नाव पर छेद | Hole On The Boat Story in Hindi

नाव पर छेद | Hole On The Boat Story in Hindi

इस प्रेरणादायक कहानी का नाम है नाव पर छेद (Hole On The Boat Story in Hindi) उम्मीद है आपको कहानी पसंद आएगी।

 

नाव पर छेद

Hole On The Boat Story in Hindi

एक समय की बात है, समुद्र किनारे बसे एक नगर में एक व्यापारी रहता था। उसके पास कई नाव थी, जिनकी मदद से वह अपना व्यापार चलाया करता था। उन नाव में से एक नाव उसको बहुत प्रिय थी। उस नाव को व्यापारी ने अपनी पसंद की लाल रंग में रंगवाया हुआ था। उस नाव में बैठने के लिए बहुत आरामदायक व्यवस्था थी।

 

व्यापारी अपने पत्नी और दो बच्चो के साथ अक्सर उस नाव में भ्रमण के लिए जाया करता था। एक दिन उसी लाल नाव की देखभाल करते समय उसने देखा कि उस नाव का रंग फीका पड़ रहा है। उसने नाव को रंगने वाले कारीगर को तुरंत बुला भेजा और उसको यह आदेश दिया कि कल उस नाव को रंग दे।

 

अगले दिन व्यापारी को व्यापार के लिए एक अन्य नगर में जाना पड़ा। व्यापारी अपने लाल नाव में ही जाने लगा तभी उसे याद आया कि आज तो इस नाव को नया रंग चढ़ने वाला है इसलिए वह उस नाव से उतर रहा था, तभी उसकी नजर नाव में हो चुकी एक छेद पर पड़ी। व्यापारी ने जाँच की तो पता चला कि वास्तव में ही नाव में छेद हो चूका था। उसने सोचा कि अभी तो उसे व्यापार के लिए दूसरे नगर जाना है, पहले से ही देर हो चुकी है, कल आकर मैं इस छेद को ठीक करवा लूंगा। ऐसा सोचकर व्यापारी दूसरी नाव में सवार होकर चला गया।

 

दूसरे नगर में व्यापार के कार्य में उसे देर हो गई तथा वर्षा भी होने लगी। व्यापारी ने सोचा कि इस समय नाव से लौटना समझदारी नहीं है, अभी कुछ कार्य भी शेष रह गए हैं। आज रात यहीं रुक जाता हूँ, कल सारे कार्य करने के पश्चात ही लौटना उचित रहेगा। ऐसा विचार करके व्यापारी उस रात वही रुक गया।

 

अगले दिन, अपने घर लौटते समय उसे बहुत शाम हो चुकी थी। वह जैसे ही समुद्र किनारे पहुंचा उसने देखा कि उसकी लाल नाव वहाँ नहीं है। उसने आसपास खड़े लोगों से पूछा तो पता चला कि कुछ समय पहले ही उन्होंने उसकी पत्नी और दोनों बच्चों को लाल नाव में जाते हुए देखा है। वे आपस में बात कर रहे थे कि मौसम कितना सुहाना है, आज नाव में सैर करने का आनंद ही कुछ और होगा।

 

 

यह सुनते ही व्यापारी के पैरों तले जमीन खिसक गई। व्यापारी  को नाव का वह छेद याद आ गया। व्यापारी ने कल्पना में सोचा कि उसका परिवार नाव में समुद्र में सैर कर रहा है और उस छेद से नाव में धीरे- धीरेपानी भर रहा है। यह सोचकर उसको चक्कर आने लगे और वह गिरने लगा। पास में उपस्तिथ लोगों ने उसे संभाला।

 

कुछ देर बाद एक व्यक्ति चिल्लाया, “अरे वह देखो, आपकी नाव किनारे की तरफ आ रही है।” व्यापारी ने देखा कि यह उसकी वही लाल नाव ही थी। धीरे-धीरे नाव किनारे पर आ गई। उस नाव में व्यापारी की पत्नी और दोनों बच्चे सुरक्षित थे और बहुत प्रसन्न दिख रहे थे। पत्नी और दोनों बच्चे किनारे पर भीड़ देखकर घबरा गए और पूछने लगे कि मामला क्या है।

 

व्यापारी ने उन्हें बताया, “इस नाव में तो एक छेद था, आप सभी सुरक्षित कैसे लौट आई?” यह सुनकर व्यापारी का परिवार भी भयभीत हो गया। व्यापारी ने नाव में जाकर देखा तो पाया कि नाव की छेद की सुचारु रूप से मरम्मत हो चुकी है और नाव पर नया रंग भी लग चूका है। नाव वास्तव में बहुत सुंदर लग रही थी।

 

व्यापारी ने रंग करने वाले कारीगर को तुरंत बुलाया। कारीगर को लगा अवश्य उससे कुछ भूल  हो गई है इसलिए उसे बुलाया गया है। वह डरते-डरते आया और हाथ जोड़कर बोला , “मुझसे क्या गलती हुई है ?” व्यापारी बोला, “मैंने तुम्हे केवल नाव का रंग रोगन करने का आदेश दिया था परन्तु तुमने नाव की छेद की भी मरम्मत कर दी।” वह कारीगर बोला, “आपने तो मुझे रंग रोगन करने का ही आदेश दिया था, परन्तु जब में रंग कर रहा था तभी मेरी दृष्टि इस छेद पर गई मैंने सोचा शायद आपको भी पता नहीं है कि इस नाव में छेद है ,मैं वापस बाजार गया तथा मरम्मत का सामान लाकर इस छेद को बंद कर दिया। मैंने सोचा कि छेद वाली नाव पर नया रंग रोगन करने का भी क्या लाभ? नाव का उपयोग तो पानी में जाकर ही है इसलिए रंग रोगन से भी इस छेद को ठीक करना अधिक आवश्यक था।”

 

कारीगर की बातें सुनकर सभी लोग बहुत प्रसन्न हुए और उसके अपनी कार्य की प्रति व्यावहारिक समझ देखकर उसकी भूरी-भूरी प्रशंसा करने लगे। व्यापारी ने उसका कोटि कोटि आभार व्यक्त किया और वयापारी ने उसे बेश कीमती उपहार भी दिए।

 

 

शिक्षा – इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपने कार्य को समग्र रूप से ही देखना चाहिए लकीर का फ़क़ीर नहीं बनना चाहिए। अपने कार्य की उपयोगिता पर भी दृष्टि रखना आवश्यक है। कार्य के सार्थक होने पर ही कार्य को सम्पूर्ण माना जाता है।

 

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