भगवान कृष्ण और फल बेचने वाली की कहानी | Lord Krishna and Fruit Seller Story in Hindi

भगवान कृष्ण और फल बेचने वाली की कहानी | Lord Krishna and Fruit Seller Story in Hindi

भगवान कृष्ण और फल बेचने वाली की कहानी  Lord Krishna and Fruit Seller Story in Hindi

कृष्ण और फल बेचने वाली की कहानी 

भगवान श्री कृष्ण रोज नई-नई लीला करते हैं कभी माखन चुराते हैं, कभी नंदबाबा की पगड़ी पकड़ लेते हैं, कभी उनकी चरणपादुका लेकर दौड़ लगाने लग जाते हैं। तो पुरे गोकुल में यह बात फैल गई कि नंद का लाला रोज कुछ न कुछ लीला करता हैं। अब मथुरा से रोज एक मालिनी गोकुल में शाकसब्जी, फल, फूल बेचने आया करती। उसका नाम था सुखिया। जब सुखिया गोकुल के गलियों में जाती तो गोपिया आपस में बात करती थी, “अरे आज नंद का लाला तो आया ही नहीं। सुबह से शाम होने जा रही है। कल तो माखन चुराने के लिए आया था और हम सब उसे देखे बिना रह भी नहीं पाते हैं।”

 

अब गोपिया जब ऐसे बात कर रही थी तो उस मालिनी ने सुना। उस मालिनी ने पूछा, “अरे गोपियों तुम किसके बारे में बात कर रही हो? कौन बहुत ज़्यादा सुंदर लगता है।” तब उन गोपियों ने बताया, “अरे हम तो नंद के लाल गोपाल के बारे में बात कर रहे हैं।” उसने पूछा, “गोपाल, कौन है यह गोपाल?” तब गोपियों ने कहा, “अरे तुम देखोगी तो तुम भी पागल हो जाओगी। उसकी दीवानी हो जाओगी। बड़ा सुंदर है, बड़ा प्यारा उसका रूप है, माथे पर मोर मुकुट है, काले-काले घुंगरारे बाल हैं और लटे लटक रही हैं मानो जैसे चंद्रमा के बीच तारेहो और मुँह में सुंदर-सुंदर दांत हैं और नाक तो ऐसे लगते हैं जैसे दो खंजन पक्षियों के बीच एक तोता बैठा हो। कभी-कभी हाथ में बाँसुरी लेकर वह चलता है और उसकी चल मतवाली है और उसका नाम कृष्ण है।”

 

मालिन ने जब यह सब बातें सुनी तो कृष्ण की रूप की दीवानी हो गई और गोकुल के गलियों में कहती जा रही है, “कोई फल ले लो री कोई फल ले लो री।” ऐसा कहते-कहते वह नंदभवन के दयार के सामने आई। वहाँ आकर आवाज लगाई लेकिन नंदभवन के दयार से कोई भी नहीं आया। वह मालिन वापस चली गई।

 

अगले दिन वह मालिन फिर आई और कहने लगी, “कोई फल ले लो री, कोई फल ले लो री।” अगले दिन भी कोई नहीं आया। ऐसे करते-करते कई दिन हो गए। अब मालिन सोचती हैं, “क्या पता यह नंद का लाल हम पर कृपा करेगा या नहीं करेगा। जिसके बारे में गोपिया बता रही हैं मैं भी तो देखूं वह कितना सुंदर हैं। आज जब तक मुझे कृष्ण के दर्शन नहीं होंगे मैं उनके दयार पर ही बैठी रहूंगी।”

 

 

आज मालिन फिर आई हैं और वह फलवाली फिर कहती हैं, “कोई फल ले लो री, कोई फल ले लो री।’ऐसे ही नंदभवन के दयार के बाहर आवाज लगाई जा रही है। उसे उम्मीद है कि आज कृष्ण अवश्य ही आएंगे और जैसे ही आज भगवान ने सुना तो दौड़े-दौड़े आएं। छोटे-छोटे पैर हैं, सुंदर पीतांवर हैं, कानो में कुण्डल हैं। वह दौड़कर मइया के पास आए और बोले, “मइया तेरी टोकरी में क्या है?”

 

मइया ने कहा, “इसमें तो फल हैं बेटा।” कृष ने कहा, “मइया हमको दे दें।” मइया बोली, “हाँ हाँ बेटा मैं तुझे देने के किये ही तो यहाँ आई हूँ।” मालिन एक तक कृष्ण को देखे जा रही हैं। फिर मइया लाला से कहती है, “लाला मैं तुम्हे फल तो दूंगी पर बदले में कुछ धन या पैसा लेकर आओ।” बाल कृष्ण छोटे से हैं वह बोले, “माँ यह धन पैसा क्या होता है? यह तो मैं नहीं जानता। कहाँ से लेकर आऊं?” मइया बोली, “अब मैं तुम्हे कैसे समझाऊँ। तू एक काम कर बदले में कुछ अनाज ही लेकर आ। घर में कुछ गहुँ के चावल के दाने हो तो बेटा तू वह लेकर आ।” कृष्ण बोले, “ठीक हैं मइया।”

 

कृष्ण अपने छोटे-छोटे पैरो से अंदर गए और अपने दोनों हाथो की अंजुरी में अनाज भरकर ले आएं और दौड़े-दौड़े नंदभवन के अंदर से बाहर आएं और रास्ते में अनाज के दाने गिरते जा रहे हैं। मइया दूर से भगवान का दर्शन कर रही है और कहती है ,”बाह! कितना सुंदर है नंद का लाला। मइया के पास आते-आते श्री कृष्ण के दोनों हाथो के बीच से अनाज के दाने गिरते जा रहे हैं। जब वह मइया के पास पहुँचा तो बोला, “मइया यह लो केवल दो-चार दाने ही बचे।” फल बेचने वाली ने कहा ,”लाला क्या लेकर आए हो?” बाल कृष्ण ने कहा, “मइया बहुत सारे अनाज लेकर आया हूँ दोनों मुट्ठी में अनाज हैं।” मइया बोली, “अच्छा लाला जरा दिखा।”

 

जैसे ही कृष्ण ने अपने दोनों हाथ खोले तो उसमे सिर्फ दो-चार ही दाने बचे थे। फलवाली बोली, “लाला तूने तो कहा बहुत सारी अनाज लेकर आए हो यह देख थोड़ा सा हैं।” भगवान बोले, “मइया वहाँ से तो बहुत सारे लेकर आया था सब रास्ते में गिर गया। मइया मैं क्या करूँ मेरे हाथ छोटे-छोटे हैं और मेरे हाथो के बीच से सारे अनाज गिर गए माँ।”

 

भगवान की मीठी-मीठी बातें सुनकर फलवाली मुस्कुराने लगी और जो दो-चार दाने भगवान लाए थे वह उनसे ले लिए और उन्हें टोकरी में रख लिया और बदले में जितने फल थे सारे भगवान को दे दिए। मइया ने सारे फल कृष्ण को देकर अपनी टोकरी ली और मइया जब आवाज लगा रही थी कि कोई फल ले लो री, कोई फल ले लो री अब मइया भूल वह भूल गई है और मइया आवाज लगा रही है कि कोई शाम ले लो री, कोई शाम ले लो री।

 

 

अब जैसी ही फलवाली गोकुल के गलियों से जा रही थी तो गोपिया समझ गई कि आज इसने नंद के लाला की दर्शन कर लिए हैं इसलिए कह रही है कि कोई शाम ले लो री, कोई शाम ले लो री। आँखों में प्रेम के आँसू हैं और गाते जा रही है कोई शाम ले लो री….कोई शाम ले लो री….फिर मइया अपने घर जाती है। उस टोकरी को उतारती है और देखती वह दो-चार अनाज दाने जो कृष्ण ने उन्हें दी थी वह वह टोकरी पूरी की पूरी हीरे और मोतियों से भर गई हैं। माँ रोए जा रही हैं। इस प्रकार भगवान कृष्ण ने उस फलवाली के ऊपर कृपा करि।

 

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