नंदी की सच्ची कहानी | Lord Shiva and Nandi Mysterious Story in Hindi

नंदी की सच्ची कहानी | Lord Shiva and Nandi Mysterious Story in Hindi

नंदी की कहानी: भगवान शिव, यह नाम सुनते ही हमें माँ पार्वती, गंगा मइया और उनके गले का सांप इन सभी को छोड़कर नंदी भी याद आते हैं। नंदी भगवान शिव के वाहक हैं। वे शिवजी के साथ सदा कैलास में निवास करते रहते हैं। यह सारे बातें हमें पता हैं लेकिन नंदी कैसे बने भगवान शिव के बाहक अगर आप यह जानना चाहते हैं तो आप सब इस कहानी को जरूर सुनिए।

 

नंदी की सच्ची कहानी

बहुत पहले की बात है शिलाद नामक एक पुण्य ऋषि थे। परंतु उनका कोई पुत्र नहीं था। इसलिए पुत्र प्राप्ति के लिए उन्होंने भगवान शिव की आराधना करने का निर्णय लिया। उन्होंने कई वर्षो तक घोर तपस्या की। उनके तपस्या से प्रभावित होकर भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए। उन्होंने शिलाद से कहा, “पुत्र उठो और मुझे बताओ कि तुम्हे कैसा वरदान चाहिए” शिलाद ने जवाब दिया, “भगवन मेरा सिर्फ एक ही कामना हैं कि मुझे अपना पुत्र चाहिए।” इस पर शिवजी मुस्कुराए और बोले, “अवश्य तुम्हारी यह कामना जल्दी ही पूरी होगी।” शिलाद खुशी-खुशी अपने घर लौटा। वह जानता था कि भगवान शिव उनकी कामना जल्दी ही पूरी करेंगे।

 

अगले दिन जब वह अपनी खेती करने के लिए खेत गया तो खुदाई करते-करते उसने अपने सामने एक सुंदर बच्चा पाया। उस बच्चे में सूर्य जैसा तेज था। तभी एक आकाशवाणी हुई, “शिलाद उस बच्चे को उठाओ और उसकी अच्छी तरह देखभाल करो।” शिलाद उस बच्चे को घर ले गया और उसका नाम नंदी रखा। नंदी बहुत ही होशियार और बुद्धि से तेज था। शिलाद नंदी पर बहुत गर्भ महसूस करते थे।

 

कुछ वर्षो बाद दो ऋषि, मित्रा और वरुण शिलाद के घर आए। शिलाद ने उनका स्वागत किया। शिलाद ने अपने बेटे को बुलाया और उससे कहा, “बेटा नंदी तुम्हारा कर्तव्य है कि इन ऋषियों की सेवा में कोई कमी न रहे।” नंदी मुस्कुराया और गर्दन हिलाकर बोला, “जी पिताजी।” नंदी ने उन दोनों ऋषियों की बहुत सेवा की। अपने आगे की यात्रा जारी रखने के लिए उन दोनों ऋषियों ने आश्रम छोड़ने का निर्णय लिया।

 

जाने से पहले नंदी और शिलाद ने उनसे आशीर्वाद माँगा। मित्रा और वरुण ऋषि ने पहले शिलाद को आशीर्वाद दिया। जब नंदी उनके पैर पड़ने लगा तो दोनों ऋषि गंभीर थे और दोनों ने धीरे से कहा, “अच्छा बेटा अपने माता-पिता और गुरूजी का ख्याल रखना।” ऐसा कहकर दोनों चले गए।

 

 

शिलाद ने दोनों ऋषियों के हावभाव को देखा और वह घर के बाहर भाग गया और पूछा, “ऋषि जी रुकिए, आप मेरे बेटे नंदी को आशीर्वाद देते समय गंभीर और उदास लग रहे थे। कुछ गलत हुआ है क्या?” तब मित्रा ऋषि ने शिलाद की ओर देखा और कहा, “मैं आपके बेटे को लंबे जीवन की कामना नहीं कर सकता।” यह सुनकर शिलाद दुखी हो गए और पूछा, “मेरे बेटे के साथ क्या होने वाला है?” वरुण ऋषि बोले, “शिलाद नंदी के पास लंबा जीवन नहीं हैं। मुझे यह खबर आप तक पहुँचाने का खेद है परंतु यही सत्य है।”

 

ऋषियों की बात सुनकर शिलाद गंभीर और दुखी हो गया। बहुत समय बिताने के बाद शिलाद बड़े दुःख के साथ अपने आश्रम लौटे। नंदी ने तुरंत अनुमान लगाया कि कुछ तो गड़बड़ जरूर है। उसने अपने पिता शिलाद से पूछा, “क्या हुआ पिताजी?” फिर शिलाद ने उन दोनों ऋषियों की बातें नंदी को सुनाई। उनको लगा कि नंदी रोएगा या डर जाएगा पर नंदी हंसने लगा और कहा, “उन ऋषियों की बातों से आप डर गए?”

 

शिलाद चौंक गए। वह नंदी की तरफ शुन्य भाव से देखते रह गए। नंदी बोला, “पिताजी आपने मुझे बताया कि आपने स्वयं भगवान शिव को देखा है। कोई भी इंसान जिसने भगवान शिव को स्वयं देखा है वह ऋषियों की बातों से नहीं डर सकते। पिताजी अगर मेरे भाग्य में मरण लिखा है तो भगवान शिव स्वयं उसे बदल सकते हैं। वे सबसे शक्तिशाली हैं और कुछ भी कर सकते हैं। क्या आपको लगता है कि जब आप और हम सब मिलकर उनकी पूजा करेंगे तो हमारे साथ अघटित हो सकता है? मुझे नहीं लगता पिताजी।”

 

नंदी उसके पिता के सामने झुका और बोला, “मुझे आशीर्वाद दो पिताजी।” शिलाद ने अपने बेटे को आशीर्वाद दिया। नंदी तब भुवना नदी के पास गया। नदी में प्रवेश किया और तपस करना शुरू किया। नंदी की भक्ति इतनी महान थी और उसकी एकाग्रता इतनी ऊँची थी कि भगवान शिव स्वयं उसके सामने प्रकट हुए। तीन आँखों वाले भगवान शिव ने कहा, “नंदी अपने आँखें खोलो।” नंदी ने अपने आँखें खोली और उसने देखा कि उसके आँखों के सामने एक सुंदर व्यक्ति खड़ा है। नंदी बस भगवान को देखता ही रह गया। उसके पास भगवान को पूछने के लिए कुछ भी नहीं बचा।

 

इसके बाद नंदी के मन में तुरंत एक ख्याल आया “कितना अच्छा होगा अगर मैं हमेशा भगवान के साथ रह सकू।” शिवजी ने नंदी की तरफ देखा और कहा, “नंदी तुम्हारा तपस इतना विशाल था कि मुझे प्रकट तो होना ही था। माँगो जो भी चाहिए वह तुम्हे मिल जाएगा।” नंदी बोला, “भगवान मैं हमेशा आपके साथ रहना चाहता हूँ।” नंदी के मुँह से शब्द बाहर निकल गए। शिवजी मुस्कुराए और कहा ,”नंदी मैंने अभी मेरा बैल खो दिया जिस पर मैं यात्रा करता था। आज से तुम्हारा चेहरा बैल सा होगा। तुम कैलास में मेरे साथ रहोगे। तुम हमेशा के लिए मेरे सभी गणों के मुखिया हो जाओगे। मेरे वाहन होंगे और मेरे सबसे प्रिय दोस्त भी।”

 

 

नंदी की आँखों में आंसू आ रहे थे इसलिए उन्होंने अपनी आंखे बंद कर ली और भगवान शिव ने उसकी सभी इच्छा पूरी कर दी थी। तब से नंदी शिव के वाहन बने। शिव के साथी और सभी गणों के मुखिया भी बने। इस प्रकार नंदी ने न केवल अपना भाग्य बदला बल्कि उसने फिरसे अपने लिए नया भाग्य लिख लिया।

 

तो यह थी नंदी की कहानी उम्मीद करता हूँ आपको यह कहानी “नंदी की सच्ची कहानी | Lord Shiva and Nandi Mysterious Story in Hindi” अच्छी लगी होगी अच्छा लगे तो इसे शेयर जरूर करे और इस ब्लॉग को सब्सक्राइब भी करें।

 

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