बुराई की गठरी

बुराई की गठरी

बुराई की गठरी  Burai ki Gathri Kahani in Hindi 

 

बुराई की गठरी

संसार को बनाने वाले विधाता ने एक बार आदमी को अपने पास बुलाकर पूछा, “तुम की चाहते हो?” आदमी ने कहा, “मैं उन्नति चाहता हूँ, सुख-शांति चाहता हूँ और चाहता हूँ कि सब लोग मेरी प्रशंसा करे।”

 

विधाता ने आदमी के सामने दो गठरियां रख दी। वह बोले, “इन गठरियों को ले जाओ। इनमे से एक गठरी में तुम्हारी पडोसी की बुराइयां भरी है, उसे पीठ पर लाद लो। उसे हमेशा बंद रखना। न तुम देखना न दुसरो को दिखाना। दूसरी गठरी में तुम्हारी बुराइयां भरी है, उसे सामने लटका लो और बार-बार खोलकर देखा करो।”

 

आदमी ने गठरियां तो उठा ली लेकिन उससे एक गलती हो गई। उसने अपनी बुराई की गठरी को पीठ पर लाद लिया और उसका मुँह कसकर बंद कर दिया। और अपने पड़ोसी के बुराइयों से भरी गठरी उसने सामने लटका लिए। उसका मुँह खोलकर वह उसे देखता और दुसरो को भी दिखाता। इससे आदमी ने विधाता से जो वरदान मांगे थे वे भी उलटे हो गए।

 

इस भूल के स्वरुप वह अवनति करने लगा, उसे दुःख और अशांति मिलने लगी, सब लोग उसे बुरा बताने लगे। आदमी उसकी भूल सुधार ले तो उसकी उन्नति होगी, उसे सुख-शांति मिलेगी, जगत में प्रशंसा होगी।

 

हमें भी यह कार्य करना है, अपने पडोसी और परिचितों के दोष देखना बंद कर दे। अपने दोषो पर सदा दृष्टि बनाए रखे।

 

तो दोस्तों हमें भी ध्यान रखना है अपने बुराई की गठरी हमेशा सामने रखनी है ताकि हम अपने बुराइयों को सुधार सके। और वही गुणों की गठरी को पीछे रखना है ताकि प्रशंसा में आकर हम अहम् में न आ जाए। हम सभी में गुण देखे क्यों की सभी में ईश्वर का ही नूर बसता है।

 

आपको यह छोटी सी कहानी बुराई की गठरी कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताए और अगर अच्छा लगे तो अपने दोस्तों को भी शेयर कीजिए।

 

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