KTM Success Story in Hindi

KTM Success Story in Hindi | KTM की सफलता की कहानी और इतिहास

दोस्तों आज के इस लेख में मैं बात करने वाली हूँ अपने जबरदस्त स्पीड और कमाल के लुक्स की बजह से जानी जाने वाली बड़ी ही कमाल बाइक KTM के बारे में।

यह कंपनी बसीकली ऑस्ट्रिया की कंपनी है, जो वहां के स्पोर्ट्स कार और बाइक को मैनुफेक्चर करने का काम करती है। और आज के दिन इस कंपनी को AG और Bajaj Auto के द्वारा ऑपरेट किया जाता है। वैसे तो इस कंपनी की स्थापना 1992 में हुई थी, मगर इसकी असल शुरुवात तो आज से कई साल पहले 1934 में ही हो चुकी थी।

 

KTM Success Story in Hindi

इस कहानी की शुरुवात होती है 1934 से, जब ऑस्ट्रिया के एक इंजीनियर Johann Trunkenpolz ने एक कार रिपेयरिंग की दुकान की शुरुवात की। और अगले 2 साल के बाद ही उन्होंने DKW मोटरसाइकिल्स और Opel कंपनीज की कार को बेचना शुरू किया। लेकिन आगे चलकर वर्ल्ड वॉर के चलते ही जोहन को सेना में शामिल होना पड़ा और इसलिए उनका बिज़नेस उनकी पत्नी संभालने लगी।

 

जिस समय वर्ल्ड वॉर ख़त्म हुआ उस समय रिपेयरिंग का काम बहुत ज्यादा घट चुकी थी और इसी के चलते उन्होंने अपनी खुद खुद की बाइक बनाने के बारे में सोच लिया था। जोहन ने अपनी पहली बाइक R100 का प्रोटोटाइप 1951 में बना लिया था। जिसके बाद 1953 में बाइक का प्रोडक्शन भी शुरू हुआ।

 

उसी साल 1953 में ही क्रोनरिफ नाम के एक बिज़नेस मैन ने कंपनी में खुद का पैसा इन्वेस्ट किया, जिसके बाद कंपनी को  Kronreif & Trunkenpolz Mattighofen नाम के साथ रेहिस्टर किया गया। और इसी कंपनी को आज के समय में हम शार्ट में KTM के नाम से जानते हैं।

 

आगे बढ़ते हुए कंपनी ने R125 टूरिस्ट बाइक को लांच किया जो बहुत ही ज्यादा फेमस हुई, और इसके साथ  ही कंपनी ने अपना नया सकूटर भी लांच किया। और इसी बीच KTM के बाइक ने 1954 में ऑस्ट्रियन 125cc नेशनल चैंपियनशिप को अपने नाम भी किया। इसके 3 साल के बाद KTM की 1957 में स्पोर्ट्स बाइक आई जिसका नाम KTM125 Trophy था।

 

1960 के दशक से ही कंपनी ने साइकिल बनाने की भी शुरुवात की। लेकिन 1960 ने कंपनी के लिए बुरा समय तब आया जब कंपनी के हिस्सेदार Kronreif की मौत हुई थी। इसके 2 साल के बाद ही कंपनी के फाउंडर Johann Trunkenpolz की भी मौत हो गई। इन दोनों के ही मौत के बाद कंपनी पूरी तरह से डूब रही थी, लेकिन अपने पिता के मौत के बाद Erich Trunkenpolz ने कंपनी को काफी ज्यादा ग्रो होने में मदद की।

 

 

1970-80 के दशक में कंपनी ने बाइक के साथ-साथ रदिअटर्स बनाने की भी शुरुवात कि। हालाँकि 1988 में कंपनी ने स्कूटर की कम डिमांड के चलते ही उसकी प्रोडक्शन को बंद किया। 1989 में कंपनी के मालिक Erich Trunkenpolz की भी मौत हो चुकी थी और इस समय तक कंपनी पूरी कर्ज में डूब रही थी।

 

1993 आते-आते कंपनी का मैनेजमेंट उन बैंक्स को दिया गया जिनकी की वह कर्जदार थी। इसके बाद 1992 में कंपनी को चार अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया। और उसी के अंतर्गत ही KTM के बाइक्स के काम को आगे बढ़ाया गया। साथ ही आप सबको बता दें कि कंपनी की सबसे मशहूर बाइक Duke की शुरुवात भी 1994 में हुई थी और इसके 3 साल के बाद 1997 में एडवेंचर बाइक्स की भी शुरुवात की, जो उस समय लोगों को बहुत ज्यादा पसंद आई थी।

 

2007 में इंडियन कंपनी Bajaj Auto ने KTM के 14.5% शेयर को खरीद लिया , और फेब्रुअरी 2013 तक तो कंपनी के 47. 97% शेयर्स की ही हिस्सेदारी Bajaj Auto के पास थी। 2012 में कंपनी का KTM Super Motorcycles GmbH का नाम बदलकर KTM AG किया गया। और आज के समय में KTM की जितने भी Dukes के बाइक है उनका प्रोडक्शन महारष्ट्र में Bajaj Auto के प्लांट में ही किया जाता है।

 

 

तो फ्रेंड्स, यह थी KTM बाइक की सफलता की कहानी KTM Bike Success Story in Hindi, हमें उम्मीद है आपको यह लेख जरूर पसंद आई होगी तो अगर अच्छा लगे तो शेयर जरूर कीजिये और इस ब्लॉग को सब्सक्राइब भी जरूर करें।

 

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