श्री कृष्ण ने राधा से विवाह क्यों नहीं किया पूरी कहानी

श्री कृष्ण ने राधा से विवाह क्यों नहीं किया जानिए पूरी कहानी

सदियों से राधा-कृष्ण के प्रेम की कहानी बढ़ती चली आ रही है लेकिन जब भी हम राधा-कृष्ण के प्रेम की कहानी सुनते हैं तो मन में यही सवाल आता है कि श्री कृष्ण ने राधा से विवाह क्यों नहीं किया? इसके पीछे कई तरह की व्याख्याएँ भी दी जाती हैं। पुराणों में इसकी बजह बताई गई हैं लेकिन इसके कई कारन बताए गए हैं।

 

श्री कृष्ण ने राधा से विवाह क्यों नहीं किया 

राधा और कृष्ण की प्रेम की कहानी किसी से छुपती नहीं हैं। उनके अमर प्रेम का उदाहरण आज भी लोग देते हैं। कृष्ण की राधा के साथ लीलाएं और राधा के कृष्ण के लिए दीवानगी किसी से छुपी नहीं है सायद राधा के कृष्ण के लिए प्रेम की बजह से ही राधा का नाम कृष्ण से पहले लिया जाता है राधा और श्री कृष्ण के प्रेम को जीवात्मा और परमात्मा का मिलन कहा जाता है।

 

सबसे पहले बात करते हैं पहली कहानी की कि रुक्मणि ही राधा थी। बहुत सारे लोग यह दावा करते हैं कि राधा और रुक्मणि अलग-अलग नहीं थे और इस दावे के पीछे तीन बड़ी बजह भी दी जाती है। पहला तो यह कि जहाँ राधा होती थी वहाँ रुक्मणि नहीं होती थी और जहाँ रुक्मणि होती थी वहाँ राधा नहीं होती थी। दूसरा यह कि राधा और रुक्मणि दोनों ही कृष्ण से उम्र में बड़ी थी और तीसरा यह कि ग्रंथो में यह लिखा गया है कि राधा लक्ष्मी का रूप थी तो वहीं रुक्मणि को भी लक्ष्मी का रूप कहा जाता था र.रुक्मणि को भी लक्ष्मी के रूप के समान माना जाता था। इन आधारों पर कहा जाता है कि रुक्मणि और राधा असलमे एक ही थी और कृष्ण ने रुक्मणि से विवाह कर ली थी जिनका मतलब उनका विवाह राधा से ही हुआ था।

 

 

श्री कृष्ण ने राधा से विवाह क्यों नहीं किया 

दूसरी कहानी गर्ग संहिता में लिखी गई हैं कि कृष्ण ने राधा से विवाह क्यों नहीं किया था। असलमे कृष्ण और राधा का विवाह बचपन में ही हो गया था इसलिए कान्हा ने दुबारा कृष्ण से विवाह नहीं किया यह बात गर्ग संहिता में लिखी गई है। गर्ग ऋषि यदुबंशियो के कुल गुरु थे। गर्ग ऋषि ने गर्ग संहिता में लिखा है कि एक बार नंदबाबा के कंधे पर कान्हा बैठकर बाजार घूम रहे थे। इसी दौरान सब कुछ जैसा थम सा गया। नंद को एक अलौकिक शक्ति का अहसास हुआ। यह अलौकिक शक्ति कोई और नहीं बल्कि राधा ही थी। इसके बाद सब जहाँ थे वही रुक गए। राधा और कृष्ण अपने बचपन को छोड़कर यौवन में आ गए। दोनों ने जंगल में जाकर विवाह की और दोनों के विवाह के गबाह बने खुद भगवान ब्ब्रह्मा क्यूंकि ब्रह्मा ने ही इन दोनों की विवाह करवाई थी। उसके बाद दोनों फिरसे अपने बचपन में लौट गए और सब कुछ वैसा हो गया जैसा पहले था जैसे कुछ हुआ ही न हो। इसलिए कृष्ण ने दोबारा राधा से विवाह नहीं की थी क्यूंकि वालपन में पहले ही राधा और कृष्ण का विवाह हो चूका था।

 

तीसरी कहानी यह कहती है कि जब परिवारवालों को, उनके माता-पिता को कृष्ण से उनके प्रेम प्रसंग के बारे में पता चला तो राधा को घर में ही कैद कर दिया गया। अपने ही घर में राधा को बंदी के तौर पर रहना पड़ा क्यूंकि उस वक्त राधा की मंगनी हो चुकी थी लेकिन कान्हा ने आकर उसे आज़ाद करवाया और उसके बाद वे यशोधा मइया के पास गए। यशोधा मइया से उन्होंने राधा से विवाह करने की विनती की लेकिन यशोधा के लाख समझाने पर भी कान्हा नहीं समझे। तब नंद कान्हा को गर्ग ऋषि के पास ले गए और फिर हुआ कान्हा का परिवर्तन। गर्ग ऋषि ने कान्हा को यह समझाया कि उनका जन्म एक उद्देश्य के लिए हुआ है। वह इस तरीके से किसी के भी मोह में नहीं बन सकते। धरती पर वह धन के स्थापना के लिए पैदा हुए हैं। गर्ग ऋषि के समझाने के बाद कान्हा ने अपने जीवन को अपने कंधो पर समर्पित कर दिया और अपनी राधा, गाय और गाँव सब कुछ छोड़कर चले गए इसलिए कान्हा ने राधा से विवाह नहीं किया।

 

 

यह तीन अलग-अलग ऐसी कहानिया है जो इस सवाल के जवाब में बनाई जाती है। अब बड़ा यह है कि इन तीन कहानियो में से सत्य कौनसा हैं। दूसरी कहानी की बात करते हैं, असलमे इसे कहानी नहीं कहा जा सकता क्यूंकि इसे गर्ग-संहिता में लिखा गया है और गर्ग ऋषि के किसी भी लेख पर सवाल नहीं उठाया जा सकता क्यूंकि गर्ग ऋषि वह थे जिन्होंने खुद कृष्ण और वलराम का नामकरण किया था। गर्ग ऋषि यदुबंशियो के कुल गुरु थे। गर्ग ऋषि ने अपने गर्ग संहिता में कृष्ण और राधा की एक-एक लीला बताई गई हैं ऐसे में इसे सत्य माना जा सकता है। लेकिन इसके बाद एक और प्रश्न उठता है कि अगर ऐसा था तो कृष्ण ने राधा को अपनाया क्यों नहीं क्यूंकि इनका प्यार एक दूसरे के लिए असीम था जिसकी न तो सुरुवात का पता और न ही अंत का। उनका प्रेम किसी बंधन या किसी वचन का मोहताज नहीं था और राधा कृष्ण को यही बात बताने चाहते हैं। प्रेम तो एक भावना है जिसे कभी खत्म नहीं किया जा सकता, कभी मिटाया नहीं जा सकता। ऐसा ही तो था कान्हा और राधा का प्रेम।

 

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