चाणक्य नीतियां

शत्रु को हराने के लिए 8 चाणक्य नीतियां – Chanakya Niti For Enemy in Hindi 

 चाणक्य नीतियां  Chanakya Niti Lessons For a Successful Life

दोस्तों आचार्य चाणक्य एक ऐसे व्यक्ति थे  जिन्हे सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के सबसे चतुर, चालाक और बुद्धिमान लोगों में शुमार किया जाता है। क्यों की युद्ध को जितने,  जीवन में सफलता हासिल करने और अपने शत्रु यानि दुश्मन को हराने के लिए जिस तरह की कूटनीतियां चाणक्य बनाते थे वैसी नीतियां और किसी इंसान ने कभी नहीं बनाई। यही बजह है कि उनके द्वारा लगभग 2400 साल पहले बनाई गई उन नीतियों को आज भी न जाने कितने लोग फॉलो करते हैं। और आज के इस लेख में भी हम आपसे चाणक्य द्वारा बताई गई कुछ ऐसी नीतियां शेयर करने वाले हैं जिनका इस्तेमाल करके आप अपने किसी भी दुश्मन को बड़े ही आसानी से हरा सकते हैं। तो चलिए जान लेते हैं वह 8 चाणक्य नीतियां क्या है।

 

शत्रु को हराने के लिए 8 चाणक्य नीतियां – Chanakya Niti For Enemy in Hindi 

अपने गुस्से को हमेशा काबू में रखो –

दोस्तों यह बात हमें स्कूल में भी सिखाई जाती है कि हमें अपने गुस्से को हमेशा ही काबू में रखना चाहिए। क्यों की गुस्सा आने पर इंसान कि शक्ति और अक्लमंदी आधी हो जाती है और गुस्से में इंसान कुछ ऐसी बड़ी गलतियां कर बैठता है जिसके लिए उसे बाद में पछताना पड़ता है। चाणक्य खुद कहते हैं कि दुश्मन का सबसे घातक और खतरनाक हतियार उकसाना होता है और हमारा दुश्मन हमेशा हमें उकसाने की कोशिश करता रहता है ताकि हम गुस्से में आकर कुछ ऐसा कदम उठा ले जिसका की वह फायदा उठा सके। शत्रु की इस चाल से बचने के लिए चाणक्य हमें यह सलाह देते हैं कि जब तुम्हारा दुश्मन तुम्हे उकसाने की कोशिश करे तब अपने गुस्से को अपने अंदर ऐसे समेट लेना चाहिए जैसे कछुआ अपने शरीर को शेल के अंदर समेट लेता है। साथ ही दुश्मन के उकसाने पर उसे तुरंत कोई उत्तर नहीं देना चाहिए बल्कि इसकी जगह सब्र से काम लेते हुए सही वक्त आने पर अपनी पूरी तैयारी के साथ दुश्मन पर वॉर करना चाहिए।

लोगों के लिए बहरे बन जाओ – 

चाणक्य ने कहा है कि जो लोग आपके काम की सराहना करते हैं, आपके मनोबल को बढ़ाते हैं, आपको अच्छी सलाह देते हैं और आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं उन लोगों की बातों और उनके सभी एडवाइज़र को ध्यान से सुनना और उन पर अमल करना चाहिए। लेकिन जो लोग आपका बुरा चाहते हैं, आपके बारे में बुरी बातें करते हैं, आपके मनोबल को तोड़ते हैं और आपके दिमाग में नेगेटिव बातें डालते हैं ऐसे लोगों के लिए आपको बहरा बन जाना चाहिए। यानि की जब कोई इंसान आपसे यह कहे कि तुम यह काम नहीं कर पाओगे तो इसके इस बात को एक कान से सुनकर दूसरे कान से बाहर निकाल देना चाहिए। उन्हें ऐसा दिखाना चाहिए कि उनकी बातों का आपके उपर कोई फर्क पड़ ही नहीं रहा है। दरहसल जिस इंसान को अपनी खुद की काबिलियत पर शक होता है वही दूसरे लोगों से इस तरह की बातें कहता है कि तुमसे यह नहीं हो पाएगा और तुम यह कभी कर ही नहीं पाओगे। हर इंसान के लाइफ में बुरा चाहने वाले कुछ लोग जरूर होते हैं और आपको हर मौके पर वह डिमोटिवेट करने की कोशिश करते हैं।  अब आप उनकी बातों को सुनकर हार मान लेते हो या फिर उनकी बातों को नजरअंदाज करते हुए कामियाबी की बुलंदियों पर पहुंचकर उन्हें मुँह तोड़ जवाब देते हो यह दोनों ही चीजे सिर्फ आपके ऊपर ही निर्भर करती है।

दुष्ट व्यक्ति पर कभी भी भरोसा मत करो –

दोस्तों चाणक्य कहते हैं कि दुष्ट यानि बुरे व्यक्ति का स्वभाव कभी भी नहीं बदलता है, फिर चाहे आप उसके साथ कितना अच्छा व्यवहार ही क्यों न कर ले। लेकिन दुष्ट हमेशा ही दुष्ट रहता है। वह कहते हैं कि दुष्ट व्यक्ति से ज्यादा जहरीला इस दुनिया में और कोई नहीं होता है। क्यों की सांप का जहर उसके दांतो में होता है और बिच्छू का जहर उसके पुंछ पर। लेकिन दुष्ट इंसान के हर एक अंग में ही जहर भरा होता है। इसके लिए दुष्ट पर भरोसा करना एक बहुत बड़ी भूल मानी जाती है। असलमे दुष्ट इंसान कभी भी किसी का दोस्त हो ही नहीं सकता इसलिए चाणक्य दुष्ट लोगों के साथ ठीक वैसा ही बर्ताव करने को कहते हैं जैसा की एक जहरीले सांप के साथ किया जाता है। यानि की जिस तरह से जहरीले सांप के फन को कुचल दिया जाता है ठीक वैसा ही दुष्ट लोगों के साथ भी किया जाना चाहिए।

अगर हाथ में जहर फैल जाए तो उसे काटकर फेंक दो – 

चाणक्य का कहना है कि अगर हाथ में जहर फैल जाए तो उसको काट देना ही बेहतर होता है। क्यों की अगर उस जहरीले हाथ को न काटा गया तो उसका जहर पुरे शरीर में फैल जाएगा। जिससे न सिर्फ शरीर के दूसरे हिस्सों का नुकसान होगा बल्कि इसकी बजह से उस इंसान की मौत भी हो सकती है। असलमे चाणक्य यह कहना चाहते हैं कि ऐसा इंसान जो आपके बहुत ज्यादा करीबी है, उसके बारे में आपको यह पता चले कि वह अंदर ही अंदर आपका बुरा चाहता है तो फिर उस इंसान से हमें तुरंत ही दुरी बना लेनी चाहिए। क्यों की यही वह दुश्मन होते हैं जो कि आपको सबसे गहरा घाव पहुंचाता है। यह दुश्मन आपका कोई भाई, कोई दोस्त, रिश्तेदार और यहाँ तक की आपकी पत्नी भी हो सकती है। दरहसल ऐसे लोग ऊपर से तो यह दिखाते हैं कि वह आपके सगे हैं लेकिन अंदर ही अंदर वह आपसे बेइंतेहा नफरत करते हैं और इससे पहले कि वह आपको इस नफरत की आग में झुलसा दे, आपको ऐसे लोगों को खुद से दूर कर देना चाहिए।

दुश्मन को कभी भी घायल करके मत छोड़ो –

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि रोग, सांप और शत्रु इन तीनों को कभी भी घायल करके नहीं छोड़ना चाहिए। क्यों की रोग यानि बीमारी का अगर पूरा इलाज नहीं किया गया तो फिर वह किसी भी समय दोबारा उबर सकती है। सांप को अगर अधमरा करके छोड़ दिया जाए तो वह घायल होकर पहले से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है। और ठीक इसी तरह शत्रु यानि दुश्मन को घायल करके छोड़ दिया जाए तो फिर वह अपने इस हार की बजह से बदले की आग में जलता रहता है और फिर वही दुश्मन मौका मिलने पर दो गुणी ताकत से हमला कर देता है। इसलिए दुश्मन पर हमेशा इस तरह से वॉर करना चाहिए की वह दोबारा कभी भी उठ न सके।

अपने दुश्मनों से कभी भी नफरत मत करे – 

दोस्तों चाणक्य का कहना है कि आपको अपने दुश्मन से कभी भी नफरत नहीं करना चाहिए। क्यों की जब कोई इंसान किसी से नफरत करता है तो वह उसके बारे में अपने सोचने समझने की क्षमता को खो बैठता है और ऐसे स्तिथि में उसे सिर्फ अपने दुश्मन की कमजोरियां नजर आती है जबकि ताकत के बारे में उसे कोई भी ख्याल नहीं रहता। इसलिए चाणक्य कहते हैं कि अपने दुश्मन को हमेशा एक दोस्त के नजर से देखना चाहिए और उसकी हर एक बात की पूरी-पूरी खबर रखनी चाहिए ताकि आप उसको हर कोने से घिर कर उस पर हमला कर सके और आपके वॉर करने पर उसको कहीं से भी बच निकलने का कोई रास्ता न मिले। क्यों की इस तरह जब दुश्मन पर वॉर किया जाता है तो जितने के चांसेस बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।

बल की जगह बुद्धि का इस्तेमाल करो –

दोस्तों आचार्य चाणक्य कहते हैं की अपने दुश्मन पर पहला वॉर कभी भी हतियार से नहीं करना चाहिए क्यों की इसकी जगह पहले अपनी अक्ल का इस्तेमाल करके दुश्मन को अपने जाल और कूटनीतियों में फसाना चाहिए और अपने नीतियों के दम पर दुश्मन को जितना ज्यादा हो सके उतना कमजोर करना चाहिए। दुश्मन को कमजोर करने का सबसे अच्छा तरीका यही होता है कि उसको उन  लोगों से दूर कर दिया जाए जो कि उसकी सबसे बड़ी ताकत है। और जब आपको लगे कि आपका दुश्मन अब अकेला होकर कमजोर पड़ चूका है तब उस पर पूरी ताकत के साथ वॉर करना चाहिए। क्यों की ऐसी स्तिथि में आपका एक वॉर आपके दुश्मन को हमेशा के लिए खत्म कर देगा।

जो बोलना है हमेशा मुँह पर बोलो – 

दोस्तों हर एक इंसान के लिए यह जरुरी होता है कि वह हमेशा सच बोले और उसे जिस किसी को भी जो कहना है वह सीधा उसके मुँह पर कहे। ऐसा कभी नहीं होना चाहिए कि आपको किसी से कुछ कहना है और इसके लिए आप किसी और का सहारा लो। दोस्तों अक्सर यह देखा जाता है कि जब कोई इंसान किसी दूसरे व्यक्ति की बुराइयों और कमजोरियों के बारे में किसी तीसरे इंसान से बात करता है तो फिर ऐसा करके वह बिना किसी बजह के लोगों को अपना दुश्मन बना लेता है। क्यों की जब आप किसी व्यक्ति से किसी दूसरे इंसान की बुराइयों और कमजोरियों के बारे में बातें करते हो और किसी तरह से यह बात उस इंसान को पता चल जाती है की आप पीठ पीछे उसकी बुराई कर रहे हो तो वह आपसे नफरत करने लगता है। और इस तरह से न चाहते हुए भी आप अपने लिए एक नया दुश्मन बना लेते हैं। इसलिए अगर आपको लगता है कि कोई इंसान कुछ गलत कर रहा है या फिर किसी इंसान में कोई कमी है तो फिर आपको यह बात किसी और से कहने की बजाई उस इंसान के मुँह पर साफ-साफ बोल देना चाहिए।

 

तो दोस्तों यह थे 8 ऐसे चाणक्य नीतियां जिनको अपनाने के बाद आपके शत्रु आपसे कभी भी नहीं जीत पाएंगे। उम्मीद करते हैं आपको यह लेख शत्रु को हराने के लिए 8 चाणक्य नीतियां – Chanakya Niti For Enemy in Hindi  जरूर पंसद आई होगी और अगर पसंद आए तो शेयर भी जरूर करें और कमेंट के माध्यम से अपना विचार भी हमसे जरूर शेयर करे।

 

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