नालंदा विश्वविद्यालय की कहानी सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। खिलजी ने आखिर ऐसा क्यों किया था ?

नालंदा दुनिया का सबसे दूसरा प्राचीन विश्वविद्यालय है। यहाँ का एजुकेशन लेवल इतना हाई था कि पूरी दुनिया से स्टूडेंट्स यहाँ पढ़ने आते थे। इस विश्वविद्यालय में तकरीबन 10 हजार विद्यार्थी और 2 हजार अध्यापक थे। इतना प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय नष्ट हो चूका है। तो चलिए जानते हैं इस विश्वविद्यालय की नष्ट होने के पीछे कहानी क्या है और किसने किया यह?

नालंदा विश्वविद्यालय की कहानी

नालंदा शब्द संस्कृत के तीन शब्दों को मिलाकर बना हुआ है और वह है ना, आलम और दा। जिसका अर्थ ज्ञान रूपी उपहार पर कोई प्रतिवंध न रखने से है। प्राचीन भारत में नालंदा विश्वविद्यालय उच्चशिक्षा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण विश्वविख्यात केंद्र था, जिसकी स्थापना पांचवी शताब्दी के गुप्त वंश के शासक कुमारगुप्त ने की थी।

 

यह विश्वविद्यालय पटना वर्तमान बिहार राज्य  88.5 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व और राजगीर से 11. 5 किलोमीटर के उत्तर -पूर्व एक गाँव के पास स्थित हैं। यह दुनिया का पहलातम ऐसा विश्वविद्यालय था जहाँ पर उस समय 10 हजार स्टूडेंट्स और 2 हजार प्रोफेसर्स थे और यहाँ पर पढ़ने के लिए सिर्फ भारत के ही नहीं बल्कि कोरिया, जापान, चीन , तिब्बत, इंडोनेशिया, फारस और तुर्की से भी स्टूडेंट्स आते थे।

 

नालंदा विश्वविद्यालय को आक्रमणकारियों ने तीन बार नष्ट किया था और सिर्फ दो बार ही उसे फिरसे बनाया गया था। पहलीबार स्कंधगुप्त के शासनकाल के दौरान मिहिरकुल के तहत हियूल के कारण हुआ था लेकिन स्कंधगुप्त के उत्तराधिकारियों ने उसकी मरम्मत करवाई थी। और दूसरी बार सातबी शताब्दी के शुरुवात में इस विश्वविद्यालय पर आक्रमण किया था और तब राजा हर्षवर्धन ने इस विश्वविद्यालय की मरम्मत करवाई थी। लेकिन तीसरी बार जो हमला हुआ वह सबसे ज्यादा विनाशकारी था। 1193 में तुर्क सेनापति  इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने और उसकी सेना ने इस विश्वविद्यालय को पूरी तरह से नष्ट कर दिया।

 

 

उस समय बख्तियार खिलजी ने उत्तर भारत में बौद्ध दयारा शासित कुछ क्षेत्रों पर कब्ज़ा कर लिया था। लेकिन एक दिन खिलजी बीमार पड़ा और उसने अपने हकीमो से बहुत इलाज करवाया लेकिन वह  ठीक नहीं हो पाया। तभी किसी ने उसे सलाह दी कि वह नालंदा विश्वविद्यालय के आयुर्वेद विभाग के प्रमुख आचार्य राहुल श्रीभद्र से अपना इलाज करवाए। लेकिन खिलजी तैयार नहीं था क्यूंकि उसे अपने हकीमो पर ज्यादा भरोसा था। और वह यह बात मानने को तैयार ही नहीं था कि भारत के बैद उसके हकीमो से ज्यादा ज्ञान रखते हैं।

 

जब कोई भी रास्ता नहीं बचा तो उसने राहुल श्रीभद्र को बुलाया और उनके सामने एक शर्त रखी कि आप मेरा इलाज कीजिए लेकिन मैं आपके दयारा दी गई कोई भी दवा नहीं खाऊँगा। आचार्य ने यह बात मान ली और कुछ दिनों बाद खिलजी के पास कुरान  लेकर पहुँचे और उनसे कहा कि आप कुरान को इस पन्ने से लेकर इस पन्ने तक पढ़ लेना आप ठीक हो जाएंगे।

 

खिलजी ने कुरान पढ़ी और वह ठीक हो गया। प्रमुख आचार्य राहुल श्रीभद्र ने कुरान के कुछ पन्नो पर दवा का एक लेप लगा दिया था। खिलजी धुप के साथ जैसे-जैसे उसको पढता गया वैसे-वैसे वह ठीक हो गया। लेकिन खिलजी खुश होने के बजाई परेशान हो गया कि भारत के विद्वान उनके हकीमो से ज्यादा काबिल और ज्यादा होशियार कैसे हो सकते हैं। उसने देश के ज्ञान, बौद्ध धर्म और आयुर्वेद की जड़ो को मिटाने का फैसला कर लिया और उसने नालंदा विश्वविद्लाय के महान पुस्तकालय को आग लगा दी।

 

 

इस विश्वविद्यालय के लाइब्रेरी में इतने बुक्स थे कि वह लाइब्रेरी तीन महीने तक जलती रही। 90 लाख पांडुलिपियां और हजारों किताबे रखी हुई थी। लेकिन इतने से भी खिलजी का मन नहीं भरा। उसके आदेश पर तुर्क आक्रमणकारियों ने विश्वविद्यालय की हजारो विद्वानों और भिक्षुकों को भी हत्या कर दी। यहाँ की लाइब्रेरी 9 मंजिल की थी। यहाँ पर उस समय में लिटरेचर, एस्ट्रोलॉजी, साइकोलॉजी, लॉ, एस्ट्रोनॉमी, साइंस, इतिहास, मै, आर्टिटेक्चर और भी बहुत सारे विषय पढ़ाए जाते थे।

 

आपको नालंदा विश्वविद्यालय के ऊपर यह लेख “नालंदा विश्वविद्यालय की कहानी सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। खिलजी ने आखिर ऐसा क्यों किया था ?” कैसी लगी निचे कमेंट में जरूर बताएं। उम्मीद करता हूँ आपको इस लेख से जरूर कुछ जानकारी मिली। अगर आपको यह लेख पसंद आए तो इसे शेयर जरूर करें और हमारे इस ब्लॉग को सब्सक्राइब जरूर करें।

 

यह भी पढ़े:-

 

2 thoughts on “नालंदा विश्वविद्यालय की कहानी सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। खिलजी ने आखिर ऐसा क्यों किया था ?

  1. Gilberto Reply

    Pretty great post. I just stumbled upon your blog and wanted to mention that I’ve truly enjoyed browsing your blog posts.
    In any case I’ll be subscribing for your rss feed and
    I am hoping you write again soon!

  2. Leonardo Reply

    If some one needs expert view concerning blogging and site-building afterward i advise him/her to pay a visit this web site, Keep up the good
    job.

Leave a Reply

Your email address will not be published.