किसान की समझदार पत्नी | Story in Hindi

 

किसान की समझदार पत्नी Ki Samjhdar Patni Story in Hindi 

 

किसान की समझदार पत्नी

एक गाँव में एक किसान रहता था। वह बहुत सीधा साधा और भोला भाला था। कुछ दिनों से वह कुछ नए खेत खरीदना चाहता था। उसी गाँव में एक ठग आया। उस ठग को जब पता चला कि किसान एक खेत खरीदना चाहता है तो उसने किसान को ठगने की योजना बनाई। वह किसान के पास गया और बोला, “किसान भाई, मेरे पास इतनी ज्यादा संपत्ति है कि मैं अकेला उसे संभाल ही नहीं पा रहा हूँ। मैं चाहता हूँ कि अपनी कुछ जमीन बेच दूँ। क्या तुम खरीदना चाहोगे?” किसान बोला, “हाँ हाँ क्यों नहीं। मैं स्वयं भी कुछ दिनों से जमीन का एक टुकड़ा खरीदना चाहता हूँ। लेकिन खरीदने से पहले मैं उसे देखना चाहता हूँ।”

 

वह ठग ख़ुशी ख़ुशी किसान को एक बड़े से खेत की तरफ लेकर गया। वह बताते हुए बोला, “यह देखो किसान भाई, यह मेरा खेत है। इस खेत के आखिर में एक झोपडी और एक कुआँ भी है, वह भी मैं बेचना चाहता हूँ। लेकिन वह कुआँ इन सबसे महंगा है क्यूंकि वह एक चांदी का कुआँ है। उस कुएँ की तले में चांदी ही चांदी है।”

 

यह बात सुनकर किसान को बहुत आश्चर्य हुआ। ठग जानता था कि किसान को आसानी से वह अपने झांसे में ले सकता है इसलिए उसने पहले ही उस कुएँ के अंदर चांदी के सिक्कों से भरी हुई बाल्टी रख रखी थी। किसान को ले जाकर उसके आँखों के सामने उसने बाल्टी खींची। किसान की आंखे फटी की फटी रह गई। वह बाल्टी तो सिक्कों से भरी हुई थी। किसान ने सोचा कि अगर मैं यह कुआँ खरीद लेता हूँ तो हमेशा के लिए मेरी पैसों की समस्या ख़त्म हो जाएगी।

 

 

किसान ने पूछा, “इस कुएँ को कितने में बेचोगे?” ठग बोला, “वैसे तो इसकी कीमत सौ सोने के सिक्के है लेकिन मेरे प्यारे किसान भाई, तुम सीधे साधे इंसान लग रहे हो इसलिए मैं पच्चीस सिक्के कम कर देता हूँ तो अब इसकी  कीमत पचत्तर सोने के सिक्के है, सिर्फ तुम्हारे लिए मेरे दोस्त।” किसान कुआँ खरीदने को तैयार हो गया और पैसा लेने घर की तरफ चल पड़ा। चालाक ठग भी उस किसान के पीछे पीछे उसके घर तक पहुंच गया।

 

घर पहुंचकर किसान ने सारी बात अपनी पत्नी को बताई। उस किसान की पत्नी पड़ी लिखी और समझदार थी। उसे लगा कि दाल में कुछ काला तो नहीं है। उसने किसान से कहा, “मुझे इस चांदी की कुएँ वाली बात पर संदेह हो रहा है। क्यों न जीवन भर की कमाई इस आदमी के हाथ में देने से पहले हम इसे परख ले। आप इसे जाकर कहिए कि हमें पैसा जमा करने में 3 दिन का समय लगेगा और यह कल आ जाए और यह कागज पर लिखकर लाए कि वह कुआँ इसका है और वह हमें पचत्तर सोने के सिक्कों के बदले वह कुँआ बेच रहा है और यहाँ आकर वह दो गवाहों के सामने दस्तखत कर देगा और अगर वह कागज देने से मना करता है तो आप उसे सीधे सीधे बोल दीजिए कि कागज नहीं देगा तो कुएँ के बदले हम 10 सोने की मुद्रा ही देंगे और अगर वह कागज लाने को तैयार हो जाता है इसका मतलब उसके बात में सच्चाई है और अगर वह दस सोने के सिक्कों में कुँआ बेचने को तैयार हो जाता है तो समझ जाइएगा कि वह एक ठग है।”

 

किसान ने उसकी पत्नी के कहने के अनुसार ठग से सारी बात कही। किसान चौंक गया और समझ गया और समझ गया मन ही मन कि किसान अब कागज मांगने लगा है। उसने बोला, “ठीक है ठीक है, अगर तुम्हारे पास ज्यादा पैसा नहीं है तो तुम मुझे दस सोने की मुद्रा ही दे दो।”

 

 

अब किसान समझ चूका था। वह उसके झांसे में आने वाला नहीं था। उसकी पत्नी ने इस बीच गाँव के सरपंच को जाकर सारी बात बता दी। सरपंच दो पहलवान लेकर पेड़ के पीछे छिपकर ठग इंतजार कर रहे थे। जैसे ही ठग ने दस सोने के सिक्के वाली बात मानी पहलवानों ने जाकर उसे पकड़ लिया और इस तरह वह किसान अपने समझदार पत्नी के कारन ठगी होने से बच गया।

 

इस कहानी से हमें दो शिक्षा मिलती है –

  1. किसी भी अनजान व्यक्ति पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए।
  2. अपने होशियारी और समझदारी से आप बड़े से बड़े नुकसान से बच सकते हो।

 

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