तुम फिर कब मिलोगे? | Love Story in Hindi | Best Love Story in Hindi

तुम फिर कब मिलोगे? | Love Story in Hindi | Best Love Story in Hindi

Love Story in Hindi | Best Love Story in Hindi

 

आज 4th सेमेस्टर का मैं आखरी पेपर देने जा रहा था। फिर उसके बाद दो महीने की वकेशंस मिलेंगी वह सोच कर ही मजा आ रहा था। अभी तक 2 साल की इंजीनियरिंग में एक्सएम के एक रात पहले पढ़कर पास हुआ था और अब यह लास्ट पेपर के एक्साइटमेन्ट में ही ज़्यादा कुछ पढ़ा नहीं था। कंप्यूटर साइंस भी मैंने जोश-जोश में उठा ली थी मुझे क्या पता था कि मेरे लिए यह इतनी कन्फुसिंग होगी।

 

औटोमेटा का पेपर था जो वैसे ही मेरे समझ के बाहर। भगवान भरोसे निकला घर से की वही कर दे कोई चमत्कार। कॉलेज पहुँचा, दोस्तों के साथ डिस्कशन चालू हो गई। पढाई के बारे में नहीं एक्सएम के बाद पार्टी करने कहाँ जाना हैं उसकी प्लानिंग चलने लगी। सीटिंग प्लान देखा 3rd रौ की 4th सीट पर मुझे बैठना था। मेरी आगे वाली सीट पर अपने बैच का टप्पर तो होगा पर वह भी मेरे किसी काम आना नहीं था। 1 mcq तक का आंसर वह बताता नहीं तो उससे 1 मार्क्स की भी उम्मीद मैं कर नहीं सकता।

 

मेरे आसपास वाली सीट पर भी कोई होगा नहीं तो पता नहीं मैं एक्सएम शीट पर क्या ही लिखूंगा। पेपर शुरू होने को आया। मैं पहुँच गया क्लास में। 20 मिनट मेरे ऐसे ही गुजर गए बस क्वेश्चन पेपर को घूरते-घूरते। जितना समझ आ रहा था लिख रहा था। पेपर शुरू हुआ पर रेज़ल्ट मुझे पहले ही दिख रहा था।

 

मेरी बगल वाली सीट पर किसी दूसरे कोर्स की एक लड़की बैठी हुई थी और अपने एक-एक क्वेश्चन के आंसर पे वह दो दो पेज भरे जा रही थी। 1 घंटा निकल गया और मैंने अब तक 2 ही क्वेश्चन के आंसर लिखे थे। आधे से ज़्यादा टाइम तो बस गुजर रहा था इधर-उधर ही देखते-देखते। पचता भी रहा था कि यार थोड़ा सा ही पढ़ लेता बस पास होने जितना लिखना है और कुछ नहीं चाहिए था।

 

मेरे चेहरे पे सिर्फ परेशानी थी। मेरे साइड में जो लड़की बैठी थी उसने पूछा, “क्या हुआ? आप तब से कुछ लिख ही नहीं रहे।” उसके चश्मे के अंदर से उसके आँखें मुस्कुरा रही थी। मुझे भी यही लगा कि सायद वह मेरा मजाक उड़ा रही थी। मैंने मुस्कुराते हुए धीमी सी आवाज में कहा, “समझ ही नहीं आ रहा क्या लिखुँ।”

 

वह थोड़ा पास आई और फ्रेंडली होकर मुझसे कहा, “मैं हेल्प कर सकती हूँ।” मैं तो खुश हो गया। मैंने उससे पूछा, “इस सब्जेक्ट का आपको आईडिया है? तो बस पास लायक बता दो।” उसने बोला, “मैंने इस सब्जेक्ट का कभी नाम ही नहीं सुना है लेकिन मैं चीटिंग करा सकती हूँ। आपके आगे जो लड़का बैठा है वह सारे आंसर लिख रहा है तब से।”

 

मैंने कहा, “हाँ वह टोपर है बैच का स्टार्टिंग से। पर कोई फायदा नहीं है वह किसी से बात नहीं करता और एग्जामिनेशन हाल में तो कतई नहीं।” उसने बोला, “मुझे उससे कुछ पूछना भी नहीं हैं वह ऐसे पेपर लिख रहा है की मुझे पूरी शीट नजर आ रही है उसकी। तो देर घंटे का टाइम बचा है उसमे पास लायक तो हो ही जाएगा।”

 

 

मैंने कहा, “लेकिन मुझे बताते-बताते क्या आपका पेपर नहीं छूट जाएगा?” उसने कहा, “अरे मेरा कुछ नहीं है बस 2 ही क्वेश्चन बाकि हैं और यह कम्पलीट करने के लिए आधा घंटा काफी है। आपका भी जितना हो सकता है लिख लो। अब मुझे मत घूरते रहो पेन उठाओ और लिखना शुरू करो।”

 

वह धीरे-धीरे थोड़ा-थोड़ा जितना उसको दिख रहा था बताती गई। कहीं टेबल्स या चार्ट्स बनने थे तो वह मुझे बताने के लिए उन्हें अपने हाथो में बनाती गई। मैं भगवान भरोसे एक्सएम देने निकला था और भगवान ने मेरी सुन भी ली। नाउम्मीदी में एक उम्मीद की किरण अब मुझे भी दिखने लगी। हम दोनों साइलेंटली हस भी रहे थे एक दूसरे के ऊपर। वह कभी-कभी  धीरे बोलती थी कि सुनाई ही नहीं दे रहा था मुझे ढंग से। फिर इतनी मशकत के बाद आखिरकार हम कामियाब हुए।

 

मैंने उससे कहा, ” पास लायक हो गया मेरा थैंक्स हेल्प करने के लिए।” उसने कहा, “थैंक्स अभी नहीं जब पास हो जाओगे तब बोलना।” मैंने सोचते हुए बोला कि रेज़ल्ट तो अब दो महीने बाद आएगा अभी समर वकेशंस भी चालू हो जाएंगे तब कैसे बोल पाऊंगा? उसने बिना कुछ बोले मेरा क्वेश्चन पेपर अपने पास ले लिया। उसपे कुछ लिखा और लीखते ही मुझे वापस भी दे दिए। उसने कहा, “This is my number so problem solved?” मुझे समझ ही नहीं आया रियेक्ट कैसे करूँ।

 

इस लड़की से आज मैंने पहलीबार बात की है यहाँ तक की हम पहलीबार ही मिले हैं और पहली मुलाक़ात में ही फ़ोन नंबर? मतलब एक्सएम हाल में भी दिल जुड़ सकते हैं? मैं मन ही मन में ब्लश करने लगा फिर याद आया कि हमने इतनी बातें कर ली पर उसका नाम तो पता ही नहीं चला।

 

मैंने देखा उसकी तरफ और अपना सवाल शुरू किया। वह अपना पेपर लिखने में लग गई थी अब तभी इंविजिलेटर ने मुझसे कहा, “3rd रौ 4th बेंच पेपर हो गया तुम्हारा?” मैंने कहा, “हाँ सर।” उन्होंने कहा, “पेपर हो गया तो जाओ दुसरो को डिस्टर्ब मत करो।” मैंने कहा, “अरे सर एक बार देख तो लेने दो।”

 

कुछ देर बाद मेरे क्लास के बाहर मेरे सारे दोस्त इकट्ठा हो गए। बाहर से मेरे दोस्त मुझे आने के लिए इशारे कर रहे थे। मैंने शीट सबमिट की और निकल गया क्लास के बाहर और जाते ही सबसे बोला कि पहले कैंटीन चलते हैं बहुत भूख लगी है। फिर कैंटीन में सारे दोस्त मिलकर खाने लगे। खाते-खाते मूवी जाएँ या कहीं और उसका भी प्लान बनाने लगे।

 

आधे घंटे बाद हम निकलने के तैयारी में थे ही तभी एक दोस्त ने बोला, “अरे पेपर तो डिसकस करलो यार देख तो लें कि इस लास्ट एक्सएम में फ़ैल होंगे या पास।” सबने क्वेश्चन पेपर निकाले और आंसर पर लड़ने लगे। मैंने भी जेब में हाथ डाला पर मुझे मेरी जेब खाली मिली। मैं सोचने लगा कि मेरा पेपर कहाँ गया और उसमे तो उस लड़की का नंबर भी लिखा था। कहीं क्लास से निकलते वक्त वहीं तो पेपर नहीं छूट गया और उसके नंबर के बिना मैं उसे ढूंढूगा भी कहाँ। पेपर भी खत्म हो गया। क्लास से सब निकल भी गए।

 

इसके बाद मैंने परेशानी में अपने दोस्तों को बोला, “तुम लोग यहीं रुकना मैं अभी आता हूँ।” मैं जल्दी से उसी क्लास में क्वेश्चन पेपर ढूंढने गया। वह सोचने लगा यार मैं कितना लापरवा इंसान हूँ पहलीबार तो किसी लड़की का नंबर मिला था वह भी सामने से। एक पेपर तक भी नहीं संभाल पाया मैं। आज ही होना था क्या यह। उसका नाम भी नहीं पता मुझे और वह कौनसे कोर्स की थी वह भी नहीं जानता। मिलेगी तो यही कॉलेज में पर उसे ढढूंढने का मौका तो 2 महीने बाद ही मिलेगा। रोने सा मन कर रहा था मेरा। आँखों के सामने बस उसी का चेहरा आ रहा था। कितना खुश होकर निकला था एक्सएम हॉल से बाहर अब सारा मूड ख़राब हो गया।

 

 

मैंने बहुत ढूंढा क्वेश्चन पेपर को क्लास में पर मेरी गलती की बजह से ही वह खो गया। मैं ढूंढता रहा उस कागज के टुकड़े को जगह-जगह। नहीं मिला तो मुझे मूह लटकाकर वापस ही निकलना पड़ा। This is my number so problem solved? उसकी यही आवाज मेरे कानो में बार-बार गूंज रही थी। चस्मो के पीछे से उसकी मुस्कुराती हुई आँखें वहीं सवाल मुझसे हर दफा पूछ रही थी। उसने मन ही मन कहा, “चलो तुम्हे ढूंढ तो लूंगा ही मैं थोड़ी देर से ही सही बस मुझे याद रखना तुम और अपनी बातों को भी।”

 

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