The Bible Story of Adam And Eve in Hindi

आदम और हव्वा की कहानी | The Bible Story of Adam And Eve in Hindi

आदम और हव्वा की कहानी  The Bible Story of Adam And Eve in Hindi

क्या आप जानते हैं कि मनुष्य को कैसे बनाया गया? बाइबिल की पहली पुस्तक उत्पत्ति के दूसरे और तीसरे अध्याय में हमें पहले मनुष्य की रचना की कहानी मिलती है तो आइए जानते है आदम की वाटिका में आदम और हव्वा की कहानी जिन्हे हम आदम और ईव के नाम से भी जानते है।

 

आदम और हव्वा की कहानी

शुरुवात में जब परमेश्वर ने पृत्वी, समुद्र, पेड़-पौधे और उस पर रहने वाले सभी जीवों को बनाया तो उसने सबसे पहले नर को बनाया। परमेश्वर ने उसे अपनी छवि में मिटटी से बनाया और उसमें प्राण फुक दिए और उसका नाम आदम रखा।

 

परमेश्वर ने उसके रहने के लिए एक सुंदर बगीचा बनाया जिसे परमेश्वर ने अदन का बगीचा कहा। यह बगीचा फूलों और पेड़ो से भरा हुआ था और यहाँ हजारों जानवर और पक्षी घूमते थे। खाने के लिए सभी प्रकार के विभिन्न पेड़ थे। इनमें से दो पेड़ बहुत खास थे जो बगीचे के बीच में थे, एक था जीवन का पेड़ और दूसरा था भले और बुरे के ज्ञान का पेड़।

 

उस बगीचे को सींचने के लिए एक महानदी अदन से निकली और वहाँ से आगे बढ़कर चार नदियों में बँट गए। पहली नदी का नाम “पिशोन” था,  दूसरी नदी थी “गीहोन”, तीसरी नदी है “हिद्देकेल” जिसे हम टिग्रेस के नाम से भी जानते है और चौथी नदी का नाम “फरात” था जिसे हम यूफ्रेट्स के नाम से जानते है।

 

परमेश्वर ने आदम को अदन के बगीचे में रखा ताकि वह उस बगीचे की देखभाल करे। परमेश्वर ने आदम से कहा कि तुम अपने पंसद की किसी भी पेड़ से फल खा सकते हो लेकिन कभी भी भले और बुरे के ज्ञान के पेड़ से फल न खाना। क्यूंकि जिस दिन तुम वह फल खाओगे तुम अवश्य में मर जाओगे।

 

जल्द ही परमेश्वर ने महसूस किया कि आदम अकेला था इसलिए उन्होंने आदम के लिए एक साथी बनाने का फैसला किया। फिर परमेश्वर सभी जानवरों और पक्षियों को आदम के पास लाया और उनका नाम रखने को कहा और जिस-जिस जीवित प्राणियों का जो-जो नाम आदम ने रखा वहीं उसका नाम हो गया।

 

लेकिन इसके बाद भी आदम के लिए कोई ऐसा सहायक न मिला जो उससे मेल खा सके। तब परमेश्वर ने आदम को भारी नींद में डाल दिया और जब वह सो गया तो उसकी पसलियों में से एक को निकाल लिया और उससे पहली स्त्री बनाई और उसे आदम के पास ले आया।

 

तब आदम ने कहा, “यह मेरे हड्डियों में के हड्डी और मेरे मांस में का मांस है इसलिए इसका नाम नारी होगा क्यूंकि ये नर से निकाली गई है।” और इसलिए बाइबिल बताते है कि पुरुष अपने माता-पिता को छोड़कर अपनी पत्नी से मिला रहेगा और वे एक ही तन बने रहेंगे। आदम ने उसका नाम हव्वा रखा।

 

आदम और उसकी पत्नी हव्वा दोनों नग्न अवस्था में बगीचे में रहते थे पर लजाते नहीं थे। उसी बगीचे में एक सांप भी रहता था। एक दिन हव्वा बगीचे में अकेले जा रही थी। जब उस सांप ने एक पेड़ से फुसफुसाकर हव्वा से पूछा, “क्या ये सच है कि परमेश्वर ने तुमसे कहा कि इस बगीचे के किसी पेड़ का फल न खाना?”

 

 

हव्वा ने सांप को उत्तर दिया, “इस बगीचे के फलों को हम खा सकते है पर जो पेड़ बगीचे के बीच में है अगर हम उस पेड़ का फल खाते है या उसे छूते है तो हम मर जाएंगे।”

 

सांप ने फुसफुसाते हुए कहा, “तुम नहीं मरोगे। क्यूंकि परमेश्वर नहीं चाहता कि तुम भले और बुरे के ज्ञान के पेड़ से फल खाओ क्यूंकि अगर तुम ऐसा करोगे तो तुम भले और बुरे का ज्ञान पाकर परमेश्वर के तुल्य हो जाओगे।”

 

हव्वा ने फल को देखा और देखा कि वह ताजा और स्वादिष्ट लग रहा था और बुद्धि देने के योग्य है, तो उसने भले और बुरे के ज्ञान के पेड़ से एक फल तोड़कर खाया और यह देखते हुए कि फल स्वादिष्ट था उसने आदम से कहा कि वह भी फल खाए। आदम ने एक टुकड़ा लिया और उसे खा लिया।

Bible Story of Adam And Eve in Hindi

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Story of Adam And Eve in Hindi

फल खाने के बाद उन्होंने एक दूसरे को और खुदको देखा और महसूस किया कि वे नग्न थे और उन्हें शर्म महसूस हुई और अपने शरीर को ढकने के लिए उन्होंने अंजीर के पत्तो से अपने लिए वस्त्र बना लिए। तब उन्होंने परमेश्वर को आते देखा। वे उसका सामना करने से डरते थे इसलिए उन्होंने छिपने की कोशिश की। लेकिन परमेश्वर यह जान गया कि उन्होंने फल खा लिया है।

 

आदम ने उसे फल खिलाने के लिए हव्वा को दोषी ठहरने की कोशिश की और हव्वा ने उसे धोखा देने के लिए सांप को दोषी ठहराया। तब परमेश्वर ने सांप को दंड दिया और कहा, “तूने जो किया है इसलिए तू अधिक शापित है और अब से तू पेट के बल चलेगा और मिटटी चाटता रहेगा और मनुष्य तुझे कुचलेगा।”

 

फिर परमेश्वर ने आदम से कहा, “तुझे फसल उगाने और भोजन बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी और अंत में तू मिटटी में मिल जाएगा क्यूंकि तू उसी में से निकाला गया है।” और हव्वा से कहा, ‘तुझे जन्म देने का दर्द भुगतना होगा।” इसलिए जितने भी मनुष्य जीवित है उन सबकी आदिमाता हव्वा हुई।

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फिर परमेश्वर ने आदम और हव्वा के लिए चमड़े के कपड़े बनाकर उन्हें पहना दिए। फिर परमेश्वर ने उनसे कहा कि कहीं ऐसा भी न हो कि वे जीवन का फल भी खा ले और सदा जीवित रहे। इसलिए परमेश्वर ने आदम और हव्वा को अदन के बगीचे से निकाल दिया और जीवन के पेड़ के पास अभिभावक स्वरतूतो को और चारों ओर घूमने वाली ज्वाला में तलवार को भी नियुक्त कर दिया। इस प्रकार मनुष्य को परमेश्वर ने रचा और उसी भूमि पर भेजा गया जिसमे से वह बनाया गया था।

 

 

यह एक बहुत ही अद्भुत कहानी है जो हमें न केवल पहले मनुष्य की रचना के बारे में बताती है बल्कि और भी कई चीजे सिखाती है।

 

पहली शिक्षा – यह कहानी हमें एक आदमी के जीवन में उसकी पत्नी की मौजूजगी का महत्त्व बताती है। जब आदमी अकेला था, उदास था तब परमेश्वर ने उसके लिए एक साथी बनाया जो स्त्री थी। अर्थात पति-पत्नी एक दूसरे के साथी हैं।

 

दूसरी शिक्षा – परमेश्वर चाहता तो नर की तरह स्त्री को भी मिटटी से बना सकता था पर पर उसने नारी को नर के पसली से बनाया। अर्थात नारी नर के शरीर का हिस्सा हुई। और इसलिए बाइबिल बताते है कि कि जिसे परमेश्वर ने जोड़ा है उसे कोई अलग न करे।

 

तीसरी शिक्षा – आज्ञाकारिता। जैसा की यह कहानी बताती है कि अगर हम परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन नहीं करते हैं तो हम परमेश्वर  से दूर हो जाते हैं, पाप में गिरते हैं, दुःख उठाते हैं और मृत्यु के निकट आ जाते है। इसलिए जरुरी है कि हम परमेश्वर की वचनों को पढ़े, उसे समझे, अपने जीवन में पूरा करें और परमेश्वर से निकटता बनाए रखें।

 

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