शिकायतों का बोझ | Motivational Story in Hindi

शिकायतों का बोझ | Motivational Story in Hindi

फ्रेंड्स आज मैं आपको जो प्रेरणादायक कहानी (Motivational Story in Hindi) सुनाने वाली इस इस लेख में वह है “शिकायतों का बोझ”

 

शिकायतों का बोझ

Motivational Story in Hindi

 

एक संत थे। उनके अनेक शिष्य थे। संत की सेवा करने में सभी आगे रहते थे। सभी को लगता था कि असली सेवा वही करते हैं, बाकि केवल दिखावा ही करते हैं। सभी शिष्य अवसर पाकर अन्य शिष्यों के प्रति कुछ न कुछ नकरात्मक बात कह देते।

 

एक दिन उस संत ने अपने प्रवचन के बाद कहा ,”आप कल जब प्रवचन सुनने आए, तो अपने साथ थैले में बड़े-बड़े आलू लेकर आएं। जो शिष्य जितने व्यक्तियों से कोई सिकवा शिकायत करता है वे उतने आलू लेकर आएं।”

 

अगले ही दिन, सभी शिष्य आलू लेकर आए। किसी के पास चार आलू थे, तो किसी के पास छह। गुरु ने कहा, “अगले सात दिन तक यह आलू वे अपने साथ रखे, जहाँ भी जाए, खाते-पीते, सोते-जागते, यह आलू सदा साथ रखने चाहिए।”

 

शिष्यों को कुछ समझमें नहीं आया। लेकिन वे क्या करते, गुरु का आदेश था। दो चार दिनों के बाद शिष्यों आलुओ के बतबू से परेशान हो गए, जैसे-तैसे सात दिन बिताए और गुरु के पास पहुंचे।

 

गुरुदेव आपके आज्ञा से पीछे सात दिन से हम इन आलुओ को अपने पास रखे हुए हैं, लेकिन अब इन आलुओ से तो हमें गंध आने लगी है, अब इन्हे फेंक देना चाहिए। अब इनका बोझ हमें व्यर्थ लग रहा है।

 

संत मुस्कुराए और बोले, “जब मात्र सात दिनों में आपको यह आलू बोझ लगने लगे तब सोचिए कि आप जिन व्यक्तियों से इर्षा करते हैं उनका कितना बोझ आपके मन में रहता होगा! यह इर्षा आपके मन पर अनावश्यक बोझ डालती है, जिसके कारण आपके मन में भी बतबू भर जाती है। ठीक इन आलुओ की तरह इर्षा के कारण हम अपने सोच को भी संकुचित कर डालते हैं। इसलिए अपने मन से गलत भावनाओं को निकाल दो, यदि किसी से प्रेम नहीं कर सकते तो कमसकम नफरत तो मत करो। इससे आपका मन स्वच्छ और हल्का होगा।”

 

संत की बात सुनकर सभी एक दूसरे की ओर देखने लगे। संत ने कहा, “यह सब मैंने आप सबको शिक्षा देने के लिए किया था।”

 

इस कहानी से सीख, Moral of The Story 

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें इर्षा, द्वेष जैसे नकरात्मक भावो से दूर रहना चाहिए, हमेशा परमात्मा का शुकराना करना चाहिए।

 

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