अकबर और किसान | Akbar Birbal Story in Hindi

अकबर बीरबल की कहानी: अकबर और किसान | Akbar Birbal Story in Hindi

 

आज हम आपको अकबर और बीरबल (Akbar Birbal Story in Hindi) की जो कहानी सुनाने वाली हूँ उसका नाम है “अकबर और किसान” हमें उम्मीद है आपको यह कहानी पसंद आएगी।

 

 अकबर और किसान

Akbar Birbal Story in Hindi

एक बार की बात है, बादशाह अकबर एक बार कहीं जंगल में शिकार के लिए गए। साथ में बहुत आदमी थे, पर दैवयोग से जंगल में भटक गए। आगे गए तो एक खेत दिखाई दिया। उस खेत में पहुंचे और उस खेत के मालिक से कहा, “भैया! मुझे भूख और प्यास बड़ी जोर से लगी है। तुम मुझे कुछ खाने-पिने को दे दो। मैं राज्य का आदमी हूँ।”

 

उसने कहा, “ठीक है। आप हमारे तो मालिक ही हो” यह कहकर उसने भोजन करा दिया। खेत में गन्ना थी, गन्ने का रस पीला दिया। आराम करने के लिए खटिया बिछा दी। इससे बादशाह बहुत राजी हुआ। उसको ऐसा लगा कि ऐसा बढ़िया सरबत मैंने कभी नहीं पिया। जंगल में रोटी भी बड़ी मीठी लगती है।

 

जब बादशाह वापस जाने लगा तो उस किसान से कहा, “कभी तुम्हारे काम पड़ जाए तो दिल्ली में आ जाना, मेरा नाम अकबर है। किसी से मेरा नाम पूछ लेना और फिर कहा, “कलम, दवान-कागज ला, तुझे कुछ लिख दूँ।” खेत में न कलम है, न दवान है, न कागज है। खेत में रहने वाला विचारा पढ़ा लिखा तो था नहीं। फूटा हुआ मिट्टी का घड़ा था। वह सामने रख दिया और एक कोयला ले आया।

 

बादशाह ने घड़े की ठीकरी के भीतर लिख दिया। वह बेचारा पढ़ा लिखा था नहीं। अकबर ने कहा, “मेरे से जब मिलने आओ, तब इसको साथ लेकर आना।” उसने कहा ,”ठीक है।” उसने उस लिखे हुए घड़े को रख दिया। कई वर्षों तक पड़ा रहा।

 

जब अकाल पड़ा और अनाज कुछ हुआ नहीं तब बड़ी तंगी आ गई। अपने लिए अन्न और गाय-भैंसो के लिए घास तक नहीं रहा। दोनों के लिए पानी नहीं रहा। तब स्त्री ने कहा, “राज्य का एक आदमी आया था न? उसने कहा था कि जब आवश्यकता पड़े तो दिल्ली आ जाना। उसके पास जाओ तो सही।”

 

स्त्री ने बार बार कहा तो वह ठीकरा लेकर वहां से चला। दिल्ली में पहुंचा तो लोगों से पूछा ,”अकबरिये का घर कौन से है?” अकबर का नाम सुनकर किसी ने बता दिया। खास महल के दरवाजे पर जाकर पूछने लगा, “अकबरिये का घर यही है क्या?” द्वारपाल ने डांटकर कहा ,”कैसे बोलता है? ढंग से बोला कर।” वह तो अपनी भाषा में सीधा बोला और उसने ठीकरी दिखाकर कहा, “जाकर कह दो एक आदमी आपसे मिलने आया है।”

 

द्वारपाल ठीकरी देखकर चकरा गया कि बादशाह ने स्वयं इस पर दस्तखत किए हैं। उसने जाकर कहा, “महाराज! एक ग्रामीण आदमी आया है। असभ्यता से बोलता है। बोलने का भी होश नहीं है। वह आपसे मिलना चाहता है।” उसने देखकर कहा, “ओ अकबरिये! तू तो बहुत ऊँचा बैठा है।” बादशाह ने कहा, “आओ भाई! बैठो!” उसे बैठाया और कहा, “तू थोड़ी देर बैठ जा। मेरी नमाज का समय हो गया है, इसलिए मैं नमाज पढ़ लूँ।”

 

अब किसान देखता है कि उसने कपडा बिछाया है और वह उस पर उठता है, बैठता है। अकबर ने जब नमाज पढ़ ली और आकर बैठा तो उस किसान ने पूछा, “यह क्या कर रहे थे?” बादशाह ने जवाब दिया, “परवर दीगर की वंदगी कर रहा था।” किसान ने कहा, “मैं तो समझा नहीं।” अकबर बोला, “ईश्वर है न, यानि उस परमात्मा की हाजिरी भर रहा था।” किसान बोला, “कितनी बार करते हो?” तो अकबर बोला, “पांच बार।” किसान बोला, “पांच बार उठते-बैठते हो। क्यों?” अकबर बोला, “जिसने इतना दे रखा है इसकी हाजिरी भरता हूँ।”

 

किसान हैरान होकर बोला, “मैं तो एक बार  नहीं भरता हूँ,  फिर भी इतना सब दे रखा है और दे रहा है। तुम्हे पांच बार करनी पड़ती है।  अच्छी बात, जैराम जी की। अब जाता हूँ।” ऐसा कहकर जब किसान जाने लगा तो अकबर ने पूछा ,”क्यों आए थे?” किसान बोला, “मेरी स्त्री ने कह दिया था कि तुम दिल्ली जाओ तब आया और यहाँ आकर तुमको देखा, तुम तो पांच बार नमाज पड़ते हो। जब आपको परमात्मा से सब मिला तो आपसे क्या लूँ? मुझे कुछ करना नहीं पड़ता है तो भी वह परमात्मा मुझे दे देता है।”

 

अकबर बोला, “अरे भैया, तुझे जो चाहिए सो ले लो।” किसान बोला, “नहीं! इतनी मेहनत से तुम्हे मिली हुई चीज मैं मुफ्त में कैसे ले लूँ?” ऐसा कहकर अपने घर चला आया। स्त्री ने पूछा, “क्या हुआ?” उसने कहा, “अपने प्रभु को याद करो। जो सबका मालिक है, वही सबको देता है। वह हमारा, उनका सबका मालिक है। उसमें कोई पक्षपात नहीं है। वह सबका है तो हमारा भी है। अब अपने उस राज्य के आदमी से क्या मांगे? जो की स्वयं  भी मांगता है। इसलिए भगवान पर भरोसा रखो, उनका नाम लो।”

 

कई चोर मिलकर चोरी करने गए। बाहर उस किसान का घर था, उसके पास वे चोर छिपकर रहे। उस घर में वे दोनों पति-पत्नी आपस में बात कर रहे थे। स्त्री पति से बोली, ” दिल्ली गए और कुछ लाए नहीं?” पति बोला, “क्यों लावें?” स्त्री बोली, “हमारे पास कुछ था ही नहीं। कुछ कमाते।” इस पर पति ने उत्तर दिया, “अब भगवान देंगे तब ही लेंगे। भगवान पर ही हमने छोड़ दिया।” स्त्री बोली, “भगवान पर छोड़ दिया तो कुछ  काम धंदा तो करो।” पति बोला, “काम-धंदा किए बिना भी धन मिलता है, पर मैं लेता नहीं हूँ। ठाकुर जी की कृपा होगी तो घर बैठे भेज देंगे।” इस प्रकार स्त्री-पुरुष आपस में बातचीत कर रहे थे।

 

उसने पानी स्त्री को धीरज बंधाते हुए कहा, “अब वर्ष भी हो गई है, खेती करेंगे, सब काम ठीक हो जायेगा। कोई चिंता की बात नहीं है। मैं तो भगवान के भरोसे रहता हूँ, कुछ लेता नहीं हूँ। भगवान के देने के बहुत तरीके। हैं छप्पर फाड़कर देते हैं।”  उसने कहा, ‘सुन!  आज की बात बताऊँ। मैं नदी किनारे गया। नदी में बाढ़ आ गई। पानी बहुत बढ़ गया, जिससे किनारा कट गया। वहां जाकर हाथ धोने लगा तो मेरे को दिखा, वहां कोई बर्तन है। ऊपर से रेत निकल गयी थी और ढक्कन दिया हुआ एक चरु पड़ा था। उसको मैंने खोलकर देखा तो उसमें सोना-चांदी, अशर्फिया भरी हुई थी। बहुत धन था। मैंने विचार किया कि अपने तो यह नहीं लेना है। ठाकुर जी स्वयं भेजेंगे तब लेंगे। पता नहीं यह किसका है? इसलिए ढक्कन लगाकर मैं वापस आ गया।”

 

स्त्री ने पूछा, “वह कहाँ पर कौन-सी जगह है?” तो उसने सब पता दिया कि ऐसे वहां एक जाल का वृक्ष है, उसके पास में है।” चोर इनकी बातो को सुन रहे थे। उन्होंने सोचा यह किसान तो पागल है। चोर ने सोचा कि वहीं चकलार चोरी करते हैं, धन तो वहां मिल ही जाएगा।” वे वहीं गए जहाँ किसान ने हाथ धोए थे। ढक्कन ढकते समय उस किसान से कुछ भूल हो गई थी। ढक्कन कुछ खुला रह गया। उसके जाने के बाद एक सांप आकर उस बर्तन के भीतर आकर बैठ गया।

 

जब चोरों ने आकर बर्तन खोला तो सांप ने फुंकार मारी। उन्होंने जोर से ढक्क्न बंद कर दिया। अब चोरों ने विचार किया कि जरूर उस किसान ने हमें देख लिया होगा। हमें मारने के लिए ही उसने यह सब बात कही थी। इस चरु में न जाने कितने सांप-बिच्छू भरे हैं। इस चरु को उसके घर में ही गिरा दो, जिससे यह सांप-बिच्छू उनको काटकर मार देंगे।

 

चोरों ने अब इस चरु को बांधकर उसी किसान के घर पर ले गए। वे दोनों सो गए थे। उन चोरों ने  छप्पर फाड़कर चरु उल्टा कर दिया। उस पर सोने का सामान सहित वह चरु गिरा। इससे वह सांप तो वही दबकर मर गया। इस प्रकार भगवान छप्पर फाड़कर देते हैं। सबेरे जब दोनों जगे और देखा तो धन का ढेर लगा हुआ था। अब किसी से क्यों मांगे? किसान का परिवार फिर पहले की तरह हो गया।

 

उम्मीद करता हूँ आपको अकबर बीरबल की यह कहानी “अकबर और किसान | Akbar Birbal Story in Hindi” जरूर पसंद आई होगी अगर आपको यह कहानी पसंद आए तो निचे कमेंट में जरूर बताएं और साथ ही हमारे इस ब्लॉग को सब्सक्राइब भी जरूर करें। धन्यवाद।

 

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