Lord Jagannath Story in Hindi

Jagannath Story in Hindi – जगन्नाथ जी मंदिर छोड़कर क्यों चले गए

अचानक जगन्नाथ जी के कानो में कुछ मधुर ध्वनि सुनाई दिए और उसे सुनते ही तुरंत जगन्नाथ जी उठे और सीधे मंदिर के बाहर निकल गए। दोस्तों आज हम बात करेंगे जगन्नाथ जी के बारे (Jagannath Story in Hindi) में कि क्यों वह मंदिर छोड़कर चले गए थे और क्या थी इसके पीछे की पूरी कहानी।

Lord Jagannath Story in Hindi

भगवान के दर्शन करने के लिए हम मंदिर जाते हैं लेकिन अगर भगवान ही मंदिर से बाहर चले जाए तो.. लेकिन भगवान मंदिर से बाहर क्यों जाएंगे? यही तो है राज की बात। इतिहास में एक ऐसा समय आया था जब हमारे प्यारे जगन्नाथ जी मंदिर छोड़कर किसी के पीछे चले गए थे।

 

जगन्नाथ पूरी धाम में सूर्यदेव समुद्र में प्रवेश कर चुके थे। मुख्य मंदिर के पुजारीगण भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुपुत्र मइया का शयन श्रृंगार और सेबा करके अपने-अपने घर लौट रहे थे। पूरी की मार्ग पर भक्तो की भीड़ धीरे-धीरे कम हो रही थी और ऐसे समय में अचानक जगन्नाथ जी के कानो में कुछ मधुर ध्वनि सुनाई दी और उसे सुनते ही तुरंत जगन्नाथ जी उठे और सीधे मंदिर के बाहर चले गए। ऐसा लग रहा था मानो वह मधुर ध्वनि जगन्नाथ जी को अपने और आकर्षित कर रहे थे। जिस प्रकार सुदामा का नाम सुनकर भगवान श्री कृष्ण खुले पैर बिना मुकुट और बिना श्रृंगार के द्वारका के मार्ग पर दौड़ने लगे थे इसी प्रकार जगन्नाथ जी भी उस संगीत की लहरे जिस दिशा से आ रही थी उस दिशा में दौड़े जा रहे थे।

 

लेकिन जगन्नाथ जी ने ऐसा क्या सुन लिया जो इस प्रकार वह मंदिर से बाहर निकल पड़े। वास्तब में बात यह थी कि पूरी के नजदीक एक गाँव में एक माली रहता था। उसकी पुत्री का नाम  था पद्मा। उस समय पद्मा अपने बगीचे में से बैंगन तोड़ रही थी और साथ ही साथ महान कवी जयदेव गोश्वामी दयारा रचित श्री गीत गोविंद भी गा रहे थे। बस, उसकी आवाज से जो भक्तिरस और श्राद्धता टपक रही थी उसी ने हमारे जगन्नाथ जी को मंदिर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया।

 

पद्मा इतना सुंदर और मधुर स्वरों में गीत गोविंद गा रही थी कि स्ययं भगवान जगन्नाथ इस गीत गोविंद को सुनने के लिए पद्मा के पीछे-पीछे आ गए। अब पद्मा जिस उद्यान में कार्य कर रही थी वहाँ तो काटे भी थे और कंकर भी थे लेकिन जगन्नाथ जी गीत गोविंद को सुनने में इतने लीन हो गए कि उन्हें यह भी पता नहीं चला कि उनके वस्त्र झाड़ी और कांटे में फँसकर फट चुके थे। उनके उत्तरी का ऊपरी हिस्सा काँटों से फटकर वही उद्यान में गिर गया। उनके पैरों में भी कुछ पत्थर और कांटे चुभ गए लेकिन हमारे जगन्नाथ जी को तो होश ही कहाँ था। वे तो मग्न थे इस बालिका के मुख से गीत गोविंद सुनने में।

 

 

कुछ समय बाद पद्मा अपना कार्य करके वहाँ से चली गई और गीत गोविंद भी खत्म हो गया इसलिए फिर हमारे भोलेभाले जगन्नाथ जी इस गीत गोविंद से सम्पूर्णरूप से संतुष्ट होकर वापस अपने मंदिर में आ गए। अब दूसरे दिन पुजारियों ने सुबह उठकर जब जगन्नाथ जी को देखा तो उनके तो होश ही उड़ गए। उन्होंने देखा कि जगन्नाथ जी के सारे वस्त्र फटे हुए हैं। यह देखकर सभी पुजारीगण चिंतित हो गए। उन्होंने तुरंत ही राजा को सुचना दी और यह सुनकर राजा को भी आश्चर्य हुआ। सभी को कुछ अमंगल होने की अनुभूति लग रही थी।

 

आखिरकार राजा ने अन्न-जल का त्याग कर दिया और भगवान जगन्नाथ जी के चरणों में गिरकर उनसे इस प्रकार प्रार्थना करने लगे “हे प्रभु, हे जगतपति आपका इस प्रकार दर्शन हमने कभी नहीं किया। आपकी यह स्तिथि हमें व्यथित कर रही है प्रभु। कृपा आप हमारी भूल को क्षमा कीजिए। यदि आपकी सेवा में हमसे कोई त्रुटि हो गई है तो कृपा आप मुझपर अपनी कृपा करे और मुझे क्षमा करें।”  इस प्रकार भगवान से अश्रुपूरित नेत्रों से प्रार्थना करते हुए राजा ने पूरा दिन अन्न-जल का त्याग किया और उनकी यह अवस्था देखकर स्वयं भगवान जगन्नाथ जी राजा के स्वप्न में आए और उनसे कहा, “हे प्रिय राजा, चिंता मत करो। वास्तव में मेरे प्रिय भक्त जयदेव गोश्वामी ने जो गीत-गोविंद लिखा है वह मुझे अत्यंत प्रिय है। कल रात को एक कन्या मधुर स्वर में गीत गोविंद गा रही थी। उसी को सुनने के लिए मैं कल रात वहाँ चला गया था। वह कन्या जहाँ यह गीत गा रही थी वहाँ कुछ काटे और पत्थर भी थे जिसमे फँसकर मेरा वस्त्र फट गया और आधा कपडा वहीं गिर गया। इसलिए इस सम्पूर्ण घटना में तुम्हारी कोई भूल नहीं हैं लेकिन हाँ, मेरी यह इच्छा है कि तुम प्रतिदिन उस कन्या को वहाँ बुलाओ और रात्रि को शयन करने से पहले मुझे उसके दयारा गाया हुआ गीत गोविंद सुनाओ।”

 

जगन्नाथ जी के आदेश पर राजा ने तुरंत सैनिको को उस स्थान पर भेजा और सभी लोग यह देखकर आश्चर्यचकित हो गए की सचमे वहाँ जगन्नाथ जी के उत्तरी का ऊपरी हिस्सा पड़ा हुआ था। यह देखकर राजा स्वयं उस माली और उसकी पुत्री पद्मा के पास गए। वहाँ जाकर उन्होंने उनसे प्रार्थना की कि वे पूरी में आकर निवास करे और प्रतिदिन जगन्नाथ जी के प्रसन्नता के लिए पद्मा गीत गोविंद का गान करे। उनके तथा उनके परिवार के रहने और आजीविका के सम्पूर्ण व्यबस्था राजा दयारा की जाएगी।

 

जब पद्मा ने यह सुना तो उसे भी बहुत आश्चर्य हुआ कि स्वयं भगवान जगन्नाथ जी ने उसकी सेवा स्वीकार की है। इस प्रकार पद्मा और उसका परिवार पूरी में आकर निवास करने लगा और पद्मा प्रतिदिन जगन्नाथ जी को रात्रि के समय गीत गोविंद सुनाने लगी। राजा ने इस सेवा को बड़ा ही आदर दिया और उन्होंने इस गीत गोविंद के लिए समय तथा नियम भी निर्धारित किए। इतना ही नहीं इसे स्थायी रूप से एक आदेश के रूप में पत्थर पर भी अंकित करवाया और आज भी इस प्रथा को चालू रखा गया है। आज भी प्रतिदिन जगन्नाथ जी को शयन करवाने से पहले गीत गोविंद सुनाया जाता है।

 

 

तो ऐसे हैं हमारे जगन्नाथ जी जो अपने भक्तो को आनंद देने के लिए और उनसे आनंद लेने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।

 

तो दोस्तों, यह थी माँ छिन्नमस्ता की कहानी और उनके रूप का रहस्य। उम्मीद करता हूँ आपको यह लेख “Jagannath Story in Hindi – जगन्नाथ जी मंदिर छोड़कर क्यों चले गए” जरूर अच्छी लगी होगी अगर अच्छा लगे तो कमेंट करके जरूर बताएं और हमारे इस ब्लॉग को भी जरूर सब्सक्राइब करें।

 

यह भी पढ़े 

माता लक्ष्मी कैसे बनी विष्णु जी की पत्नी

छठ पूजा की सुरुवात आखिर कैसे हुई पूरी कहानी

भगवान राम की मृत्यु कैसे हुई थी?

रावण की असली कहानी

सावन महीने में भोलेनाथ की कहानी

 

Follow Me on Social Media

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *