चिंत है।”

उस आदमी की बातें सुनकर पिता डर गया और बोला, “यह आप क्या कह रहे हैं, एक तो अँधेरा ऊपर से रात और आप ऐसी बातें कर रहे हैं।” आदमी ने उन्हें सलाह दिया, “देखो सुबह हो जाएगी तो तुम आराम से चले जाना। यह गन्ने को जो खेत देख रहे हैं यह मेरे ही है। पास में ही गाँव है चलो मेरे साथ।”

एक सच्ची भूतिया घटना | Real Horror Story in Hindi

दोनों उसके साथ उस आदमी के पीछे-पीछे चल पड़े। उसने उन दोनों को झोपड़े में बैठाया और पिने के लिए पानी दिया।” आदमी ने उनसे कहा, “आप दोनों यहाँ आराम से सो जाइए। डरने वाली कोई बात नहीं है, मैं यहाँ बाहर ही हूँ।” बच्ची का पिता बच्ची को लेकर आराम से बैठ गया और उसे पानी पिने को दिया। थोड़ी देर बाद बच्ची सो गई।

 

जब दोनों की आंख खुली तो झोपडी के अंदर तो कोई था ही नहीं। वह आदमी तो उन्हें बैठाकर खुद चला गया था। उन्होंने झोपडी का टुटा फूटा सा दरवाजा खोला, बाहर आए तो देखा सुबह हो चुकी थी। सूरज काफी चढ़ आया था। उन्होंने बाहर देखा न ही कोई साइकिल थी और न ही कोई व्यक्ति। पिता ने सोचा कि खेत वाला आदमी था शायद सुबह ही चला गया होगा। दोनों बड़े ही आराम से गन्ने के खेत से पक्की सड़क पर आ गए और उन्हें बहुत सारे लोग रास्ते में मिलने शुरू हो गए।

 

उन्हें देखकर एक व्यक्ति बोला ,”अरे आप लोग इधर? मैंने आपको उस झोपडी से निकलते हुए देखा अभी। ” पिता ने कहा, “हाँ कल रात रास्ता थोड़ा सुनसान था तो एक व्यक्ति हमें कल उस झोपडी में लेकर गया। वह बोल रहा था कि उसके खेत हैं यहाँ पर।” वह व्यक्ति बोला, “क्या? क्या बोला आपने जरा एक बार फिर बोलना।” पिता ने कहा, “जी मैं बोल रहा था कि वह व्यक्ति कह रहा था कि गन्ने के खेत है यहाँ उसके।” व्यक्ति ने पूछा, “कैसा दीखता था? गुनगुनाता था भी क्या गाना?” और साइकिल भी थी क्या उसके पास?” पिता बोला, “हाँ हाँ बिलकुल सही। और वह बता भी रहे थे कि यहाँ  एक्सीडेंट भी हुआ था। और यहाँ की सड़क में गड्ढे भी हैं ” व्यक्ति बोला, “हाँ अब नहीं, कुछ साल पहले। अब यहाँ पूरी सड़क बन चुकी है। लेकिन उन्होंने कुछ गलत नहीं कहा था।”

 

पिता ने उस व्यक्ति से कहा कि वह उन्हें उससे मिलवा दे ताकि वह उनका सुक्रिया कर सके। व्यक्ति ने कहा, “नहीं आप उनसे नहीं मिल सकते, क्यूंकि वह थे ही नहीं।” पिता ने कहा, “मैं आपका मतलब नहीं समझा। आप कहना क्या चाहते हैं?” व्यक्ति बोला, “आप अकेले नहीं है जिनकी उसने मदद की है, यहाँ पर जो भी व्यक्ति रास्ता भटक जाता है या परेशान होता है वह उस झोपडी तक ले जाता है। यह झोपडी कोई नहीं तोड़ता, न कोई हटाता। इस झोपडी को कई बार हटाने की कोशिश की  लेकिन यह झोपडी आज भी है और सब लोग इस झोपडी में आकर नमस्कार करते हैं। यह जानते हुए भी कि वह भुत…भुत नहीं कह सकते हम उसको हम उसे फरिस्ता बोलते हैं क्यूंकि वह सबकी मदद जो करता है। देखिए आपके पास छोटी बच्ची थी उसे ठराया और आपको सही रास्ता भी बताया।”

यह सब सुन पिता को भी आश्चर्य हुआ और फिर दोनों बस स्टॉप तक आ गए। पुरे रास्ते वह उन्ही की बात सोचते रहे कि कुछ लोग जिन्दा होते हुए भी किसी की मदद नहीं करते लेकिन कुछ लोग अपने शरीर को त्यागने के बाद भी लोगों की मदद करने से पीछे नहीं हटते।

 

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