क्यों कृष्ण ने दिया राधा को श्राप | हैरतअंगेज अनसुनी कहानी

क्यों कृष्ण ने दिया राधा को श्राप | हैरतअंगेज अनसुनी कहानी

 

क्यों कृष्ण ने दिया राधा को श्राप जानिए इसके पीछे की कहानी 

श्री कृष्ण जी और श्री राधा रानी एक दूसरे से अलग है ही नहीं। श्री राधा जी श्री कृष्ण की शक्ति हैं। श्री कृष्ण के जीवन में श्री राधा रानी प्रेम की शाकसात मुहरत बनकर आई। ऐसा प्रेम जिसे कोई माप ही नहीं सकता सम्पूर्ण ब्रह्मांड की आत्मा कृष्ण हैं तो स्वयं कृष्ण की आत्मा राधा जी हैं। पर क्या आप जानते हैं कि कृष्ण की आत्मा स्वयं राधा पर ऐसा भी हैरतअंगेज आरोप लगता है ऐसी भी कहानी उनके ऊपर सुनने को मिलती हैं जिसमे यह बताया जाता है कि एक बार श्री कृष्ण ने राधा रानी को कभी संतान न होने का श्राप दे दिया था।

 

कृष्ण ने राधा जी को जो श्राप दिया उसकी पुष्टि श्रीमद्देवीभागवत नाम के पुस्तक से होती है। श्री कृष्ण और राधा एक ही थे। कृष्ण अपनी राधा को कभी श्राप दे ऐसा संभव ही नहीं हैं लेकिन किसी भी नतीजे से पहुँचने से पहले हमें यह जानना जरुरी है कि असलमे पूरी कहानी क्या है और इसकी सुरुवात आखिर हुई क्यों।

 

यह बात उस समय की है जब श्री कृष्ण ने सृष्टि प्रारंम्भ की। जिस प्रकार नारायण ने सृष्टि प्रारम्भ की थी उसी प्रकार देवीभागवत में श्री कृष्ण ने भी सृष्टि प्रारंभ की थी। उस सृष्टि में श्री कृष्ण ने सबसे पहले सोचा कि मैं सबसे पहले किसका विवरण करूँ? किसका निर्माण करूँ? तब उन्होंने अपने में से ही एक सुंदर से देवी को प्रकट किया जो अत्यधिक दिव्य थी और श्री कृष्ण के समान ही बेहद सुंदर और आकर्षक थी।

 

 

जब श्री कृष्ण ने उस दिव्य शक्ति से पूछा कि हे देवी आप कौन हैं? तब उन्होंने कहाँ कि मैं तो आप ही मैं से निकली हूँ देव इसलिए आप ही बताएं कि मैं कौन हूँ? तभी कृष्ण कहते हैं कि आप मेरी शक्ति श्री राधा रानी हैं। मैं आप ही का गुणगान किया करूँगा। आपका विवरण और आपका मुख दर्शन में हमेशा किया करूँगा।

 

इस प्रकार बात जब बढ़ती गई तब श्री कृष्ण को यह ज्ञात हुआ कि उन्हें सृष्टि के निर्माण के लिए और भी अनेक कार्य करने हैं। इस कथा में आगे बताया जाता है कि उस समय श्री राधा रानी ने सोचा कि उन्हें भी एक पुत्र की आवश्यकता हैं। राधा रानी ने जब यह कल्पना की कि मेरा भी पुत्र होना चाहिए तभी उनके शरीर से एक दिव्य पुरुष प्रकट हुई जो बालक ही थे परंतु वह बहुत ही दिव्य थे।

 

कुछ दिनों के पश्चात जब राधा रानी ने उनके मुख को देखा तब उनके मुख में उन्हें पूरा ब्रह्मांड समाया हुआ देखा। यह देखकर कहा जाता है कि राधा रानी जी को अच्छा नहीं लगा परंतु राधा रानी करती भी क्या। तब उन्होंने उस वालक को जल में प्रभाहित करने का फैसला कर लिया।

 

जब उन्होंने उस पुत्र को जल में बहा दिया तब यह बात श्री कृष्ण को पता चली। उन्होंने देख लिया और वह बहुत ही ज़्यादा क्रोधित हो गए। श्री कृष्ण ने कहा कि हे देवी यह आपने आज क्या कर दिया? मैं आज आपको यह श्राप देता हूँ कि आपको कभी संतान प्राप्ति नहीं होगी चाहे आप कुछ भी करें आप सदा किशोरी ही रहेंगे।

 

कहा जाता है कि यह सुनकर श्री राधा रानी कुछ न कह सकी। उन्हें अपनी गलती का अहसास हो गया था लेकिन अब गलती हो चुकी थी और श्राप भी मिल चूका था।

 

 

दोस्तों श्रीमद्देवीभागवत के इस कथन को सुनकर मुझे नहीं लगता कि कृष्ण ने राधा रानी को कभी श्राप दीया होगा। कृष्ण अपने राधे को श्राप दे यह बात कोई सपने में भी नहीं सोच सकता है क्यूंकि वह दोनों सोचते भी एक ही ह्रदय से हैं। उनके मत अलग-अलग भला कैसे हो सकते हैं और रही बात श्रीमद्देवीभागवत के इस पुस्तक की जिसमे यह कथा पूरी तरह से लिखी हुई हैं कि किस प्रकार श्री कृष्ण ने राधा रानी को निसंतान होने का श्राप दिया और इसी कारन राधा रानी की कोई संतान नहीं थी तो यह कथन एक भ्रामक कहानी ज़्यादा प्रतीत होती है।

 

तो दोस्तों आपको यह कहानी “क्यों कृष्ण ने दिया राधा को श्राप | हैरतअंगेज अनसुनी कहानी” कितनी हद तक सही लगती है और आपका इसके बारे में क्या विचार हैं आप कमेंट करके जरूर बता सकते हैं।

 

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