लक्ष्मी अग्रवाल की पूरी कहानी, Laxmi Agarwal Real Story in Hindi

क्या हुआ लक्ष्मी अग्रवाल के साथ जानिए पूरी कहानी

आज के इस लेख में हम आपको लक्ष्मी अग्रवाल के साथ घटी असली घटना के बारे में बताएंगे जिनके लाइफ से जुड़ी एक मूवी छपाक (Chhapaak) बनाई गई है, जो कि एक एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल के जिंदगी पर आधारित है। इस मूवी में दीपिका पादुकोण लक्ष्मी का किरदार निभा रही है जिसे मूवी में मालती नाम दिया गया है। तो चलिए दोस्तों शुरू जानते है लक्ष्मी अग्रवाल की पूरी कहानी।

 

लक्ष्मी अग्रवाल की पूरी कहानी, Laxmi Agarwal Real Story in Hindi, Chhappak: Truth Behind The Movie 

 

लक्ष्मी अग्रवाल प्रारंभिक जीवन और एसिड हमला 

बात है साल 2005 की, लक्ष्मी तब सिर्फ 15 साल की थी और 7th स्टैंडर्ड में पड़ती थी। 32 वर्षीय नईम खान उनके घर के पास ही रहा करता था और क्यों की यह दोनों पडोसी थे तो लक्ष्मी की नईम की बहनों के साथ अच्छी दोस्ती भी थी।

एक दिन नईम ने उसे प्रोपोज़ किया पर लक्ष्मी ने उसे साफ इंकार कर दिया। लक्ष्मी इस बात से इतनी परेशान थी कि जिस लड़के को आज तक भइया कहकर बुलाता था उसने आखिर उसे प्रोपोज़ क्यों किया और इसी कारण उसी दिन से लक्ष्मी ने नईम से पूरी तरह बात करना छोड़ दिया।

लक्ष्मी के रिजेक्शन और बात चित बंद करने से नईम इतना ज्यादा गुस्सा था कि उसने लक्ष्मी को करीबन 10 महीनो तक मेंटली टार्चर किया। रात-दिन उसे फॉलो करता, कभी स्कूल से घर के रास्ते में रोककर बत्तमीजी करता, तो कभी उस पर हाथ उठा दिया करता था।

लक्ष्मी बचपन से एक सिंगर बनना चाहती थी पर इसी कारण उसे डर था कि अगर उसने नईम के बारे में अपने माता-पिता से शिकायत की तो वह उसका स्कूल जाना बंद न कर दे, नईम के कारण कहीं उसे अपने सपनो से दूर न कर दिया जाये।

कुछ समय बाद 19 अप्रैल 2005 को नईम ने लक्ष्मी को मैसेज किया कि वह उससे प्यार करता है और उससे शादी करना चाहता है। लक्ष्मी ने कुछ भी रिप्लाई नहीं किया तो उसने एक और मैसेज किया कि अभी इस वक्त जवाब दो। लक्ष्मी ने इस बार भी कोई रिप्लाई नहीं किया।

दो दिन बाद यानि 22 अप्रैल को सुबह करीबन 10:45 am को लक्ष्मी अपने घर से निकली तो नईम ने अपने छोटे भाई की गर्लफ्रेंड के साथ उसका पीछा करना शुरू किया। इससे पहले कि लक्ष्मी कुछ समझ पाती और कर पाती, उस लड़की ने लक्ष्मी को धक्का दिया और दोनों ने मिलकर बियर बोतल से गिलास में एसिड निकाला और उसके चेहरे पर फेंक दिया।

लक्ष्मी अचानक बेहोश हो गई और जब उसे होश आया तो वह सड़क पर पड़ी तड़प रही थी। वहां खड़े लोगों में से किसी ने भी उसकी मदद नहीं की। वह जैसे तैसे उठने की कोशिश करती फिर गिर जाती।  ऐसे में अरुण सिंह नाम के एक शख्स ने उसे देखा और जल्दी से जाकर उस पर एक बोतल पानी डाल दिया।

पानी डालते ही उसके चेहरे और हाथों से मांस पिघलकर निचे गिरने लगा। उसे तुरंत हॉस्पिटल पहुंचाया गया और उसके माता-पिता को खबर की गई।

लक्ष्मी की हालत इतनी बिगड़ चुकी थी कि हॉस्पिटल पहुंचकर लक्ष्मी के ऊपर करीबन 20 बाल्टी पानी डाला गया। हॉस्पिटल में अपने पापा को देखकर लक्ष्मी ने उन्हें गले लगा लिया। जो एसिड नईम ने लक्ष्मी के चहरे पर डाला था वह इतना स्ट्रांग था कि लक्ष्मी के गले लगने भर से उसके पिता का शर्ट जल चूका था।

बैक टू बैक दो सर्जेरीस के बाद धीरे-धीरे लक्ष्मी ने रिकवर करना शुरू किया। फाइनली हादसे के चार दिन बाद नईम को गिरफ्तार किया गया पर एक ही महीने के बाद वह बेल पर बाहर भी आ गया।

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जेल से बाहर आने के बाद जो पहली चीज नईम ने की थी वह थी शादी। दूसरी तरफ घर वापस आने के बाद अभी लक्ष्मी का स्ट्रगल शुरू ही हुआ था। उसके आसपास के लोगों ने तो यह भी कहना शुरू कर दिया था कि लड़की है एसिड डालना ही था तो कहीं और डाल देता चेहरा ख़राब हो गया। इतनी दुश्मनी थी तो गोली ही मार देता एसिड क्यों डाला, अब शादी कौन करेगा लक्ष्मी से।

इधर लक्ष्मी पूरी तरह से टूट चुकी थी। इस पुरे दौरान उसे लक्ष्मी से कई बार सुसाइड थॉट्स आए पर उसने हिम्मत नहीं हारी और इस बार उसने अपनी पिता से बात की। उसके  पिता ने उसे बस एक ही बात कही, “nothing is impossible” आज जो चेहरा उसे इतना परेशान कर रहा है कल उसी चेहरे से लक्ष्मी को भी प्यार हो जाएगा।

अपने पापा की यह बात सुनकर लक्ष्मी ने सब कुछ भुलाकर एक नई जिंदगी शुरू की।

पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशनल इन सुप्रीम कोर्ट, (Public Interest Litigation) 

साल 2006 में वह एक लड़के आलोक द्वारा शुरू किए गए कैंप पर स्टॉक एसिड अटैक का हिस्सा बनी। इतना ही नहीं, इसी साल यानि की साल 2006 में उन्होंने एसिड बैन के लिए एक PIL (Public Interest Litigation) भी फाइल की जिसका फैसला सुप्रीम कोर्ट ने साल 2013 में सुनाया।

इस पुरे दौरान लक्ष्मी के पर्सनल लाइफ में काफी उतार चढ़ाव किया है। टीवी के कारण उसके भाई की मृत्यु हो गई और साथ ही हार्ट अटैक से उसके पिता भी गुजर गए।

उसके पिता के गुजरने के बाद घर चलाने के लिए उसने कॉल सेंटर से लेकर टेलरिंग तक का काम करना चाहा पर उसके चहरे के कारण उसे सिर्फ ना ही सुनने मिला। लेकिन लक्ष्मी ने हार नहीं मानी और अपने काम के साथ कैंपेन को भी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया।

फाइनली 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने यह आर्डर पास किया बिना लाइसेंस के कोई भी एसिड नहीं बेच सकता और बिना आईडी प्रूफ के कोई भी एसिड खरीद नहीं सकता।

लक्ष्मी के इस कैंपेन के कारण लोगों में काफी अवेरनेस तो बड़ी ही साथ ही लक्ष्मी जैसी कई और लड़कियों को हिम्मत के साथ मदद भी मिली। उसके इस कैंपेन को लोगों ने नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर सराह।

व्यक्तिगत जीवन 

लक्ष्मी अग्रवाल सामाजिक कार्यकर्ता आलोक दीक्षित के साथ रिश्ते में थे। रिश्ते में रहने के बावजूद भी लक्ष्मी ने आलोक के साथ शादी नहीं की थी और सिर्फ रिलेशनशिप में ही रहना का फैसला किया था। उन्होंने कहा था, “हमने मरने तक का साथ रहने का फैसला किया है। लेकिन  न करके समाज को चुनौती दे रहें हैं। हम नहीं चाहते कि लोग हमारे शादी में आए और मेरे लुक पर कमेंट करे। दुल्हन का लुक लोगों के लिए महत्वपूर्ण होता है इसलिए हमने शादी न करने का फैसला किया है।” उनके परिवारों ने भी उनके इस रिश्ते को स्वीकार कर लिया था और वह उनके फैसले से भी सहमत थे।

अवार्ड्स 

लक्ष्मी को अपने बहादुरी के लिए कई नेशनल अवार्ड्स मिले और साथ ही साल 2014 में उन्हें खुद मिशेल ओबामा की तरफ से इंटरनेशनल वुमन और करेज अवार्ड से पुरस्कृत किया गया।

तो यह थी लक्ष्मी अग्रवाल की पूरी पूरी कहानी जिसके ऊपर छपाक मूवी बनाई गई है। उम्मीद करते है आपको लक्ष्मी अग्रवाल से जुड़ी यह लेख अच्छी लगी होगी। इस पुरे लेख को पढ़ने के लिए धन्यवाद।

 

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