तेनालीराम की कहानी: राजा और चतुर तेनालीराम | Tenali Rama Story in Hindi

तेनालीराम की इस मजेदार कहानी का नाम है राजा और चतुर तेनालीराम (Tenali Rama story in Hindi) उम्मीद करते हैं आपको यह कहानी पसंद आएगी।

 

तेनालीराम की कहानी: राजा और चतुर तेनालीराम

 

राजा कृष्णदेव राय हमेशा अपने सभी मंत्रियो के बुद्धि की परीक्षा लेते रहते थे।

राजा कृष्णदेव राय – आज मैं आप सबको 5, 000 स्वर्ण मुद्राएं दूंगा। यह आपके खुद के खर्च के लिए है। लेकिन यह स्वर्ण मुद्राएं खर्च करने के लिए एक शर्त है। जब भी यह मुद्राएं खर्च करनी है उससे पहले आप सबको मेरा चेहरा देखना होगा। और अगर कोई भी मेरा यह चेहरा देखे बिना मुद्राएं खर्च करें तो उसे दंड दिया जाएगा।

 

सारे सभा मंत्री स्वर्ण मुद्राएं लेकर ख़ुशी-ख़ुशी घर लौट गए।

 

एक हप्ते बाद…

राजा कृष्णदेव राय – चलिए अब बताइए किसने कितने मुद्राएं खर्च की। और उससे क्या ख़रीदा।

 

एक मंत्री ने कहा – जहाँपना, हम सब आपका चेहरा देखे बिना कैसे मुद्रा खर्च कर सकते हैं इसलिए आपकी दी गई स्वर्ण मुद्राएं हम ले आए हैं।

 

राजा कृष्णदेव राय – तेनालीराम, तुमने क्या ख़रीदा?

 

तेनालीराम – जहाँपना, जो भी नए कपडे और कीमती हार मैंने पहना है वे सब आपकी ही दी गई स्वर्ण मुद्राएं से खरीदी गई है।

 

राजा कृष्णदेव राय – इसका मतलब तुमने मेरे आदेश का उलंघन किया। तुमने मेरा चेहरा देखे बिना ही यह सब कुछ खरीद लिया।

 

तेनालीराम – नहीं जहाँपना मैंने कभी आपके आदेशों का उलंघन नहीं किया। वह स्वर्ण मुद्राएं खर्च करने से पहले हमेशा आपका चेहरा देखता था।

 

राजा कृष्णदेव राय – लेकिन कैसे? मैं हमेशा राजमहल में ही रहता था लेकिन तुम्हे यहाँ आते नहीं देखा।

 

तेनालीराम – जहाँपना मैंने जितनी भी स्वर्ण मुद्राएं खर्च की है उसमें हर मुद्रा पर आपका चेहरा छपा हुआ है जहाँपना।

 

राजा को तेनालीराम की चतुराई से गर्भ हुआ। राजा ने तेनालीराम को और 5 हजार स्वर्ण मुद्राओं से पुरस्कृत किया।

 

शिक्षा – बुद्धि और चतुराई ही एक मनुष्य को अमीर बनाती है। 

 

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