सास और बहु | प्रेरणादायक कहानी | Inspirational Story in Hindi

सास और बहु | प्रेरणादायक कहानी | Inspirational Story in Hindi

आज मैं आपको सास और बहु की एक प्रेणादायक कहानी (Inspirational Story in Hindi) सुनाने वाली हूँ उम्मीद है आपको यह कहानी पसंद आएगी।

 

सास और बहु की कहानी 

Inspirational Story in Hindi

शादी को कुछ ही दिन हुआ था और आज कामवाली भी नहीं आई, इसलिए अदिति बर्तन धोने लगी। धोते-धोते उसके हाथ से कांच का कप निचे गिरकर टूट गया। कप टूटते ही वह डरने लगी कि उसकी सास अब बातें सुनाएगी। आवाज से सास दौड़ती आई और बोली, “बेटी क्या हुआ?” अदिति बोली, “माँ पता नहीं ध्यान रखते हुए भी कैसे मेरे हाथ से कप निचे गिर गया।”

 

सास बोली, “बेटी चिंता न कर, कप ही तो फूटा है तुम्हे चोट तो नहीं आई और भले ही इसके कितने टुकड़े ही न हो जाए पर मेरी बेटी के दिल के टुकड़े न हो। मेरी बहु से महंगा है क्या यह कप! और हाँ, तुझे अभी यह सब करने की क्या जरुरत है। मेहँदी भी नहीं उतरी अभी तेरे हाथो से। अभी तुम मेरे बेटे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताओ और एक दूसरे को समझो।”

 

सास ने अपनी बेटी को बुलाया और कहा, “ज्योति इधर आकर अपने भावी ख्याल रखो। अभी इस घर में नई नई आई है।” ज्योति ने कहा, “हाँ माँ।” सास फिर बहु से बोली, “शुरू में तुम मुझे अपनी माँ ही समझना। मुझे भी तुम्हारा दिल जितना है, सास बनकर नहीं माँ बनकर।”

 

देखते-देखते अदिति के आँखों में ख़ुशी के आंसू आ गए छलछला गई उसकी आंखे और सास के पैरों में गिरकर बोली, “मैंने एक माँ छोड़ी तो दूसरी नई माँ पाई बल्कि आप मेरे माँ से भी ज्यादा ममता मेरे लिए रखती हो। यदि घर में यह कप टूट जाता तो माँ भी दो बात कहे बिना नहींरहती।

 

 

रात को अदिति की नींद ही उड़ गई। रह रहकर शाम की घटना याद आ रही थी। सास के बारे में उसकी जो सोच थी उसकी विपरीत सास का व्यवहार पाया। उसका भी कसूर नहीं था ऐसा सोचना क्यूंकि उसने लोगों के मुँह से बुरी सास के बारे में ही सुना था। अदिति अपने अतीत में खो गई। उसे फिर याद आया कि कुछ साल पहले उसके लोते एक भाई की शादी हुई थी। महेंदी का रंग उतरने से पहले ही माँ ने भावी पर काम की पूरी जिम्मेदारी डाल दी और अपने ही नियम कानून के हिसाब से भावी को चलने के लिए मजबूर कर दिया। माँ ने भावी को घर में एडजस्ट होने में जरा भी वक्त नहीं दिया। भैया भावी को बाहर ले जाते तो माँ का मुँह फूल जाता और बोलते की हर समय भावी को साथ ले जाने की क्या जरुरत है। कभी  भी भावी को खुली हंसी हंसते नहीं दिखा। समय के साथ भावी ने सहना छोड़ दिया फिर और घर में हर रोज झगड़ा होने लगा।

 

एक  दिन भावी के हाथ से कांच का गिलास निचे गिरकर टूट गया। माँ चिल्लाने लगी कि कितनी कीमती गिलास टूट दिया।किसी न किसी बात पर वह भावी पर चिल्लाती। भाबी भी गुस्से से बोल देती थी कि माँ मैं तो बैठी-खाती हूँ, आप तो खड़ी खड़ी खाते है। जब से आई हूँ तब से रोज दो दो चार जाली कोटि न सुना दो तब तक आपको चैन ही नहीं मिलेगा, कभी मेरे माँ को तो कभी मेरे बाप को। हमेशा मेरी मायके वाली को कोशती रहती हो। असेही माँ और भावी एक दूसरे के साथ बहस करती रहती थी।

 

अदिति ने घर के अलावा और भी कई जगह पर सास बहु के झगड़े सुनते-सुनते वह डर गई थी इसलिए शादी से कतराने लगी मगर माँ बाप के कारन ही उसे शादी करनी पड़ी और अनजान भय को लेकर ससुराल आ गई। पर आज की घटना से उसकी सोच बदल गई की सब सास और बहु एक जैसी नहीं होती।

 

नींद न आने की बजह से उसने सोचा कि चलो थोड़ी देर माँ से बात कर लू। माँ ने इतनी रात को उसे फ़ोन करते देख कहा , “बेटी सब कुछ ठीक है न! कई तुम्हारे पति से या सास से झगड़ा तो नहीं हो गया।” अदिति बोली , “नहीं माँ ऐसा कुछ नहीं है। मालूम है माँ, आज मेरे साथ से कांच का गिलास निचे गिर गया तभी सास आ गई। मेर आगे बोलते ही मेरे सास ने बोलना शुरू कर दिया, “बेटा फिर तेरे सास के चिल्लाने पर तूने अच्छा सा जवाब  दे दिया न१ हाँ बेटा कभी भी दबकर नहीं रहना। तुम एक पड़ी लिखी अच्छी लगकी हो, तुम में कोई कमी नहीं है इसलिए कभी भी सुनना मत।

 

 

तभी बात को काटते अदिति बोली, माँ अब बस करो! मैं अपने दूसरे माँ के खिलाफ कुछ नहीं सुन सकती।” माँ थोड़ा आश्चर्य हो गई और बोली, “यह क्या बोल रही हो/” अदिति बोली, “हाँ माँ, आज मेर हाथ से जब कप गिरा तो मेरे सास ने बिलकुल भी मेरे साथ बुरा व्यवहार नहीं किया।” अंत में अदिति बोली, “अब आप समझ गई न सारी बात। माँ एक और बात कहनी थी आप बुरा तो नहीं मानोगे?” उसकी माँ बोली, “हाँ बोल बेटा।” अदिति बोली, “माँ काश आप भी मेरी नई माँ के साथ भावी की तरह व्यव्हार करती तो शायद भैया और भावी अलग घर में नहीं रहते।”

 

अपनी बेटी की यह सब बातें सुनकर उसेअहसास हुआ कि उसने अपने बहु के साथ गलत व्यवहार किया था। उसकी बेटी ने उसकी आंखे खोल दी।” अदिति उससे पहले कुछ बोलती तभी उसकी माँ बोली, “अदिति अब जब तू यहाँ आएगी तो पुरे परिवार को एक साथ पायेगी। अब फ़ोन रख, मुझे बेटे और बहु की स्वागत की तैयारी करनी है।”

 

शादी के बाद नई जिंदगी की शुरुवात में अगर आज सास समझदारी से काम नहीं लेती, अपनापन नहीं जताती तो शायद शुरुवात की नीड़ ही कमजोर होने से पूरी जिंदगी आपस में दरार पड़ जाती है। कप को फूटने से कोई नहीं रोक सकता, लेकिन प्रेम को टूटने से तो हम रोक सकते है। कांच के टुकड़े हो जाए पर घर के टुकड़े न होने दे। अपने घर में प्रेम का वातावरण बनाए रखिए, एक दूसरे को समझे, एक दूसरे की इज्जत करे तो घर स्वर्ग बन जाएगा। घर नर्क से स्वर्ग में बदल सकता है यदि बहु सास को माँ मान ले और बहु सास बहु को बेटी मानले। दृस्टि बदलने से सृष्टि बदल जाएगी और। एक श्री चाहे तो घर को स्वर्ग बना सकती है और चाहे तो नर्क भी बना सकती है।

 

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