राजा और अँधा | The King And Blind Man Story in Hindi

राजा और अँधा | The King And Blind Man Story in Hindi

आज की कहानी है एक राजा और एक अंधे व्यक्ति के बारे में ( The King And Blind Man Story in Hindi) तो हमें उम्मीद है कि आपको यह कहानी जरूर अच्छी लगेगी।

 

राजा और अँधा 

The King And Blind Man Story in Hindi

एक रोज सुबह-सुबह राजा वीरभद्र आखेट के लिए निकला। महल लौटने को हुआ तो बहुत ही थका, भूखा और प्यासा हो चूका था। तभी सड़क के किनारे उन्होंने तरबूजों का खेत देखा। एक प्यासे को इससे बढ़कर और क्या चाहिए?

 

उसने अपने सेवकों को कुछ बढ़िया तरबूज लाने को आदेश दिया। जब वे उस तरफ बढ़ ही रहे थे कि राजा को किसी की हंसी सुनाई दी। सबने उस तरफ घूमकर देखा तो एक अधेड़, नेत्रहीन आदमी खड़ा था।

 

राजा ने पूछा, “क्यों जी, तुम हँसते क्यों हो?” अँधा व्यक्ति बोला, “आपने बढ़िया तरबूज लाने  दिया है, पर यहाँ तो तरबूज नहीं है इसलिए मुझे हंसी आ गई।” राजा बोले, “तुम तो अंधे हो फिर तुम्हे कैसे पता की यहाँ तरबूज है की नहीं।” अँधा व्यक्ति बोला, “महाराज! हर बात जानने के लिए आँखों की जरुरत नहीं होती। तरबूजों का मौसम बीत चूका है। सारे अच्छे-अच्छे फल तो तोड़े जा चुके हैं, जो रह गए हैं, वह बेकार और सड़े-गले ही होंगे।”

 

सेवकों ने लौटकर राजा को वही बताया, जो उसे अंधे आदमी ने कहा था। राजा वीरभद्र उस अंधे व्यक्ति की दूरंदेशी से बहुत प्रभावित हुआ। उसने तय किया कि वह उसे अपने साथ राजधानी ले जाएगा। हो सकता है, वह अँधा आदमी राज-काज की कुछ समस्याएं सुलझाने में मदद कर सके। अंधे आदमी को रहने के लिए राजधानी के बाहर एक कुटिया दे दी गई और खाने के लिए रोज दो मटके चावल भी दिए जान लगे।

 

इस प्रकार अंधे व्यक्ति ने अपना जीवनयापन शुरू कर दिया। एक दिन एक जौहरी बहुत सारे मूल्यवान रत्न और मोती लेकर महल आया। दरबारियों ने यथाबुद्धि राजा को बेहतरीन रत्न और मोती खरीदने की सलाह दी। जौहरी को पता चल गया कि उनमे से एक भी ऐसा नहीं है, जो असली और नकली हीरों में फर्क कर सके।

 

जौहरी ने एक हाथ में असली हीरा और दूसरे में  नक़ल उठाकर कहा, “असली हीरा एक लाख रूपए का है, और दूसरा महज कांच का टुकड़ा। आप सब में से जो स्वयं को सबसे ज्यादा बुद्धिमान समझता हो, वह असली हीरा चुन ले। लेकिन एक शर्त है, यदि उसने नकली हीरे को असली समझकर चुन लिया तो उसे असली की कीमत देनी पड़ेगी।”

 

 

उसकी बात सुनकर सभा में एकदम से सन्नाटा छा गया। अब कोई भी सलाह देने आगे नहीं आया। ऐसा देखकर, राजा ने अंधे व्यक्ति को बुला भेजा और कहा, “देखते है की वह असली और नकली में फर्क बता सकता है नहीं।”

 

मंत्री और दरबारी एक दूसरे की तरफ देखने लगे। उनके होठों पर मंद-मंद मुस्कान थी। “वह अँधा व्यक्ति? वह क्या असली और नकली में भेद बताएगा?”

 

अँधा व्यक्ति वहां हाजिर हुआ तो उसे सारी बात बताई गई।  जौहरी से दोनों पत्थर उसके दोनों हाथ में रखने के लिए कहा। जौहरी ने ऐसा ही किया। कुछ  देर तक अंधे व्यक्ति ने अपने हाथ धुप में रखें। उसके पश्चात, उनमे से एक पत्थर राजा को देते हुए बोला, “यही असली हीरा है।”

 

जौहरी हैरान था कि एक नेत्रहीन व्यक्ति ने सही हीरा अलग कर दिया। राजा ने जौहरी को हीरे का दाम दिया और फिर अंधे व्यक्ति से पूछा, “तुमने असली हीरा कैसे ढूंढ निकाला?” अंधे व्यक्ति ने जवाब दिया, “महाराज! यदि आप हीरे और शीशे को धुप में रखेंगे तो शीशा तो गर्म जाएगा पर हीरा नहीं।”

 

अंधे व्यक्ति की उत्तर से संतुष्ट होकर राजा ने उसे तीन वक्त का खाना और कुछ एक-दूसरी सुविधाएं मुहय्या करा दी। एक सुबह दरबार में दो भाइयों के बीच जायदाद के झगड़े का मुकदमा आया। उन दोनों के स्वर्गीय पिता उनके नाम भारी संपत्ति छोड़ गए थे जिसमें हजारों एकड़ की जमीन थी, कुछ उपजाऊ, कुछ बंजर और पथरीली। लेकिन जो झीले, जंगल और नदिया बीच में पड़ते थे, उनकी बजह से जमीन जायदाद का ठीक-ठाक बंटवारा मुश्किल हो रहा था।

 

कोई समाधान न निकलता देख, मामला सुलझाने के लिए दोनों भाई राजा के दरबार में आए। जमीन-जायदाद के मामले देखने वाले मंत्री और उसके अधिकारिओं के सामने सारा किस्सा सुनाया गया। उनकी समझमें भी बंटवारे का कोई तरीका नहीं आया। राजा ने  व्यक्ति को बुलाया।

 

 

मंत्री हैरान थे कि जो मामला आँखों वाले जानकार लोगों के पल्ले नहीं पड़ा, उसे एक अँधा आदमी कैसे हल करेगा! अँधा व्यक्ति पूरी बात सुनकर मुस्कुराते हुए बोला, ” दोनों में से एक भाई पूरी संपत्ति का बंटवारा करे और दूसरा अपनी पसंद का हिस्सा चुन ले। और यह दोनों काम कौन-कौन करेगा, इसका फैसला मान लिया। उनकी गंभीर समस्या चुटकियों में हल हो गई थी।

 

इसी तरह अँधा व्यक्ति राजा को सलाह मसविरा देते हुए, समस्याएं और दुष्कर झगड़े सुलझाने में राजा की मदद करते हुए, उस छोटी सी कुटिया में अपना दिन गुजारने लगा।

 

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