मंदिर का पुजारी कहानी | Mandir Ka Pujari Hindi Kahani

मंदिर का पुजारी कहानी | Mandir Ka Pujari Hindi Kahani

दोस्तों आज मैं आपको जो कहानी सुनाने वाली हूँ उसका नाम है मंदिर का पुजारी कहानी Mandir Ka Pujari Hindi Kahani हमें यकीन है कि आपको यह प्रेरणादायक सकहानी जरूर अच्छी लगेगी।

 

मंदिर का पुजारी

Mandir Ka Pujari Hindi Kahani

एक समय की बात है, एक गाँव में एक बहुत बड़ा सेठ रहता था। उसके पास बहुत सा धन था। वह अपने धन का सही उपयोग समय समय पर अनेक धार्मिक कार्य करके किया करता था। गाँव वालो की मदद करना, गाँव में बाग-बगीचे बनवाना, बच्चों के लिए स्कूल बनवाना, कुएं-तालाब खुदवाना इत्यादि अनेक कार्य वह किया करता था। उसने एक सुंदर सा मंदिर भी बनवाना था। उस मंदिर की देखभाल एक पुजारी बहुत भक्तिभाव से किया करता था।

 

समय के साथ पुजारी बूढ़ा हो चला था। उससे अब मंदिर की देखभाल ठीक तरह से नहीं हो पा रही थी। उस सेठ ने दूसरा पुजारी रखने और उसे अपने कार्य से निवृत करने का आग्रह किया। सेठ ने आसपास के सभी गाँव में घोषणा करवा दी कि एक नए पुजारी का चयन किया जाएगा। उस सेठ की उदारता के बारे में सभी जानते थे इसलिए हर कोई उस मंदिर का पुजारी बनना चाहता था।

 

सेठ ने घोषणा करवा दी कि जो कोई पुजारी बनना चाहता हो वह पहले मंदिर के दर्शन करे और फिर उससे मिलने उसकी कोठी पर आ जाए। सेठ की कोठी मंदिर के सामने ही थी। वह अपनी छत से मंदिर आने-जाने वालों पर नजर रखता था। मंदिर जाने के रास्ते में एक पत्थर गड़ा हुआ था। अधिकतर दर्शन करने वालों को उस पत्थर से ठोकर लगती थी। बड़े बड़े विद्वान पंडित मंदिर दर्शन करने जाते और फिर सेठ से मिलने के लिए कोठी पर जाते। लेकिन सेठ किसी से नहीं मिलता और अपने नौकरों से उसे कहलवा देता कि पंडित के रूप में उनका चयन नहीं हो सकता है।

 

धीरे-धीरे सभी लोगों में यह बात फैलने लगी कि सेठ तो किसी को पंडित के रूप में पसंद करता ही नहीं है। एक दिन एक साधारण सा दिखने वाला व्यक्ति उस मंदिर में दर्शन करने आया। उस व्यक्ति की नजर उस पत्थर पर पड़ी। हालाँकि उसे पत्थर से ठोकर नहीं लगी थी लेकिन वह खड़ा होकर कुछ सोचने लगा। उसने आसपास देखा। पास ही कुछ मजदुर खुदाई का काम कर रहे थे। वह व्यक्ति उन मजदूरों से फावड़ा लेकर आया, उस पत्थर को खोदकर निकाला और ऐसी जगह फेंका जिससे किसी को ठोकर न लगे। बस सिर्फ इतना बल्कि पत्थर को खोदने से रास्ते में जो गड्ढा बन गया था उसे भी उसने मिटटी डालकर समतल कर दिया।

 

 

अब उसमे फावड़ा मजदूरों को लौटाकर मंदिर दर्शन के लिए गया। सेठ अपनी घर की छत से यह सब देख रहा था। उसने अपने नौकरों को उस व्यक्ति को बुलाने के लिए भेजा। जब वह व्यक्ति मंदिर दर्शन करके वापस लौट रहा था तभी नौकरों ने उसे रोक लिया और सेठ के पास लेकर गए। सेठ ने उसे पूछा, “क्या तुम मंदिर के पुजारी बनोगे?” उस व्यक्ति ने हाथ जोड़कर कहा, “क्या बात कह रहे हैं सेट जी, मैं बहुत ही साधारण व्यक्ति हूँ और बहुत कम पढ़ा-लिखा हूँ। मुझे मंत्रोच्चार, पूजा-पाठ, भगवान की सेवा आदि की कोई जानकारी नहीं है। आपने बड़े बड़े प्रकांड पंडितो को अपने मंदिर के लायक नहीं समझा तो मुझ गरीब से क्यों मजाक कर रहे है।”

 

सेठ हंसने लगा और उसने पूछा, “अच्छा यह बताओ, उस पत्थर से तुम्हे ठोकर नहीं लगी थी फिर भी तुमने उसे क्यों हटाया? और न सिर्फ इतना बल्कि पुरे रस्ते को फिरसे समतल कर दिया।” वह व्यक्ति बोला, “उस पत्थर से हर आने-जाने वाले को चोट लग रही थी, उन्हें दर्द हो रहा था इसलिए मैंने उसे हटा दिया।” सेठ बोला, “यही देखने के लिए तो मैंने मंदिर के रस्ते में वह पत्थर लगवाया था। इतने दिनों से हजारो लोग और न जाने कितने प्रकांड पंडित मंदिर दर्शन के लिए आए। उनमे से लगभग सभी को इस पत्थर से ठोकर लगी लेकिन किसी ने भी उसे निकालने के बारे में नहीं सोचा। तुम्हे ठोकर नहीं लगी, फिर भी तुमने उसे निकालकर रास्ता ठीक किया और यही बात तुम्हे मंदिर के पुजारी के लायक बनाती है। जहाँ तक पंडित की ज्ञान की बात है तो वह तुम्हे पुराने पुजारी धीरे-धीरे सब सीखा देंगे लेकिन परोपकार की यह भावना उन प्रकांड पंडितो को किसी भी विद्यालय में भेजकर मैं नहीं सीखा पाऊंगा।”

 

दोस्तों इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि  हम कहीं भी हो, कुछ भी कर रहे हो लेकिन मन में दया का भाव परोपकार का भाव, दुसरो के लिए अच्छा करने की इच्छा जरूर होनी चाहिए। अच्छे स्कूल, कॉलेज आपको उचित से उचित विद्या तो दे सकते है लेकिन आपको एक अच्छा इंसान आपने आप ही बनना होता है, यह गूण आपके अंदर होना चाहिए।

 

तो दोस्तों आपको यह मंदिर का पुजारी कहानी कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताए और अगर आपको ये कहानी अच्छा लगा तो इसे अपने दोस्तों के साथ  भी जरूर शेयर कीजिए।

 

 

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