आलू अंडा और कॉफ़ी बीन्स Hindi Motivational Story

आलू अंडा और कॉफ़ी बीन्स Hindi Motivational Story

दोस्तों हमारे आसपास और हमारे ज़िंदगी में न जाने कितनी बातें हर रोज होती रहती है। इनमे से कुछ बातें हमारे लिए अच्छी साबित होती है तो बहुत सी बातें हमारे लिए गलत भी साबित हो जाती है। लेकिन जब यह बातें हमारे साथ घटित होते रहते हैं तो मेरे ख्याल से सबसे महत्वपूर्ण यह है कि हमारे भीतर क्या हो रहा है? किस तरह से हम इन बातों से डरते हैं? इसके अंत में हम क्या बनते हैं यह इसी पर निर्भर करता है कि हम हमारे साथ हो रहे परिस्तिथिओ का किस तरह से सामना करते हैं। तो दोस्तों हम इस विषय में गहराई से बात करेंगे एक कहानी के जरिये जो की आज मैं आपको सुनाने वाली हूँ।

 

आलू अंडा और कॉफ़ी बीन्स Hindi Motivational Story

यह कहानी है एक लड़की की जो अपनी ज़िंदगी से पूरी तरह से परेशान हो चुकी है। लड़की बहुत प्रयास करती है लेकिन उसे कोई सफलता नहीं मिल रही है। लड़की जैसे ही एक परिस्तिथि का सामना करती है वैसे ही दूसरी कोई परेशानी उसके सामने आ जाती है।

 

इस बजह से वह लड़की पूरी तरह से कंफ्यूज हो चुकी है कि वह कहाँ पहुँचेगी क्यूंकि जिस तरह से उसकी ज़िंदगी चल रही है उसे कुछ समझमे नहीं आ रहा है कि आज से दस साल बाद या बिश साल बाद वह क्या बनेगी।

 

ऐसे कठिन परिस्तिथि में लड़की अपने पिताजी के पास जाती है और उन्हें कहती है कि मैं क्या करूँ अब आप ही बताइए। लड़की के पिताजी जो की एक रसोइयां हैं वह अपने अलग अंदाज में लड़की के समस्याओ का समाधान देते हैं।

 

लड़की के पिताजी लड़की को रसोई में ले जाते हैं और तीन अलग-अलग बर्तनो में पानी भरके उन्हें गैस पर उबलने के लिए रख देता है। लड़की और भी कुछ कहना चाहती है लेकिन लड़की के पिताजी उसे शांत रहकर बेस उसे देखने के लिए कहते हैं।

 

जब पानी उबलने लगता है तो पिताजी पहले बर्तन में आलू, दूसरे बर्तन में अंडे और तीसरे बर्तन पर कॉफ़ी बीन्स डाल देते हैं और उन्हें उबलने के लिए रख देता है।

 

 

अब लड़की के मन में यह सबाल आता है कि इन तीन चीज़ो को उबकालर पिताजी साबित क्या करना चाहते हैं? लेकिन लड़की कुछ नहीं कहती और बस चुपचाप देखती रहती है। लगभग 20 मिनट उबलने के बाद लड़की के पिताजी गैस को बंद कर देते हैं।

 

फिर वह अपने लड़की से कहते हैं, ‘बेटी देखो, तुमने क्या देखा बताओ?” तो लड़की उन्हें कहती है कि पहले बर्तन में उबले हुए आलू हैं, दूसरे बर्तन में उबले हुए अंडे हैं और तीसरे बर्तन में कॉफी हैं।

 

तो पिताजी उससे कहते हैं कि बताओ तुमने क्या सीखा इन चीज़ो से। तो लड़की कहती है की आप ही बताइए।

 

इस पर पिताजी कहते है,  “आलू, अंडे और कॉफी बीन्स इन तीनो चीज़ो ने समान परिस्तिथियों का समान कठिनाइयों का सामना किया है। इन तीनो को हमने उबले हुए पानी में सामना करने के लिए छोड़ दिया था लेकिन इन तीनो ने अलग-अलग तरीको से कठिनाइयों का सामना किया है। आलू, जो की पहले कठोर था पानी में उबालने के बाद अब वह नरम हो चूका है। अंडा, जिसके अंदर नाजुक सा द्रव्य था वह पानी में उबालने के बाद कठोर हो चूका है और कॉफी बीन्स, इन्होने तो बहुत ही अलग खूबी दिखाई है इन्होने अपनी आसपास के परिस्तिथियों को ही बदल दिया है।”

 

 

अब लड़की के समझ में आता है कि उसके पिताजी क्या कहना चाहते हैं। फिर भी उसके पिताजी उसे कहते हैं कि बेटी हम सबको तुम्हे, मुझे और हमारे आसपास के सभी लोगों को कुछ-कुछ समान कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है लेकिन अंत में हम क्या बन पाते हैं और हमें क्या बनना है यह बस इसी चीज पर निर्भर करता है कि हम इन कठिन परिस्तिथियों का किस तरह सामना करते हैं। तो क्या हम आलू की तरह है जो पहले तो बहुत कठोर थी उसके बाद नाजुक हो जाते हैं या फिर हम अंडो की तरह हैं जो कठिन परिस्तिथियों के आते ही खुदको कठोर बना लेते हैं या इससे भी अलग क्या हम कॉफी बीन्स की तरह हैं जो कठिन परिस्तिथियों केआते ही उन परिस्तितियों को ही बदल देते हैं। तो बेटी तुम बताओ तुम कैसी हो आलू, अंडा या कॉफी की तरह।

 

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