Namak Jaisi Yaad Story in Hindi

नमक जैसी याद | Namak Jaisi Yaad Story in Hindi

हमारे आज की इस कहानी का नाम है नमक जैसी याद (Namak Jaisi Yaad Story in Hindi) यह कहानी है राजा और उनके तीन बेटियों की।

 

नमक जैसी याद

Namak Jaisi Yaad Story in Hindi

एक राजा की तीन बेटियां था। तीनो के बड़े होने पर राजा ने उनका स्वयंवर रचाने का सोचा। स्वयंवर से पहले उन्होंने अपने तीनो बेटियों को अपने पास बुलाया और पूछा, “मेरे प्यारे बेटियों, जल्द ही तुम सबका स्वयंवर हो जाएगा और तुम तीनो शादी करकर अपने नए घर चले जाओगे। अपने घर गृहस्ती में हो सकता है तुम तीनो मुझे भूल जाओ, लेकिन मैं तुम्हे हमेशा याद करता रहूँगा। तुम तीनो ही मेरे आँखों के तारे हो।”

 

तभी राजा की सबसे बड़ी बेटी बोली, “पिताजी मैं आपको हमेशा याद करुँगी। आप तो मेरे लिए सोने के गहनों की तरह मूल्यवान हो।” तभी दूसरी बेटी बोली, “हाँ पिताजी, मुझे सबसे ज्यादा पंसद हीरे है और आप तो मेरे लिए हीरे जैसे हो। मैं हमेशा आपको याद रखूंगी। बोलो छोटी बहन तुम भी पिताजी को याद रखोगी न?” राजा की सबसे छोटी बेटी बोली, “हाँ दीदी मैं तो पिताजी को नमक की तरह याद करुँगी। हमेशा याद करुँगी।”

 

राजा को थोड़ा बुरा लगा। राजा ने अपनी छोटी पुत्री से कहा, “क्या मेरा मूल्य तुम्हारे लिए सिर्फ नमक जितना है?” राजकुमारी बोली, “हाँ पिताजी, मैं हमेशा आपको नमक की तरह याद करुँगी।” अब राजा को गुस्सा आ गया और कहा, “निकल जाओ हमारे महल से। सैनिकों छोटी राजकुमारी को जंगल में छोड़ आओ।” सैनिक राजकुमारी को जंगल में छोड़कर आ गए।

 

राजकुमारी घने जंगल में अकेली डरते डरते चली जा रही थी। तभी उसको पीछे से घोड़े के पैरों की आवाज सुनाई दी। वह डरकर पेड़ के पीछे छिप गई। घोड़े पर से एक नौजवान उतरा और राजकुमारी के पास आया और बोला, “हे देवी, मुझसे डरो नहीं। आप इस घने जंगल में अकेले क्या कर रहे हो? मैं पास ही के गाँव में एक व्यापारी हूँ। किसी काम से दूसरे गाँव गया था लौटते समय मैं इस जंगल से जा रहा था और आपको देखा। यह जंगल बहुत खतरनाक है। आपको यहाँ अकेले नहीं आना चाहिए।”

 

राजकुमारी ने रोते-रोते अपनी सारी बात बताई। वह व्यापारी राजकुमारी से बोला, “हे राजकुमारी आप कृपा करके मेरे घर चलिए। मेरे माता-पिता आपसे मिलकर खुश होंगे और जब तक राजा आपको लेने वापस नहीं आते मेरे घर पर ही रहिए।” वह व्यापारी के घर चली गई। वयापारी के माता-पिता ने राजकुमारी और अपने पुत्र की शादी करा दी। दोनों ख़ुशी-ख़ुशी अपने घर गृहस्ती में रहने लगे।

 

 

कुछ दिनों बाद,  राजा शिकार करने जंगल में गया, लेकिन वह भटक गया था। वह उस गाँव में आ पहुंचा जहाँ वह व्यापारी और उसकी पुत्री रहते थे। राजा के पुत्री ने राजा को गलती से देख लिया। उसने अपने पति को बताया। उसका पति तुरंत दरवाजे पर जाकर राजा का स्वागत-सत्कार करने लगा। राजा नहीं जानता था कि यह उसका दामाद है। राजा के लिए वह सिर्फ एक नागरिक ही था।

 

व्यापारी ने बड़े आदर के साथ राजा को घर के अंदर बुलाया। उनके पैर धुलवाए, ठंडा पानी पिलाया। राजकुमारी अब तक राजा के सामने नहीं आई थी। व्यापारी ने राजा से खाने का आग्रह किया। छप्पन प्रकार के भोजन परोसे। लेकिन यह क्या, जैसे ही उसने सब्जी खाई उसमें तो नमक ही नहीं था। उसने दूसरी सब्जी खाई पर उस पर भी नमक नहीं। एक-एक करके उसने सारे नमकीन भोजन चख लिए पर एक पर भी नमक नहीं था।”

 

राजा ने व्यापारी से कहा, “व्यापारी यह क्या है? यह किस तरह का भोजन है? क्या तुम्हारे घर में नमक नहीं है?” व्यापारी ने हाथ जोड़कर कहा, “हे राजन क्या बात है? देखिए  भोजन कितने सुंदर पात्रो में परोसा है। यह थाली, यह कटोरिया यह सब सोने के बने है महाराज। और यह मेज जिस पाए भोजन परोसा गया है वह तो हीरे पन्नो से जड़ी हुई है। फिर आपको भला भोजन में स्वाद किया नहीं आ रहा है?”

 

राजा गुस्सा होकर बोला, “क्या बकवास है, क्या तुम्हे इतना भी नहीं पता है कि नमक के बिना भोजन बेस्वाद हो जाता है।” व्यापारी राजा को बोला, “क्षमा करे राजन, क्या आपको अपनी पुत्री की बात याद है? बिना नमक के भोजन बेस्वाद होता है उसी तरह आपके बिना भी आपके पुत्री का जीवन बेस्वाद है।”

 

राजा ने आश्चर्यचकित होकर बोला, “कौन हो तुम नौजवान?” व्यापारी ने राजा को सारी बात बताई। राजा अपनी पुत्री और दामाद को पाकर बहुत खुश हुआ।

 

 

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि किसी भी बात के पीछे छिपा सम्पूर्ण अर्थ जाने बिना उस बात पर प्रतिक्रिया नहीं देना चाहिए कैसा कि राजा ने अपने पुत्री के साथ किया। सोने, चांदी, मोती के बिना जीवन चल सकता है लेकिन नमक के बिना जीवन नहीं चल सकता।

 

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