हवा और आग | Air And Fire Akbar Birbal Ki Kahani

अकबर बीरबल की कहानी: हवा और आग | Air And Fire Akbar Birbal Ki Kahani

आज हम आपको अकबर और बीरबल की जो मजेदार कहानी बताने वाले हैं उसका नाम है “हवा और आग | Air And Fire Akbar Birbal Ki Kahani उम्मीद करते हैं आपको कहानी अच्छी लगेगी।

 

हवा और आग

Air And Fire Akbar Birbal Ki Kahani

बादशाह अकबर को यह बिलकुल पसंद नहीं था कि कोई उसकी चापलूसी करे। वैसे बादशाह की चापलूसी करने की हिम्मत कोई कर ही नहीं सकता था।

 

एक दिन दो दरबारी अकबर की चापलूसी करने लगे। उन्होंने कहा, “हुजुर आप हमें जो भी काम सौंपेगे, हम उसे चुटकी बजाते  ही कर देंगे।”

 

अकबर ने ताड़ लिया कि यह दोनों दरबारी उसकी चापलूसी कर रहे हैं। उसने दोनों को सबक सिखाने का निश्चय किया। बादशाह ने उनसे कहा, ‘वैसे तो मैं हर किसी को काम नहीं सौंप सकता लेकिन तुम दोनों बहुत आग्रह कर रहे हो इसलिए मैं तुम दोनों को एक-एक काम सौंपता हूँ।”

 

दोनों दरबारी एक साथ बोले, “जहाँपना! हुकुम कीजिए।”

अकबर ने कहा,  “तुम  दोनों में से एक कागज में हवा को बाँधकर ले आओ,  और दूसरा आग को कागज में भरकर ले आओ।”

 

दोनों दरबारी यह सुनकर बहुत आश्चर्य हो गए। यह कैसे विचित्र कार्य से पाला पड़ा है? हमने जान बूझकर ही मुसीबत मोड़ ले ली। यह सोचते हुए दोनों वहाँ सेरवाना हो गए।

 

कई दिनों तक तो वह दोनों दरबारी सिर्फ सोचते रहे। कई किताबें उन्होंने पड़ डाली। लेकिन बादशाह द्वारा कीये गए कार्य को पूरा करने का कोई उपाय नहीं सुझा।

 

अंत में हताश  होकर दोनों दरबारी बीरबल के पास गए और उसके पैरों में गिर पड़े। उन्होंने बीरबल को सारी घटना कह सुनाई और फिर बोले, “हम आपकी शरण में आए हैं,  अब हमारी इज्जत आपकी हाथ में है।”

 

कुछ सोचकर बीरबल मुस्कुराए और दोनों दरबारियों को एक-एक डिब्बा दिया और कहा, “तुम यह डिब्बे लेकर बादशाह के दरबार में जाना और डिब्बे उन्हें भेट कर देना और कहना कि जो काम आपने हमें सौंपे थे वह हम करके लाए हैं।”

 

दोनों दरबारी खुशी-खुशी घर लौट आए। दूसरे दिन वे बादशाह के दरबार में पहुँचे। उन्होंने बादशाह को सलाम कर दोनों डिब्बे उनके सामने रख दिए। बादशाह ने डिब्बों को देखा और उनको खोलने की आज्ञा दी। पहले डिब्बे में से कागज का एक पंखा निकला और दूसरे में कागज की लालटेन, मोमबत्ती और दियाशलाई।

 

कागज का पंखा और कागज की लालटेन देखकर बादशाह को पहले तो आश्चर्य हुआ फिर उन्हें याद आया कि उन्होंने दोनों को आदेश दिया  था कि एक व्यक्ति कागज में हवा बाँधकर लाए और दूसरा कागज में आग लाए।

 

बादशाह तुरंत समझ गए कि यह बीरबल का ही काम है। उन्होंने दोनों दरबारियों से पूछा, “तुम्हे यह उपाय कीसने बताया? सच सच बताना नहीं तो कड़ी सजा मिलेगी।”

दोनों दरबारियों ने काँपते हुए कहा, “हुजूर! हमें यह उपाय बीरबल ने बताया है।”

 

अकबर ने दोनों दरबारियों को डाँटकर उन्हें विदा कर दिया। उस समय बीरबल बैठे-बैठे मुस्कुरा रहे थे। बादशाह तो बीरबल से वैसे ही खुश  रहते थे, आज और भी खुश हुए।

 

उम्मीद करता हूँ आपको अकबर बीरबल की यह कहानी “अकबर बीरबल की कहानी: हवा और आग | Air And Fire Akbar Birbal Ki Kahani” जरूर पसंद आई होगी अगर आपको यह कहानी पसंद आए तो निचे कमेंट में जरूर बताएं और साथ ही हमारे इस ब्लॉग को सब्सक्राइब भी जरूर करें। धन्यवाद।

 

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