15 अगस्त क्यों मनाया जाता है?

Independence Day 2021: 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) क्यों मनाया जाता है? | इसको मनाने के पीछे की पूरी कहानी क्या है?

Independence Day 2021: 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) क्यों मनाया जाता है?

आज इस लेख में हम आपको 15 अगस्त के बारे में बताएँगे, जिसे हिंदी में स्वतंत्रता दिवस भी कहा जाता है और इंग्लिश में Independence Day भी बोला जाता है। 15 अगस्त यानि स्वतंत्रता दिवस से जुड़ी हर एक छोटी बड़ी जानकारी हम इस लेख में शेयर करने वाले हैं जैसे की 15 अगस्त क्यों मनाया जाता है? 15 अगस्त को क्या हुआ था? इस दिन को मनाने का क्या महत्व है? इसके पीछे का उद्देश्य क्या है? यह सारी बातें आज हम इस लेख में बताएँगे।

 

क्यों मनाया जाता है 15 अगस्त? – Why Independence Day Celebrated in Hindi 2021 

भारत में हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन ब्रिटिश शासन से भारत को आज़ादी मिली थी। 15 अगस्त के दिन को सम्पूर्ण भारत में राष्ट्रीय राजपत्रित अवकाश जिसे इंग्लिश में Gazetted Holiday बोला जाता है, इसके रूप में घोषित किया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में 15 अगस्त को ही क्यों स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है?  

दोस्तों भारत के उपमहाद्वीप के सीमा चौकी पर 17 वीं शताब्दी कुछ यूरोपियन व्यापारिओं द्वारा प्रवेश किया गया था और अंतः ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत को विशाल सैनिक शक्ति के कारण गुलाम बना लिया। 18 वीं शताब्दी तक भारत में अंग्रेजो ने अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया था।

देखा जाए तो 1897 में ही अंग्रेजो के खिलाफ भारत में स्वतंत्रता क्रांति की शुरुवात हो चुकी थी। इस विद्रोह को सिपाहियों का विद्रोह, 1897 का विद्रोह इत्यादि कहा जाता है। इस विद्रोह के द्वारा भारत को नियंत्रण मुक्त करने का एहसास ब्रिटिश राज को भारतीय स्वतंत्रता सेनाओं ने दिलाया था।

भारतीय राष्ट्र कांग्रेस अधिवेशन 1929 लाहौर में हुआ था, जहाँ पर भारत में पूर्णस्वराज की घोषणा की थी। 1930-1947 के बीच कई आंदोलन हुए जिनमे से एक है सविनय अवज्ञा आंदोलन जिसे गांधीजी ने 1930 में शुरू किया था।

2nd वर्ल्ड वॉर के बाद `1947 में ब्रिटिश सरकार आश्वस्त हो चुकी थी कि वह अब लंबे समय तक भारत को अपनी शक्ति नहीं दिखा सकेगी। भारत के स्वतंत्रता सेनानी लगातार अंग्रेजो को भारत छोड़ने पर विवश कर रहे थे और स्वतंत्रता की लड़ाई को डटकर लड़े। इसलिए भारत को मुक्त करने का फैसला आखिरकार अंग्रेजो ने ही लिया था।

दरहसल भारत के तत्कालीन वायसरॉय लॉर्ड लुईस माउंटबेटन को ब्रिरीश संसद ने 30 जून 1948 तक भारत में सत्ता स्थानांतरण (शासन कार्य) का दायित्व सौंपा था। सी. राजगोपालचारी के अनुसार अगर  माउंटबेटन ने 30 जून 1948 तक इंतजार किया होता तो उनके पास स्थांतरित करने के लिए कोई सत्ता नहीं बचती। इसलिए माउंटबेटन ने अगस्त 1947 में ही यह दायित्व पूरा कर दिया था।

ब्रिटिश हाउस ऑफ़ कॉमन्स में माउंटबेटन की भेजी गई सूचनाओं के आधार पर इंडियन इंडिपेंडेंस बिल 4 जुलाई 1947 को पेश किया गया था। इस बिल को ब्रिटिश संसद ने तुरंत पारित कर दिया और इसके अनुसार 15 अगस्त 1947 को भारत में ब्रिटिश राज समाप्त हुआ तय हुआ।

हालाँकि भारत के आज़ादी के बाद हिंदू-मुसलिम दंगो के कारण भारत और पाकिस्तान अलग होकर 2 स्वतंत्र उपनिवेश बने जिन्होने ब्रिटिश कामनवेल्थ के तहत रहना स्वीकार किया।

मोहम्मद अली जिन्ना पाकिस्तान के प्रथम गवर्नर जनरल बने जबकि पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रथम प्रधानमंत्री। दिल्ली जो की देश की राजधानी है। इस दिन इसमें समारो रखा गया जहां नेता, स्वतंत्रता सेनानियों इत्यादियों ने भाग लिया और आज़ादी का जश्न मनाया।

जब भारत आज़ाद हुआ था तब भारत की 500 से ज्यादा रियासतों का बल सभी नए दशो पर छोड़ा गया था। इन रियाशतो को भारत या पाकिस्तान में से किसी एक को चुनना था। कई रियासतें 15 अगस्त 1947 से पहले भारत या पाकिस्तान का हिस्सा बन गई और कई आज़ादी के बाद भी किसी भी देश में शामिल नहीं हुई। इस दिन भारत में पतंग उड़ाई जाती है और यह खेल स्वतंत्रता दिवस का प्रतिक है और दूसरा प्रतिक स्वतंत्रता दिवस का लालकिला है, जहाँ हर साल इस दिन भारत के प्रधानमंत्री तिरंगा फैराते हैं।

15 अगस्त को भारत को ब्रिटिश शासन से आज़ादी प्राप्त हुई थी जिसकी याद में स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। हर साल पुरे उत्साह के साथ यह दिन मनाया जाता है। ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि भारत के गणराज्य ने 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजो के शासन से अपनी स्वतंत्रता प्राप्त की। तब से 15 अगस्त को ब्रिटिश सरकार से आज़ादी मिलने के उपलक्ष में भारत में स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है।

भारत के लिए 15 अगस्त का दिन अपने पुनर्जन्म का दिन है और एक नई शुरुवात है। 15 अगस्त हमारे लिए बहुत ही गौरव की बात है। बेशक हम इस आज़ादी को नहीं लड़े लेकिन हम सभी ने यह किताबों में पड़ा है जो हमारे स्वतंत्रता सेनानी थे उनका हमारे ऊपर एक बहुत बड़ा ऐसान है। उन्होंने हमें एक गुलाम देश से एक आज़ाद देश दिलवाया, ब्रिटिश से आज़ादी दिलवाई। कई स्वतंत्रता सेनानी तो ऐसे थे जिन्होंने अपनी जान तक दे दी।

कुछ नाम जो भारतीय स्वतंत्रता के चहेते हैं जैसे की चन्द्रशेखर आजाद, सुभाषचंद्र बोस, भगत सिंह और कई ऐसे  सेनानी है जिन्होंने आज हमें इस दिन तक पहुंचाया है। हम एक आज़ाद देश में साँस ले रहे है। इनकी वदोलत ही हम ऐसे आज़ादी वाले दिन को मना रहे हैं, ऐसे आज़ाद वाले देश में रह रहें हैं।

 

15 अगस्त को ही भारत को क्यों आजादी मिली? 

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटिश सरकार जिन्होंने 200 वर्षो तक लगातार हमारे देश को गुलाम बनाकर रखा, वह पूरी तरह से कमजोर हो चुकी थी और वह अब किसी दूसरे देश में शासन करने के लिए असमर्थ थी। उसी वक्त हमारे देश भारत में भारत छोड़ो आंदोलन भी प्रचंड रूप से आगे बढ़ रहा था जिसे अंग्रेजो ने देखकर भारत को आजाद कर देना ही उचित समझा  आजादी की तारीख 16 जुलाई 1948 को तय हुई। पर पाकिस्तानी नेता जिन्ना ने अपना एक अलग देश का मांग रखा और इसी के कारण साम्प्रदायिकता फैलने लगा। ब्रिटिश सरकार ने यह सब देखकर भारत को 15 अगस्त 1947 को ही आजाद करना उचित समझा। कहा जाता है कि 15 अगस्त को ही अंग्रेजो ने जर्मनी के सिपाहियों पर विजय हासिल की थी इसी कारण 15 अगस्त का दिन अंग्रेजो के लिए उत्सुक दिन माना जाता है और इसी कारण अंग्रेजो ने भारत को 15 अगस्त 1947 को ही आजाद कर दिया।

 

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