Real Story of Shinchan Death in Hindi

Real Life Story of Shinchan Death in Hindi | बहन को बचाने में गई जान, कहानी सुनकर रो पड़ोगे

आज मैं आपको एक ऐसी सच्ची कहानी (Real Story of Shinchan Death in Hindi) से रूबरू कराने वाली हूँ जिसे सुनने के बाद शायद आप लोगों की आंखे नम हो सकती है। आज मैं आप लोगों को एक ऐसे फेमस कार्टून कॅरेक्टर की सच्ची घटना बताने वाली हूँ उसकी लाइफ से जुडी खौफनाक दिल दहलाने वाली कहानी बताने वाली हूँ जिसे सुनकर आप लोगों के आँखों से जरूर आंसू आ सकते है और वह कार्टून कॅरेक्टर और कोई नहीं बल्कि हम सबका प्यारा शिनचैन है।

 

Real Story of Shinchan Death in Hindi

इस कहानी की शुरुवात हुई थी आज से पुरे 50 साल पहले यानि सन 1970 में। सन 1970 में जापान के एक छोटे से शहर में एक खुशाल परिवार रहता था। उस परिवार के मुखिया का नाम था हिरोशी और उनकी पत्नी का नाम था मिसाई। हिरोशी और मिसाई के दो बच्चे थे, जिसमे से बेटी का नाम था हिमावारी और बेटे का नाम था शिनचैन। उनका एक बहुत ही छोटा सा प्यारा सा कुत्ता भी था जिसका नाम था शिरो।

 

शिनचैन अपने बचपन से ही बहुत ज्यादा सरारती बच्चा था, बहुत ज्यादा शैतानी करता था और वह अपना कभी भी होमवर्क पूरा नहीं करता था। स्कूल में भी जाता था तो वह अपने टीचर्स को बहुत ज्यादा परेशान करता था लेकिन वह जितना ज्यादा शैतान था उतना ही ज्यादा समझदार भी था।

 

शिनचैन अपनी बहन हिमावारी और उनका कुत्ता शिरो से बहुत ज्यादा प्यार करता था। शिनचैन के माँ-बाप जब कभी भी बाहर घूमने जाते थे या किसी काम से जाते थे तो वह दोनों अपने बच्चो को घर पर ही छोड़कर जाते थे अपने कुत्ते शिरो के साथ। एक बार शिनचैन के पिता हिरोशी को बाहर दूसरे शहर में बहुत जरुरी काम आ गया इसलिए वह दूसरे शहर निकल चुके थे।

 

शाम के वक्त मिसाई को याद आया कि उनके घर जरुरत की चीजे खत्म हो चुकी है। बाहर बहुत ज्यादा बारिश हो रही थी और तूफान भी हो रहा था। उसने यह सोचा कि शायद अगर मैं अपने बच्चो को घर पर ही छोड़ दूंगी तो उन्हें बाहर बारिश की बजह से कुछ परेशानी हो सकती और इसी वजह से उन्होंने यह फैसला किया मैं दोनों बच्चो को लेकर बाहर शॉपिंग करने चली जाती हूँ।

Real Story of Sinchan Death in Hindi
Real Story of Shinchan Death in Hindi

उसने यही किया। मिसाई अपने दोनों बच्चो को यानि हिमावारी और शिनचैन को लेकर शॉपिंग करने के लिए चली है। बाहर बहुत ज्यादा बारिश और तूफान आ रहा था। जैसे ही वह लोग शॉपिंग के मॉल में पहुँचते हैं तो अचानक से बारिश थम जाती है। गाड़िया आम दिनों की तरह ही चलने लगती है।

 

 

मिसाई अपने शॉपिंग में बिलकुल व्यस्त थी कि अचानक शिनचैन की नजर अपनी छोटी बहन हिमावारी पर पड़ी। वह देखता है कि हिमावारी खेलते-खेलते दुकान के बाहर निकल चूका है और अब वह बीच सड़क में जा पहुँची। बाहर बहुत तेज रफ़्तार से गाड़िया आ-जा रही थी। शिनचैन ने यह सोचा की मेरी बहन को कोई परेशानी न हो जाए उसका कही एक्सीडेंट न हो जाए।

 

फिर शिनचैन उसे बचाने के लिए बाहर निकलता है जैसे ही वह देखता है कि हिमावारी बिलकुल सड़क के बीचो-बीच पहुँच चुकी है तो शिनचैन उसे आवाज लगाता है कि यहाँ ;पर जल्दी से लौटकर आ जाओ वरना तुम्हे कुछ हो जाएगा। लेकिन हिमावारी उसकी आवाज नहीं सुन पाती है और अचानक शिनचैन की नजर पड़ती है कि दूर से एक बहुत ही बड़ा ट्रक हिमावारी की तरफ तेजी से बढ़ रहा है।

 

शिनचैन सोचता है कि वह कूदकर हिमावारी को बचा लेगा और फिर वह वहाँ दौड़कर जाता है अपनी छोटी बहन को बचाने के लिए। वह छलान लगाता है कि तभी अचानक से वह बड़ा सा ट्रक आकर उन दोनों को टक्कर मार देता है और फिर दोनों की उसी जगह पर मौत हो जाती है। मिसाई को इस घटना से बहुत ही ज्यादा दुःख होता है वह पूरी टूट सी जाती है।

 

जब शिनचैन के पिता को यह सारी चीजे पता चली तो वह बहुत ही ज्यादा नाराज हो गए और इसी बजह से बहुत दिन तक मिसाई और हिरोशी के बीच बातें नहीं हुई। वह इतने ज्यादा डिप्रेशन में चले जाते हैं कि डिप्रेशन में जाकर वह एक बुक लिख डालती है। मिसाई अपने उस बुक में अपने दोनों बच्चो की बहुत याद कर-करके उनके तस्वीरें बनाती थी और उसने जुडी हुई हर एक यादें लिखती थी।

 

इसी तरह से कई साल बीत गए और फिर कई साल बाद एक बार इस दुर्घटना की खबर एक फेमस कार्टून क्रिएटर योषितो उसुई (Yoshito Usui) को पड़ी तो उन्होंने यह फैसला कर लिया कि मैं यह सच्चाई पूरी दुनिया के सामने लाऊंगा मैं यह दर्दनाक कहानी पूरी दुनिया को दिखाऊंगा एक कार्टून की मदद से और उन्होंने वही किया। उन्होंने एक फेमस कार्टून बनाया Shinchan और मुझे पता है कि आप में से कई लोगों ने इस कार्टून को जरूर देखे होंगे। इस कार्टून की बहुत ज्यादा लोकप्रियता हुई बच्चो में।

 

 

योषितो उसुई इस कहानी से इतना ज्यादा भावुक हुए इतना ज्यादा इससे उनका लगाव हो गया कि वह इस कहानी का आखरी पार्ट लोगों को दिखा नही पाए क्यूंकि उनका यह मानना था अगर कि अगर उन्होंने इस कहानी का आखरी सीजन या आखरी पार्ट लोगों को और बच्चो को दिखा देंगे तो उनके दिमाग में एक बुरा असारर पड़ेगा उनके दिमाग को इससे चोट लगेगी उनके दिल को इससे चोट लगेगी इसलिए आज तक इस कार्टून का आखरी एपिसोड नहीं दिखाया गया।

 

तो यह थी शिनचैन की जिंदगी की असली कहानी । उम्मीद करता हूँ आपको यह लेख “Real Life Story of Shinchan Death in Hindi ” जरूर अच्छा लगा होगा अगर अच्छा लगे तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे। 

 

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