Lord Rama Birth Story in Hindi

भगवान राम का जन्म कब और किस युग में हुआ? | Lord Rama Birth Story in Hindi

 

आज के लेख में हम बात करेंगे भगवान राम के बारे में और जानेंगे उनके जन्म के पीछे की कहानी (Lord Rama Birth Story in Hindi) के बारे में। इस लेख कोपूरा जरूर पढ़िए ताकि आप भगवान राम के बारे में कुछ रोचक बातों को भी जान सके।

Lord Rama Birth Story in Hindi

 

भगवान राम की जन्म की कहानी 

जब रावण के अत्याचारों से धरती पर पाप जब अधिक बढ़ गया तब ब्रह्मा से लेकर धरती, इंद्रदेव और ऋषि मुनियों तक सभी भगवान विष्णु के समक्ष पहुँचे। सभी ने कहा कि प्रभु पृथ्वी पर धर्म और सत्य का नाश हो रहा है, पाप बढ़ रहा है राक्षसों का राजा रावण अपने अहम् और अत्याचारों से तीनो लोगों को अपने पैरो तले रोंद देना चाहता है। देव, दानव और मनुष्य कोई भी उसका सामना नहीं कर सकता क्यूंकि महादेव और ब्रह्मा से उसे वरदान प्राप्त है। कृपा आप हम सबकी रक्षा करे।

 

तब महादेव भी वहाँ पधारे। उन्होंने कहा जब ऐसी स्तिथि हो तब किसी महाशक्ति का अवतार लेना आवश्यक हो जाता है। तब भगवान विष्णु ने कहा कि पापी के पाप में ही उसका नाश छुपा होता है। यदि रावण यह समझता है कि इस पुरे ब्रह्मांड में उससे बढ़कर और कोई भी शक्ति नहीं तो उसका नाश भी उसके इसी अहंकार में छुपा हुआ है। अपने अहंकार के समय उसने वरदान मांगते समय वानर और मनुष्य के हाथो मरने का वरदान नहीं माँगा था। जिस मानव को वह तुच्छ समझता है उसी सामान्य मानव रूप में मैं अवतार लेकर उसका अहंकार चूर करूँगा।

 

भगवान विष्णु ने कहा कि मैं अपने कलाओं सहित अयोद्धा नरेश दशरथ के पुत्र के रूप में जन्म लूंगा और पृथ्वी की रक्षा करूँगा, जिससे धर्म और सत्य पालकों को यह विश्वास हो कि अंत में सत्य की ही विजय होती है। पूरी सृष्टि में केवल सत्यमेव जयते ही गूंजेगा।

 

 

एक बार राजा दशरथ और उनके गुरु महर्षि वसिष्ट उनके महल में सूर्यदेव की स्तिथि कर रहे थे। महर्षि ने कहा, “राजन सूर्यदेव उत्तरायण में प्रवेश कर रहे हैं इसलिए आज का दिन बहुत शुभ है। इस मुहूर्त में आप अपने कुलदेवता से जो मांगेगे वह आपको अवश्य मिलेगा।” तब राजा दशरथ ने एक पुत्र की मांग की। महर्षि ने कहा कि आपको यह वरदान अवश्य प्राप्त होगा परंतु उसके लिए एक योग्य का आयोजन करना होगा। यह योग्य अथर्व बेद वेद के ज्ञाता ऋषि श्रृंगी मुनि, जो इस योग्य के विशेषज्ञ हैं उनके द्वारा ही सम्पन्न होना चाहिए।

 

तब राजा दशरथ ने कहा कि ऋषि श्रृंगी जैसे महान योगी को लेने मैं भिक्षु के भाती नंगे पैर जाऊँगा। ऋषि श्रृंगी राजा दशरथ का समर्पण भाव देखकर प्रसन्न हुए और योग्य करने के लिए पधारे। योग्य के समय कुंड से अग्निदेव प्रकट हुए और खीर से भरा एक पात्र राजा दशरथ को प्रदान किया। यह खीर कौशल्या, कैकयी और सुमित्रा तीनो रानियों ने ग्रहण की और तीनो रानिया गर्भवती हुई।

 

उधर ब्रह्मा ने इंद्र को आदेश दिया कि भगवान विष्णु ने धरती पर अवतार लेने का संकल्प ले लिया है, आप सभी देवताओं को पृथ्वी पर वानर रूप में जन्म लेकर प्रभु की सेवा करने का आदेश है। मधुमास के शुक्लपक्ष की नवमी, जो भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है वह शुभ मुहूर्त जब न तो अधिक ठंड थी और न ही अधिक गर्मी तब दशरथ रानी कौशल्या ने पुत्र को जन्म दिया। चारो ओर बधाई और आनंद का वातावरण था।

 

 

कुछ समय पश्चात् ही मंत्रा ने राजा को दशरथ को सुचना दी कि कैकयी ने पुत्र को जन्म दिया है और उसके ही कुछ देर पश्चात् दो दासियों ने महाराज को सुचना दी महारानी सुमित्रा ने दो पुत्र को जन्म दिया है। महाराज की प्रसन्नता का कोई ठिकाना न था। इस प्रकार राजा दशरथ के चार पुत्र राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुगण का जन्म हुआ। चारो राजकुमारों का नामकरण महर्षि वसिष्ट द्वारा किया गया। गुरु वसिष्ट ने नामकरण के समय यह भविष्यवाणी भी की कि चारो भाइयो में अत्यधिक प्रेम होगा परंतु राम -लक्ष्मण और भरत-शत्रुगण की जोड़ी दो शरीर एक प्राण जैसी होगी। इस प्रकार भगवान राम ने इस संसार में जन्म लिया।

 

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इस लेख को पढ़ने के लिए धन्यवाद। हम उम्मीद करते हैं इससे आपको कुछ जानकारी जरूर मिली होगी।

 

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