जगन्नाथ पूरी मंदिर की कहानी | Story of Jagannath Puri Temple in Hindi

जगन्नाथ पूरी मंदिर की कहानी | Story of Jagannath Puri Temple in Hindi

 

Story of Jagannath Puri Temple in Hindi

 

जगन्नाथ पूरी मंदिर की कहानी 

जगन्नाथ पूरी, पूर्वी भारत के उड़ीशा राज्य में बंगाल के खाड़ी के किनारे बसी महान तीर्थस्तल जगन्नाथ पूरी किसी समय प्राचीन कलिंग की राजधानी रह चुकी है। धर्मशास्त्रों में इसे जगन्नाथ पूरी के अलावा संक्षेत्र, श्रीक्षेत्र और पुरुषोत्तम क्षेत्र भी कहा गया है। भारत के चार धामों में यह भी एक धाम हैं।

 

ऐसी मान्यता हैं की यह कलयुग का धाम हैं। शंकराचार्य दयारा देश के चारो दिशाओं में स्थापित मठो में से एक मठ पूरी में भी है जो की गोवर्धन पीठ के नाम से प्रसिद्ध हैं। पूरी में एकादसी व्रत में किसी ने श्री बल्लभाचार्य महाप्रभु की निष्ठा परीक्षा ली। महाप्रभु ने प्रसाद हाथ में लिए ही द्वादसी शुरू होने तक जगन्नाथ जी का स्तवन करके महाप्रसाद तथा एकादसी को समुचित मान लिया  .

 

शिक्खों के प्रथम गुरु नारद देव जी यहाँ पधारे थे जिनका पवित्र स्थान नारद मठ जो जगन्नाथ मंदिर के सामने हैं। भक्त एबंग कवि, सुर, तुलसी और मीरा  ने भी श्री जगन्नाथ के दर्शन किए थे। चैतन्य महाप्रभु यहाँ लंबे समय तक रहकर यहाँ भक्ति साधना करते रहे। जगन्नाथ रथ यात्रा और छुआछुत निवारण के भावना के कारन ही इस नगर का विशेष महत्व है।

 

 

चैतन्य महाप्रभु ने जगन्नाथ का महाभोग लेते वक्त यहाँ जाती का विचार नहीं किया था। जगन्नाथ पूरी के धार्मिक पृष्टभूमि के बारे में कहा जाता है कि इसे कलयुग का पावनधाम माना जाता हैं।

 

बारहवीं सदी में कलिंग के राजा के दयारा बनाया गया 65 मीटर ऊँचा श्री जगन्नाथ मंदिर यहाँ का प्रमुख और सर्वाधिक विशाल मंदिर हैं। इस मंदिर के मुख्य भाग को श्री मंदिर कहते हैं जिसमे रत्नवेदी पर भगवन जगन्नाथ, सुभद्रा और वलराम की दिव्य मूर्तियां हैं। मंदिर में प्रतिदिन पूजा और आरती के समय भक्तिपूर्ण संगीत में कार्यक्रम होता है जिसमे मृदंग और अनेक प्रकार के वाद्ययंत्रों का इस्तिमाल किया जाता हैं।

 

मंदिर के दो बड़े-बड़े सुंदर परकोटे हैं और मुख्य मंदिर के तीन भाग हैं। सबसे ऊँचे शिखर के निचे तीनो मुर्तिया विराजमान हैं। इस मंदिर के चार दुआर हैं। मंदिर के एक भाग में बहुत बड़ा भोगशाल हैं और दूसरे भाग में एक प्रांगण हैं जहाँ यात्री स्वयं हांडियों में चावल पकाते हैं।

 

 

मंदिर के अंदर और बाहर की शिल्पकला  देखने योग्य हैं। मंदिर के अंदर यदि भीड़ न हो तो तीर्थयात्री स्वयं उनके पास जाकर उनके शरीर छू कर उनका आशीर्वाद ग्रहण कर सकते हैं। मंदिर की चारो और की दीवारे जिसे मेघनाथ प्राचीर कहते हैं उसकी लंबाई 660 फिट और ऊँचाई 20 फिट हैं। मंदिर कलिंग स्थापत्य और शिल्पकला का बेजोड़ उदाहरण हैं।

 

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