दुर्योधन की पत्नी भानुमति की कहानी | Duryodhana Wife Bhanumati Story in hindi

दुर्योधन की पत्नी भानुमति की कहानी | Duryodhana Wife Bhanumati Story in hindi

आखिर कौन थी भानुमति? और आखिर क्यों किया था दुर्योधन ने भानुमति से जबरन विवाह? क्या है भानुमति का रहस्य? आज के इस लेख में हम आपको रानी भानुमति की रहस्यमय कहानी के बारे में बताएँगे जो बहुत से लोग नहीं जानते। तो आइये शुरू करते हैं इस लेख को।

भानुमति की कहानी

महाभारत की कथा आज भी बड़े चाव से घरों में सुनी जाती है। महाभारत का हर एक पात्र के बारे में हम सब परिचित हैं और हर एक पात्र अपने विशेष कारण की बजह से जाना जाता है। महाभारत में एक ऐसा ही पात्र था भानुमति का, जिससे शायद बहुत से लोग परिचित नहीं होंगे।

 

दुर्योधन की पत्नी का नाम भानुमति था। भानुमति के कारण ही यह मुहावरा बना है कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा भानुमति ने कुनबा जोड़ा। भानुमति कम्बोज के राजा चन्द्रवर्मा के पुत्री थे। भानुमति बहुत ही सुंदर, आकर्षक, बुद्धिमान और ताकतपर थी। उसकी सुंदरता और शक्ति के किस्से प्रसिद्ध थे। राजा चन्द्रवर्मा ने अपने पुत्री भानुमति के विवाह के लिए स्वयंवर रखा जिसमें कई राजा शामिल थे।

 

भानुमति के स्वयंवर में शिशुपाल, जरासंध, रुक्मी, वक्र, कर्ण आदी राजाओ के साथ दुर्योधन भी गया हुआ था। कहते हैं कि जब हाथ में माला लेकर अपने दासियों और अंगरक्षकों के साथ दरबार में आई और एक-एक करके सभी राजाओ के पास से गुजरी तो वे दुर्योधन के पास से भी गुजरी। दुर्योधन चाहती थी कि भानुमति माला उसे पहना दे लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

 

दुर्योधन के सामने से भानुमति आगे-आगे बढ़ गई और दुर्योधन ने क्रोधित होकर तुरंत ही भानुमति के हाथ से माला झपटकर खुद की ही अपने गले में डाल दी। इस दुष्ट कार्य को देखकर सभी राजाओ ने तलवार निकाली। ऐसी स्तिथि में दुर्योधन ने भानुमति का हाथ पकड़ा और उसे महल के बाहर ले जाते हुए सभी योद्धाओं से बोला, “कर्ण को परास्त करके मेरे पास आना।”

 

दुर्योधन ने सभी योद्धाओं से कर्ण से युद्ध की चुनौती दे दी, जिसमे कर्ण ने सभी को परास्त कर दिया लेकिन जरासंध से कर्ण का युद्ध देर तक चला। जरासंध ने दुर्योधन की पत्नी भानुमति की स्वयंवर में भी भाग लिया था। जब दुर्योधन जबरजस्ती भानुमति को अपनी पत्नी बनाना चाह था तब जरसंध और कर्ण दोनों के बीच 21 दिन तक युद्ध चला।

 

 

इस युद्ध में कर्ण जीत गया और जरासंध ने पुरस्कार में कर्ण को मालिनी का राज्य दे दिया। यह जरासंध की पहली हार थी। इस तरह दुर्योधन ने भानुमति के साथ जबरन विवाह किया। भानुमति को वे हस्तिनापुर ले आने के बाद दुर्योधन ने उसे यह कहकर सही ठहराया कि भीष्म पितामह भी अपने सौतेलो भाइयों के लिए अम्बा, अम्बिका और अम्बालिका का हरण करके लाए थे।

 

इस तरह से भानुमति भी मान गई और दोनों ने विवाह कर लिया। दोनों की दो संतान हुई। एक पुत्र लक्ष्मण था जिसे अभिमन्यु ने युद्ध में मार दिया था और पुत्री लक्ष्मणा थी जिसका विवाह कृष्ण के जाम्वन्ति से जन्मे पुत्र साम्ब से हुआ था। दूसरी ओर अभिमन्यु की पत्नी वत्सला वलराम की बेटी थी। वलराम चाहते थे कि वत्सला की शादी दुर्योधन की बेटी लक्ष्मण से हो।

 

वत्सला और अभिमन्यु एक दूसरे से प्यार करते थे। अभिमन्यु ने वत्सला को पाने के लिए घटोत्कच्छ की मदद ली और घटोत्कच्छ ने लक्ष्मण को इतना डराया कि उसने कसम खा ली कि वे पूरी जिंदगी शादी नहीं करेगा। इसी कारन यह कहावत बनी कि भानुमति ने दुर्योधन को पति चुना न ही दुर्योधन ने जबरजस्ती की शादी। अपने दम पर नहीं कर्ण के दम पर किया भानुमति का हरण।

 

दूसरा, भानुमति की बेटी लक्ष्मणा को कृष्ण पुत्र साम्ब भगा ले गया था और पुत्र लक्ष्मण अभीमन्यु के हाथो युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुआ। इस तरह स्त्रीयो के कारण ही यह कहावत चरितार्थ होती गई।कहते हैं कि भानुमति का कर्ण के साथ अच्छा संवंध बनने लगे थे और दोनों एक दूसरे के साथ मित्र की तरह रहते थे। दोनों की मित्रता बहुत प्रसिद्ध थी और साथ ही भानुमति बेहद ही सुंदर, आकर्षक, तेजबुद्धि और शरीर से काफी ताकतपर थी।

 

गांधारी ने सतिपर्व में बताया है कि भानुमति दुर्योधन से खेल-खेल में ही कुस्ती करती थी, जिसमे दुर्योधन उससे कई बार हार जाता था। भानुमति को दुर्योधन द्वारा पुत्र लक्ष्मण की मौत का गहरा धक्का लगा था लेकिन उसके बाद ऐसी भी सुनने को मिलती है कि भानुमति ने पांडवो में से एक अर्जुन से शादी कर ली थी।

 

 

तो यह थी भानुमति की कहानी उम्मीद करता हूँ आपको यह कहानी “दुर्योधन की पत्नी भानुमति की कहानी | Duryodhana Wife Bhanumati Story in hindi” अच्छी लगी होगी अच्छा लगे तो इसे शेयर जरूर करे और इस ब्लॉग को सब्सक्राइब भी करें।

 

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