Jagannath Story in Hindi - जगन्नाथ जी ने पुजारी को क्यों डांटा

Jagannath Story in Hindi – जगन्नाथ जी ने पुजारी को क्यों डांटा

भगवत गीता के चौथे अध्याय के आठवें श्लोक में भगवान श्री कृष्ण यह घोषणा करते हैं कि दुष्टो का विनाश करने, अपने भक्तो की रक्षा करने और धर्म की स्थापना करने के लिएवे समय-समय पर इस पृथ्वी पर अवतरित होते हैं लेकिन एक रहस्य की बात और हैं। क्या आप जानते हैं कि इन कारणों के अलावा भी भगवान एक और कारन से भी इस पृथ्वी पर अवतरित होते हैं और वह कारन क्या और और हैं और इसके पीछे की क्या कहानी हैं वह आज हम इस लेख में जानेंगे। इस लेख में हम आपको जगन्नाथ जी की एक ऐसी कहानी बताने जा रहे हैं जो अपने पहले कभी नहीं सुनी होगी।

 

Jagannath Story in Hindi – क्यों डांटा जगन्नाथ जी ने पुजारी को 

जगन्नाथ पुरी धाम, यह भगवान जगन्नाथ जी का धाम हैं जहाँ सिर्फ उनकी और उनकी भक्तो की ही इच्छा चलती हैं। रघु दास, यह भगवान जगन्नाथ जी के महान और  प्रिय भक्त हैं जो की भगवान जगन्नाथ जी के मंदिर के सींग दयार पर रहते हैं।

 

वैसे थे रघु दस भगवान रामचंद्र के बहुत बड़े भक्त थे लेकिन एक दिन क्या हुआ जब वह भगवान जगन्नाथ जी के दर्शन करने गए तो जगन्नाथ जी के सामने उन्हें भगवान राम, लक्ष्मण और सीता जी के दर्शन हुए। बस तब से उन्हें विश्वास हो गया कि भगवान राम और भगवान जगन्नाथ में कोई अंतर नहीं हैं और फिर भगवान जगन्नाथ जी के प्रति उनका साख्य भाव दिन प्रतिदिन बढ़ता गया।

 

एक दिन रघु दास ने जगन्नाथ जी के लिए एक सुंदर फूलो का हार बनाया और भगवान को चढ़ाने के लिए पुजारी को दिया लेकिन समस्या यह हो गई कि इस हार को जिस धागे में पिरोया गया था वह धागा केले के पेड़ के छाल से बना हुआ था और उस समय इन चीज़ो का प्रयोग मंदिर में वर्जित था इसलिए पुजारी जी ने उसे लेने से मना कर दिया और यह देखकर बेचारे रघु को बहुत बुरा लगा। रघु दास उदासी अवस्था में मंदिर से बाहर आ गए।

 

 

फिर सन्ध्या आरती देने के बाद भगवान को शयन करवाने से पहले एक विशेष श्रृंगार किया जाता है उसे बड़ा श्रृंगार वेश कहा जाता हैं। जब पुजारी शाम को भगवान का यह श्रृंगार करने लगे तो एक चमत्कार हुआ। पुजारी भगवान के शरीर को फूलो से सजा रहे थे लेकिन एक भी फूल उनके शरीर पर टिक नहीं रहा था।

 

बार-बार पुजारी प्रयास कर रहे हैं लेकिन सारे फूल निचे गिर जा रहे हैं और यह देखकर सभी पुजारी चिंतित हो गए। उन्हें लगा कि निश्चय ही उनसे कोई अपराध हुआ है इसलिए सबने मिलकर निश्चय किया कि जब तक भगवान प्रकट होकर हमें नहीं बताएंगे तब तक हम यहीं मंदिर में रहेंगे और उपवास करेंगे।

 

आखिरकार भगवान मुख्य पुजारी के सपने में आए और उनको डांटते हुए कहा, “मेरा प्रिय भक्त रघु दास मेरे लिए एक सुंदर फूलो का हार लेकर आया था। उसने इतने प्रेम और भक्ति के साथ वह हार बनाया था और तुमने उसका अस्वीकार कर दिया। क्या तुम्हे उसका प्रेम दिखाई नहीं दिया? अब मेरा भक्त अपने घर में भूखा-प्यासा उदास मन से लेटा हुआ है। जब तक मेरे भक्त की इच्छा पूरी न हो जाए तब तक मैं कैसे सुखपूर्वक शयन कर सकता हूँ।”

 

 

जैसे ही भगवान ने यह कहा कि तुरंत ही पुजारी उठ गया और उसने यह सारी घटना अन्य पुजारिओं को सुनाया। उसके पश्चात सभी पुजारी रघु दास के घर गए। वहाँ जाकर उन्होंने रघु दास से क्षमा माँगी और भगवान के लिए वह फूलो का हार देने के लिए कहा। जब रघु दास ने यह सुना तो वह अत्यंत हर्षित हो गए यह सोचकर कि आखिर भगवान जगन्नाथ जी ने उनका हार स्वीकार किया।

 

तो दोस्तों आपको यह कहानी “Jagannath Story in Hindi – जगन्नाथ जी ने पुजारी को क्यों डांटा” कितनी हद तक सही लगती है और आपका इसके बारे में क्या विचार हैं आप कमेंट करके जरूर बता सकते हैं।

 

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