बाबा शेख फरीद जी के उपदेश

बाबा शेख फरीद जी के 10 उपदेश

[बाबा शेख फरीद जी के उपदेश Baba Seikh Farid Advice in Hindi]

 

बाबा शेख फरीद जी के 10 उपदेश हिंदी में 

 

#1. किसी को भी बुरा मत कहो –

बाबा फरीद जी फरमाते हैं कि मैं किसी को भी बुरा नहीं कहता, अगर बुरा कहूं भी तो मुझे किसी पर बुरा नजर आता ही नहीं।

#2 . बुरे का भी भला करो –

बाबा फरीद जी बड़े ही प्यारे शिक्षा देते हैं कि जब हमारे साथ कोई बुरा करता है तो हम उसका बदला लेने की सोचते हैं, लेकिन बदला अकेला नहीं आता, साथ में क्रोध भी लेकर आता है जिसके कैमिकल हमारे तन को रोगी बना देते हैं।

#3. सादा जीवन जियें –

बाबा फरीद जी फरमाते हैं कि मैं उन गुरु प्रेमियों पर बलहारी चाहता हूँ जो एक माल्किय रजा में राजी हैं। अगर उन्हें रुखा सूखा भी मिलता है तो वह खा कर गुजारा करते हैं जैसे पंछी, जो जंगलो में रहते हैं। जो उन्हें मिलता है खाते हैं और रब का शुक्र करते हैं।

#4. सुबह सुबह उस मालक को याद करो –

बाबा फरीद जी फरमाते हैं कि हम सब उस रब को हर सुबह भूल जाते हैं। हमारे पास सौ बहाने हैं मगर परमात्मा हमें कभी भी नहीं भूलता। वह रोज वैसे ही सुबह लाता है जैसा कल था। अगर परमात्मा भी हमारे जैसा हो जाए कि वो हवा देना भूल जाये, वो सुबह करना भूल जाये तो हमारा क्या हाल होगा मगर वो हमारे जैसा नहीं है।

#5. भक्त कैसा हो? –

बाबा फरीद जी फरमाते हैं कि जो मनुष्य अक्लमंद भी होते हुए भी अनजान बना रहे अर्थात अक्ल से या ताकत से दुसरो पर कोई दवाव न डाले और जो जोर होते हुए भी कमजोरों की तरह जियें अर्थात किसी के ऊपर जोर, जवर्दस्ती ना करे और जब कुछ भी देने के लायक ना हो तब अपना आप अर्थात अपना हिस्सा भी बाँट दे, किसी ऐसे मनुष्य को ही भक्त कहा जा सकता है।

#6. परमात्मा से मिलना है तो किसी का भी दिल ना दुखाओ –

बाबा फरीद जी फरमाते हैं कि सभी के मन माणक हैं, मोती है इसलिए कभी किसी का दिल मत दुखाओ अगर तुम्हे परमात्मा से मिलने की इच्छा है तो किसी का भी दिल ना दुखाओ, ना घरवालों का ना किसी धर्म देश का। किसी के प्रति ना बुरी भावना रखो ना दिल तोड़ो।

#7. हम सब धरती पर क्या करने आए हैं उसे याद रखो –

बाबा शेख फरीद जी फरमाते हैं कि तुम क्या करने इस धरती पर आए थे इसका जवाब जब रब तुमसे मांगेगा तो तुम क्या जवाब दोगे? इसलिए केवल मौज मस्ती न करे बल्कि वो करे जो रब चाहता है और वो क्या चाहता है इसके लिए आपको सोचना पड़ेगा, जानना पड़ेगा कि मेरा यहाँ आने का क्या मतलब है जैसे सूर्य, चाँद। तारे सभी के होने का कोई न कोई कारण है असेही तुम्हारा भी यहाँ आने का कोई कारण है उसे खोजे।

#8. अपना मिशन पूरा करके जाएं –

बाबा फरीद जी फरमाते हैं कि मेरा यौवन जाने अगर मैं भरी जवानी में जाता हूँ या किसी भी उम्र में जाऊं तो मुझे कोई अफ़सोस नहीं होगा, अगर मेरा प्रेम परमात्मा के साथ बना हुआ है तो। क्यूंकि मैंने देखा है कि यहाँ बहुत से ऐसे हैं जो भरी जवानी में सुख चुके हैं यानि उनके मन में कोई तरंग नहीं, कोई परमात्मा या दुनिया के लिए प्रेम नहीं। ऐसी जवानी का क्या लाभ।

#9. जिसे ढूंढ रहे हो वो तो तेरे अंदर हैं –

बाबा फरीद जी फरमाते हैं कि तू इसे इधर-उधर कहाँ ढूंढ रहा है? क्यों जंगलो में जाकर काटों में जीवन व्यतीत कर रहा है? जिसको तुम ढूंढ रहे हो खोज रहे हो वो तो तेरे अंदर है। उसे कहीं और मत मत खोज बल्कि खुद में खोज तू वहीं मिलेगा।

 

#10. जहां लालच है वहां सच्चा प्यार नहीं हो सकता –

बाबा फरीद जी फरमाते हैं कि जहां लालच है वहां प्रेम कहाँ, क्यों की जहां लालच आ जाए वो प्रेम केवल झूठा प्रेम है। ऐसा ही प्रेम लोग रब के साथ भी करते हैं। कहने को तो कहते हैं कि मुझे उससे बहुत प्यार है मगर हर वक्त लालच में फंसकर कुछ न कुछ मांगते रहते हैं। और अगर कुछ ना मिले तो रब को बुरा भला भी कहते हैं। ये कैसा प्रेम है कि जब कुछ न मिला तो प्रेम टूट गया। सच्चा प्रेमी चीजों से प्रेम नहीं करता और बाबा फरीद जी फरमाते हैं कि लालच वाला प्यार कच्ची छत के जैसा होता है जो थोड़े से बर्षात से ही गिर जाता है। इसलिए प्रेम करो तो सच्चा करो।

 

तो यह थे बाबा शेख फरीद जी के 10 उपदेश। उम्मीद करते हैं आपको यह लेख बाबा शेख फरीद जी के 10 उपदेश पसंद आया होगा अगर पसंद आए तो शेयर जरूर करें सबके साथ और हमारे इस ब्लॉग को भी जरूर सब्सक्राइब करे लें।

 

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