You are currently viewing शकुनि मामा ने आखिर क्यों करवाया महाभारत का युद्ध? | Story of Mama Shakuni in Hindi
Story of Mama Shakuni in Hindi

शकुनि मामा ने आखिर क्यों करवाया महाभारत का युद्ध? | Story of Mama Shakuni in Hindi

महाभारत के कुछ किरदार इतने प्रसिद्ध है कि उनके नाम आज भी दुनिया में पहचान बन गई है और असेही कुछ किरदारों में से एक है मामा शकुनि (Story of Mama Shakuni in Hindi) जी हाँ, यह वहीं शख्स है जिसने अपने पाशो के दम पर महाभारत का महायुद्ध रचाया था। शकुनि कोई योद्धा नहीं था लेकिन उसकी सोच और पाशे की कर्तव् ने अच्छे-अच्छे योद्धाओं को इसके इशारे पर चलना पड़ता था। इस लेख में मैं आपको मामा शकुनि की पूरी कहानी शेयर करने वाली हूँ।

 

शकुनि मामा ने आखिर क्यों करवाया महाभारत का युद्ध – Story of Mama Shakuni in Hindi

इस दिलचस्प कहानी की शुरुवात होती है गांधारी के पिता महाराज सुबाला से। वह गांधार राज्य के राजा थे। यह उन दिनों की बात है जब गांधारी सिर्फ राजकुमारी थी और उसका विवाह नहीं हुआ था, तब कुछ ज्योतिष आचार्यों ने महाराज सुबाला को सलाह दी थी कि राजकुमारी गांधारी के भाग्य में दोष है।

 

दोष यह था कि उसके विवाह होने के कुछ समय बाद उसके पति की मौत हो जानी तय है। इसलिए इस दोष को हटाने के लिए गांधारी का पहला विवाह किसी ऐसे व्यक्ति से करना होगा जिसके मरने का दुःख न हो। इसी कारन गांधारी का विवाह एक बकरे के साथ करवा दिया और विवाह के बाद उस बकरे की बलि चढ़ा दी थी।

 

महाराज सुबाला ने यह बात सबसे छिपाकर रखी। हालाँकि यह सब कुछ उसके दोष के कारण हुआ था लेकिन सामाजिक नजर में गांधारी विधवा बन चुकी थी।

 

कुछ समय बाद गंगा पुत्र भीष्म पितामह ने महाराज सुबाला के सामने अपने बेटे धृतराष्ट्र का प्रस्ताव रखा। महाराज सुबाला ने धृतराष्ट्र और गांधारी के विवाह को स्वीकार किया। धूमधाम से दोनों का विवाह हुआ।

 

तब गांधारी के पहले विवाह का रहस्य किसी को नहीं पता था। तब एक दिन भीष्म पितामह को कहीं से पता चला कि धृतराष्ट से विवाह करने से पहले गांधारी एक विधवा थी और उसकी पहले पति की मौत कैसे हुई यह भी रहस्य में है।

 

भीष्म पितामह ने जब महाराज सुबाला से इस बारे में चर्चा की तो महाराज सुबाला ने उनको पूरी घटना बताई। यह जानकर भीष्म पितामह को अत्यंत गुस्सा आया लेकिन उन्होंने अपना गुस्सा जाहिर नहीं किया। उन्होंने महाराज सुबाला के साथ रिश्ता नहीं तोडा लेकिन उल्टा और बढ़ा दिया।

 

भीष्म पितामह ने महाराज सुबाला और उसके पुरे परिवार को अपने  बुला लिया। पितामह ने सुबाला के इस धोखे के बदले उसके पुरे परिवार को धीरे-धीरे मारने का निर्णय लिया।

 

महाराज सुबाला के करीब सौ बेटे थे। पितामह ने पुरे परिवार को एक बढ़ा कमरा दे दिया जहाँ उनके लिए रोज खाना भेजा जाता था। धीरे-धीरे खाने की मात्रा कम होती गई। पहले सभी लोगों के लिए खाना आता था अब कुछ लोगों के लिए ही आता था। कुछ दिनों के बाद और भी कम होने लगा।

 

  • कैसे हुआ नारियल का जन्म | Coconut Birth Story In Hindi

 

इस तरह सिर्फ एक व्यक्ति का खाना भेजा जाता था। उस व्यक्ति के खाने में भी सिर्फ थोड़े से चावल भेजे जाते थे। महाराज सुबाला समझ गए कि यह उन लोगों की मारने की चाल है इसलिए उसने अपने सबसे छोटे बेटे को वह खाना खिला दिया ताकि वह जिंदा रहकर उनका बदला ले सके।

 

महाराजा सुबाला का छोटा बेटा बहुत ही होशियार था। उसी का नाम था शकुनि। महाराज सुबाला ने अपने किसी बेटे को खाना नहीं दिया जिसके कारण धीरे-धीरे सभी बेटों की मौत हो गई।

 

महाराज सुबाला अत्यंत बीमार हो गए और मरने की कगार पर थे। तब उन्होंने अपने बेटे शकुनि को बुलाया। जब शकुनि उसके पास गया तो उन्होंने अपने पलंग के निचे से डंडा निकाला और शकुनि के एक पैर पर जोर से मार दिया। शकुनि को आश्चर्य हुआ और उसने पूछा, “पिताजी आपने मेरी टांग क्यों तोड़ दी?”

 

महाराज सुबाला ने कहा, “शकुनि बेटा, यह टांग तुम्हे याद दिलाया करेगी कि तुम्हारे जीवन का क्या लक्ष है।”

 

शकुनि ने पूछा, “कैसा लक्ष पिताजी?”

 

महाराज सुबाला ने कहा, “बेटा आज तक हमने तुम्हे खाना खिलाकर तुम्हे जीवित रखा। भूख के कारण तुम्हारे सभी भाइयों की मौत हो गई। उन सबके उपकार तुम्हे चुकाने है। भीष्म पितामह ने हमारे पुरे परिवार को तबाह कर दिया तुम्हे उसका बदला लेना होगा। उसे अपने बेटे धृतराष्ट्र से बहुत प्रेम है। तुम्हे धृतराष्ट के सभी कौरवों को ख़त्म करना है। मेरे मरने के बाद तुम्हे महाराज धृतराष्ट्र से मिलकर माफ़ी मांगनी होगी और कहना कि मेरे पिताजी ने जो भी किया उसके लिए माफ कर दो और फिर उसके साथ रहकर उसी के परिवार को तबाह करना होगा। इस कार्य के लिए मैं तुम्हे एक उपाय देता हूँ। मेरे मरने के बाद मेरे हड्डियों के दो पाशे बनाना और उसे जुए में उपयोग करना। उस पाशे के रूप में मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगा। तुम जब जैसा अंक चाहोगे वैसा ही अंक निकलेगा। आज से कौरवों का अंत ही तुम्हारे जीवन का लक्ष होगा।” इतना कहकर महाराज सुबाला ने अपने प्राण छोड़ दिए।

 

शकुनि ने अपने पिता के आज्ञा अनुसार उसके हड्डियों से दो पाशे बनाए। भीष्म ने देखा कि महाराज सुबाला के साथ उसके सभी बेटों की भी मौत हो गई और देखा कि सिर्फ शकुनि ही जिंदा बचा था। उसने शकुनि से पूछा कि वह वापस अपने गांधार राज्य जाना चाहता है या हस्तिनापुर रहना चाहता है।

 

शकुनि ने उस समय पितामह से माफी मांगी और हस्तिनापुर में रहने का फैसला किया। इसलिए पितामह ने उसे गांधार नरेश बनाया और फिर अपने कौरवों के साथ रखा। शकुनि मामा कौरवों से मिलकर सबकी नजरों में छाने लगा। सबसे पहले उसने पितामह से हस्तिनापुर का सिंहासन छीनकर महाराज धृतराष्ट्र को दे दिया जिसके कारण धृतराष्ट्र के सबसे बड़े बेटे दुर्योधन की नजरों में खुद महान बन सके।

 

दुर्योधन ने अपने शकुनि मामा से गहरा रिश्ता जोड़ लिया। शकुनि ने अपने भांजे को पूरी तरह से काबू में कर लिया था, यहाँ तक काबू किया था कि दुर्योधन अपनी हर चाल अपने मामा को पूछकर चलता था। और हर वक्त की तरह मामा शकुनि उसे ऐसे ऐसे अंतरंगी विचार देते थे जिससे दुर्योधन खुश हो जाता और उस चाल से वह अपने हर ख्वाव पूरा करने लगा।

 

इसी तरह शकुनि मामा ने अपने भांजे को अपना मोहरा बनाकर पांडवो के सामने खड़ा कर दिया। उसने दुर्योधन की मदद से अपने लक्ष तक पहुँचने का रास्ता बना लिया था। हर समय वह बस मौके की तलाश में होता है। ऐसा ही एक मौका आया था जब जब कौरव और पांडव अपने वाल अवस्था में थे, वे गुरु द्रोणाचार्य और गुरु कृपाचार्य के आश्रम में शिक्षा ले रहे थे।

 

 

आए दिन कौरव और पांडवों के बीच छोटे बड़े झगड़े होते थे। महारानी कुंती और महारानी गांधारी उनको समझाती कि इस तरह आपस में झगड़ा करना सोभा नहीं देता। इन झगड़ों में मूल कारण था कौरव के ह्रदय में पांडवो के प्रति नफरत। और आखिर में इसी नफरत की बजह से महाभारत का युद्ध छिड़ गया।

 

आपको यह कहानी “Story of Mama Shakuni in Hindi” कैसी लगी निचे कमेंट करके जरूर बताए और अच्छा लगे तो शेयर भी जरूर करिए और अगर आपको इसी तरह की और भी कहानियां पढ़नी है तो हमरे ब्लॉग को सब्सक्राइब जरूर कर ले।

 

यह भी पढ़े:-

 

Sonali Bouri

मेरा नाम सोनाली बाउरी है और मैं इस साइट की Author हूँ। मैं इस ब्लॉग Kahani Ki Dunia पर हिंदी कहानी , प्रेरणादायक कहानी, सक्सेस स्टोरीज, इतिहास और रोचक जानकारियाँ से सम्बंधित लेख पब्लिश करती हूँ हम आशा करते है कि आपको हमारी यह साइट बेहद पसंद आएगी।

Leave a Reply